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Tumse Hai Ujala: हरियाणा की सुनीला सिंह ने बुजुर्ग महिलाओं की जिंदगी को दी नई "रोशनी"
Sat, 09 Aug 2025 01:26 PM IST
श्रुति गौड़
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Sat, 09 Aug 2025 01:26 PM IST
सार
सुनीला सिंह बुजुर्गों को उस उम्र में नई ऊर्जा देने का कार्य कर रही हैं, जब अधिकांश लोग सीमित दिनचर्या में बंध जाते हैं। वह बुजुर्गों को नया सीखने, अपनी रुचियों को फिर से खोजने और आत्मनिर्भर बनने का मौका देती हैं, ताकि वे जिंदगी को खुशहाली से जी सकें।
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हरियाणा की सुनीला सिंह ने बुजुर्ग महिलाओं की जिंदगी को दी नई "रोशनी"
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ताकत और ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती जाती है। यह जीवन का स्वाभाविक क्रम है, लेकिन दुर्भाग्यवश समाज में बहुत से लोग बुजुर्गों को बोझ या उपेक्षित मानने लगते हैं। लेकिन हरियाणा के हिसार में रहने वाली सुनीला सिंह ऐसी सोच को चुनौती देती हैं। उन्होंने न सिर्फ बुजुर्गों के दर्द को समझा, बल्कि उनकी सहायता के लिए ठोस कदम भी उठाए हैं।
सुनीला सिंह कहती हैं, “हर महिला के भीतर एक गुप्त ऊर्जा होती है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।” उन्होंने यह ऊर्जा विशेष रूप से कोरोना काल के दौरान बुजुर्ग महिलाओं में देखी, जब तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने भीतर सकारात्मक सोच और समाज के लिए कुछ करने की भावना को जीवित रखा।
इसी सोच को आधार बनाकर सुनीला ने 7 दिसंबर, 2021 को ‘परफेक्ट हेल्थ ओरियाना कुंज’ की शुरुआत की। यह पहल पूरी तरह निशुल्क थी और इसका उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारना नहीं, बल्कि महिलाओं के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर भी ध्यान देना था। सुनीला कहती हैं, “मैंने एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जहां बुजुर्ग महिलाएं आत्मीयता और अपनापन महसूस करें और नियमित रूप से गतिविधियों में हिस्सा लें।”
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ओरियाना कुंज में बुजुर्गों के लिए रोजाना कई रचनात्मक और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इनमें योग, मेडिटेशन, फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर, लॉफिंग थेरेपी, क्लीनिंग एक्सरसाइज, ट्रेनिंग और मोटिवेशनल सेशन्स शामिल हैं। ये सब संगीत के साथ कराया जाता है, जिससे बुजुर्गों को मानसिक और शारीरिक रूप से ऊर्जा मिलती है।
सुनीला बताती हैं, “इस पहल की शुरुआत मैंने केवल तीन महिलाओं के साथ की थी, लेकिन आज इससे लगभग 40 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। उन्होंने महसूस किया कि इन गतिविधियों का प्रभाव धीरे-धीरे दिखने लगा है। कई महिलाओं की शुगर नियंत्रित हुई है, ब्लड प्रेशर सामान्य हुआ है, जोड़ों और साइटिका के दर्द में राहत मिली है और सबसे महत्वपूर्ण बात, वे मानसिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी बन गई हैं।”
71 वर्षीय कृष्णा बोरा, जो ओरियाना कुंज की नियमित सदस्य हैं, कहती हैं, “यहां आकर मैंने सीखा कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। गायन, नृत्य, चित्रकला और कविता जैसे रचनात्मक कार्यों ने मेरी छुपी प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया।” सुनीला खुद एक किराए के मकान में इन गतिविधियों का संचालन करती हैं। वह न केवल स्वास्थ्य गतिविधियां करवाती हैं, बल्कि समूह के साथ मिलकर सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव, जन्मदिन और शादी की सालगिरह आदि भी मनाती हैं, जिससे हर बुजुर्ग को एक परिवार जैसा स्नेह और अपनापन महसूस होता है।
सुनीला इस समय बुजुर्ग महिलाओं को केवल 2 घंटे दे पाती हैं, लेकिन उनका अगला लक्ष्य इस पहल और समय सीमा को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं जुड़ें और अपनी वृद्धावस्था को सुकून, गरिमा एवं आत्मसम्मान के साथ जी सकें।
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सुनीला सिंह कहती हैं, “हर महिला के भीतर एक गुप्त ऊर्जा होती है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।” उन्होंने यह ऊर्जा विशेष रूप से कोरोना काल के दौरान बुजुर्ग महिलाओं में देखी, जब तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने भीतर सकारात्मक सोच और समाज के लिए कुछ करने की भावना को जीवित रखा।
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इसी सोच को आधार बनाकर सुनीला ने 7 दिसंबर, 2021 को ‘परफेक्ट हेल्थ ओरियाना कुंज’ की शुरुआत की। यह पहल पूरी तरह निशुल्क थी और इसका उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारना नहीं, बल्कि महिलाओं के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर भी ध्यान देना था। सुनीला कहती हैं, “मैंने एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जहां बुजुर्ग महिलाएं आत्मीयता और अपनापन महसूस करें और नियमित रूप से गतिविधियों में हिस्सा लें।”
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ओरियाना कुंज में बुजुर्गों के लिए रोजाना कई रचनात्मक और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इनमें योग, मेडिटेशन, फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर, लॉफिंग थेरेपी, क्लीनिंग एक्सरसाइज, ट्रेनिंग और मोटिवेशनल सेशन्स शामिल हैं। ये सब संगीत के साथ कराया जाता है, जिससे बुजुर्गों को मानसिक और शारीरिक रूप से ऊर्जा मिलती है।
सुनीला बताती हैं, “इस पहल की शुरुआत मैंने केवल तीन महिलाओं के साथ की थी, लेकिन आज इससे लगभग 40 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। उन्होंने महसूस किया कि इन गतिविधियों का प्रभाव धीरे-धीरे दिखने लगा है। कई महिलाओं की शुगर नियंत्रित हुई है, ब्लड प्रेशर सामान्य हुआ है, जोड़ों और साइटिका के दर्द में राहत मिली है और सबसे महत्वपूर्ण बात, वे मानसिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी बन गई हैं।”
71 वर्षीय कृष्णा बोरा, जो ओरियाना कुंज की नियमित सदस्य हैं, कहती हैं, “यहां आकर मैंने सीखा कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। गायन, नृत्य, चित्रकला और कविता जैसे रचनात्मक कार्यों ने मेरी छुपी प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया।” सुनीला खुद एक किराए के मकान में इन गतिविधियों का संचालन करती हैं। वह न केवल स्वास्थ्य गतिविधियां करवाती हैं, बल्कि समूह के साथ मिलकर सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव, जन्मदिन और शादी की सालगिरह आदि भी मनाती हैं, जिससे हर बुजुर्ग को एक परिवार जैसा स्नेह और अपनापन महसूस होता है।
सुनीला इस समय बुजुर्ग महिलाओं को केवल 2 घंटे दे पाती हैं, लेकिन उनका अगला लक्ष्य इस पहल और समय सीमा को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं जुड़ें और अपनी वृद्धावस्था को सुकून, गरिमा एवं आत्मसम्मान के साथ जी सकें।

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