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Lady Lawyers Day: कानूनी पेशे में 'भारी असमानता', प्रैक्टिस करने वाले वकीलों में केवल 15% महिलाएं

Sun, 06 Aug 2023 01:12 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sun, 06 Aug 2023 01:12 PM IST
सार

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने वकीलों के रूप में महिलाओं को आगे लाने के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करने की जरूरत बताई।

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Lady Lawyers Day HC judge laments huge disparity" in legal profession
Lady Lawyers Day - फोटो : SILF

विस्तार

महिलाओं की भागीदारी कई क्षेत्रों में बढ़ी है। इन्हीं में से एक न्यायपालिका है। एक दौर था, जब महिलाओं को वकालत करने का अधिकार नहीं था, तब कॉर्नेलिया सोराबजी नाम की महिला ने लाॅ की पढ़ाई की और पहली वकील बनीं। उनके कई सालों बाद लीला सेठ आजाद भारत में उच्च न्यायालय की पहली महिला चीफ जस्टिस नियुक्त हुईं। वर्तमान में देश की न्यायपालिका के अंतर्गत कई महिला वकील हैं साथ ही कई महिलाएं न्यायाधीश के पद पर आसीन हैं। महिला वकीलों को प्रोत्साहित करने के लिए 5 अगस्त को सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (SILF) और SILF लेडीज ग्रुप (SLG) ने "महिला वकील दिवस (Lady Lawyers Day)" का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कानूनी पेशे में महिलाओं की उपलब्धियों और सशक्तिकरण का उत्सव मनाया था।

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महिला वकील दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने किया। आयोजन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संदेश भेजा और प्रख्यात कानूनविद् फली एस नरीमन की वर्चुअल उपस्थिति रही। साथ ही देशभर से लगभग 500 महिला वकीलों ने कार्यक्रम में भाग लिया। दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने वकीलों के रूप में महिलाओं को आगे लाने के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करने की जरूरत बताई।
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महिला वकीलों के लिए अदालत में कई चुनौती

दरअसल, लाॅ काॅलेजों में महिलाओं की संख्या अधिक है लेकिन कई कारणों से नामांकन कम रहता है। इसके अलावा अदालतों में महिला वकीलों को पर्याप्त सुविधाएं हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संदेश के माध्यम से कानूनी क्षेत्र में महिलाओं के असाधारण योगदान को स्वीकार किया और जीवन के सभी क्षेत्रों से महिलाओं को सशक्त बनाने और समर्थन देने के निरंतर प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।
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"क्या महिलाओं को सशक्तिकरण की आवश्यकता है?"

इस मौके पर "क्या महिलाओं को सशक्तिकरण की आवश्यकता है?" विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस पैनल चर्चा में कानूनी पेशे में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर शानदार चर्चा हुई और वह कैसे आगे बढ़ सकती हैं, इसपर भी चर्चा हुई है।

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