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तमिलनाडु की मनीषा कृष्णासामी गरीब और बेसहारा लोगों की करती हैं मदद, माता पिता के संघर्ष को देखकर इस काम को करने का लिया फैसला

Sun, 01 Aug 2021 04:29 PM IST
संकल्प सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Sun, 01 Aug 2021 04:29 PM IST
सार

आज हम बात करेंगे तमिलनाडु की मनीषा कृष्णासामी की। उनकी उम्र मात्र 24 साल की है। ये इरोड के नर्सिंग कॉलेज में लेक्चरर हैं। इन्होंने अब तक फुटपाथ पर गुजर बसर करने वाले 340 मानसिक रोगियों, ड्रग एडिक्ट्स, दीनहीन और बेसहारा लोगों की मदद की हैं।

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Manisha Krishnasamy of Tamil Nadu helps poor and destitute people Seeing the struggle of her parents she decided to do this work
मनीषा कृष्णासामी - फोटो : Facebook/Manisha_Krishnasamy

विस्तार

हमारे समाज में ऐसे कई लोग होते हैं, जो अपने नेक काम से गरीब, दीनहीन और जरूरतमंद लोगों को जीने का आसरा देते हैं। असल रूप में देखा जाए तो यही लोग समाज की वह किरण हैं, जिनसे मानवता उद्दीप्त होती है। बेसहारा और दीनहीन लोगों को कोई अपना नहीं होता। वे अक्सर फुटपाथ पर ठोकरे खाते हैं। वहीं हमारे यहां एक कहावत है जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। भगवान अक्सर ऐसे लोगों को भेजता है, जो इन दीनहीन लोगों का सहारा बनते हैं। इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे तमिलनाडु की मनीषा कृष्णासामी की। उनकी उम्र मात्र 24 साल की है। ये इरोड के नर्सिंग कॉलेज में लेक्चरर हैं। इन्होंने अब तक फुटपाथ पर गुजर बसर करने वाले 340 मानसिक रोगियों, ड्रग एडिक्ट्स, दीनहीन और बेसहारा लोगों की मदद की है। मनीषा बचपन से ही काफी गरीब थी। उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। वे आर्मी जॉइन करना चाहती थी। आर्थिक परेशानियों के चलते उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका।  

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मनीषा ने बचपन के दिनों में अपने माता-पिता को कई आर्थिक समस्याओं का सामना करते देखा। इसी चीज ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। मनीषा हमेशा से दूसरों की मदद करना चाहती थी। इसी दिशा में काम करने के लिए उन्होंने नर्सिंग में बीएससी की डिग्री को प्राप्त किया।

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इस कोर्स को खत्म करने के बाद उन्होंने नंदा कॉलेज में नर्सिंग के लेक्चरर के तौर पर काम करना प्रारंभ किया। इस नौकरी से उनकी जो भी कमाई होती थी। उससे वह किसी दीनहीन या जरूरतमंद व्यक्ति को दिन में एक बार खाना जरूर खिलाती थी। हालांकि इससे उनका मकसद पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कुछ और बड़ा सोच रखा था। 

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मनीषा चाहती थी कि वह इन लोगों को तीनों टाइम का खाना खिलाएं। हालांकि ये काम काफी मुश्किल था। इस वजह से उन्होंने एक एनजीओ का हाथ थामा। साल 2018 में उन्होंने खुद के एक एनजीओ की शुरुआत की, जिसका नाम जीविथम फाउंडेशन है। आज मनीषा इस एनजीओ के माध्यम से कई जरूरतमंद लोगों को खाना खिला रही हैं।  इसके अलावा मनीषा ने उन लोगों के लिए फिजिकल एक्सरसाइज और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसे प्रोग्राम का भी बंदोबस्त कर रखा है।  
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