तुमसे है उजाला: प्रधानमंत्री मोदी के सामने गा चुकीं मथुरा की बेटी, ऐसा रहा 22 साल की खुशी गोस्वामी का सफर
Khushi Goswami Singer: मथुरा में पली-बढ़ी खुशी गोस्वामी के लिए संगीत आत्मा की भाषा और जीवन जीने की कला है। उनके सुरों में गहराई है, जो दिल को छू जाती है और सुनने वाले के मन को असीम शांति प्रदान करती है।
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goswami khushi: संगीत वह शक्ति है, जो न केवल आत्मा को छूता है, बल्कि जीवन को भी एक नई दिशा देता है। खुशी गोस्वामी इसी संगीत शक्ति का जीवंत उदाहरण हैं। मात्र 22 वर्ष की उम्र में खुशी ने जो मुकाम हासिल किया है, वह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में जन्मीं खुशी का बचपन से ही संगीत के प्रति गहरा लगाव रहा है। संगीत उनके लिए केवल एक शौक नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। वह कहती हैं, “संगीत मेरे लिए साधना है, आत्मा की भाषा है और जीवन का मार्गदर्शक भी।”
खुशी ने अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत विधिवत रूप से की और प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। उनकी आवाज में वो मिठास, गहराई और साधना की झलक है, जो किसी को भी मंत्र-मुग्ध कर देती है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत से लेकर भजन, लोक संगीत और पाश्चात्य शैली के संगीत में भी अपनी पकड़ बनाई है।
कौन हैं खुशी गोस्वामी?
आज खुशी सिर्फ एक प्रवीण गायिका ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक संगीत शिक्षिका भी हैं। वह नोएडा के एक स्कूल में संगीत शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, जहां विद्यार्थियों को भारतीय और पाश्चात्य संगीत की बारीकियां सिखाती हैं। इसके साथ ही वह दिल्ली के राष्ट्रीय बाल भवन में भी संगीत विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रही हैं। वह अपने विद्यार्थियों को सिर्फ राग और सुर नहीं सिखातीं, बल्कि संगीत के माध्यम से जीवन जीने की कला भी सिखाती हैं।
पीएम मोदी के समक्ष गायन
खुशी का मानना है कि संगीत केवल रागों का संगम नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से निकली सच्ची अभिव्यक्ति है। वह हर विद्यार्थी में यह विश्वास जगाती हैं कि संगीत जीवन के हर मोड़ पर साथ निभाने वाला एक सच्चा साथी है, चाहे वो संघर्ष हो या सफलता। उनकी मेहनत और प्रतिभा का परिणाम है कि उन्हें अभी तक कई गौरवशाली मंचों पर प्रदर्शन का अवसर मिल चुका है। खुशी कहती हैं, “मुझे तीन बार यह सौभाग्य प्राप्त हुआ, जब मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपनी गायन प्रतिभा को प्रस्तुत किया, जो कि मेरे लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।”
अश्विनी मिन्ना बेस्ट सिंगर अवॉर्ड
खुशी को उनके गायन के लिए अश्विनी मिन्ना बेस्ट सिंगर अवॉर्ड से भी नवाजा गया, जो उनके समर्पण, निरंतर अभ्यास और संगीत के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रमाण है। इसके अलावा उन्होंने संस्कार टीवी पर एक भजन गायिका के रूप में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, जहां उनकी मधुर आवाज ने करोड़ों दर्शकों को भावविभोर किया है। मशहूर शेफ और फिल्ममेकर विकास खन्ना की फिल्म ‘द लास्ट कलर’ में भी खुशी ने ग्रुप सॉन्ग में भाग लेकर अपनी प्रतिभा को एक वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
खुशी गोस्वामी की उपलब्धि
कॉलेज के समय में भी खुशी संगीत कार्यों में सक्रिय रहीं। दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में वह संगीत सोसाइटी की प्रेसिडेंट रहीं और कई इंटर कॉलेज प्रतियोगिताओं में कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते हुए अनेक पुरस्कार जीते। खुशी गोस्वामी का नाम आज एक ऐसे युवा चेहरे के रूप में जाना जाता है, जिसने कम उम्र में संगीत के माध्यम से न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि समाज को भी सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि यदि लड़कियां ठान लें तो वे किसी भी क्षेत्र में श्रेष्ठता प्राप्त कर सकती हैं।

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