संजुक्ता पराशर कैसे बनी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, इस लेडी सिंघम से थर्राते हैं उग्रवादी
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6 देशों के 40 पुलिस अफसरों को आईएसीपी (IACP) अवॉर्ड दिया जाना है, जिसमें भारत के भी दो आईपीएस अधिकारियों का नाम शामिल है। देश के लिए ये बड़ी उपलब्धि है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में दबंग पुरुष पुलिस अफसरों के अलावा लेडी सिंघम का भी दबदबा है। ये महिला आईपीएस अधिकारी इतनी तेज तर्रार है, कि मात्र 15 महीनों में 16 एनकाउंटर करके न केवल साथी पुलिस कर्मियों के लिए एक रिकार्ड सेट कर दिया बल्कि खूंखार बदमाशों और उग्रवादियों के मन में खौफ भी पैदा कर दिया। हम बात कर रहे हैं आईपीएस अफसर संजुक्ता पराशर के बारे में।
कौन हैं संजुक्ता पराशर
संजुक्ता पराशर साल 2006 बैच की आईपीएस अफसर हैं। संजुक्ता का जन्म असम में 3 अक्टूबर 1979 में हुआ था। संजुक्ता ने राजनीति विज्ञान से दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से ग्रेजुएट किया है। इसके बाद जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में परास्नातक किया। साथ ही यूएस फॉरेन पॉलिसी में एमफिल और पीएचडी किया।
संजुक्ता पराशर का परिवार
पराशर के पति का नाम संदीप कक्कड़ है। उनका एक बेटा भी है, जिसकी देखरेख संजुक्ता की मां करती हैं। वैसे संजुक्ता की मां पेशे से डॉक्टर हैं। उनके पिता एक इंजीनियर हैं। इसके अलावा संजुक्ता पराशर का एक छोटा भाई भी है।
संजुक्ता पराशर की आईपीएस बनने की कहानी
आईपीएस संजुक्ता ने 2006 में सिविल सर्विसेज में 85 वीं रैंक हासिल की थी। जिसके बाद मेघालय-असम कैडर को चुना। साल 2008 में संजुक्ता पराशर की पहली पोस्टिंग माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर हुई। बाद में उन्हें उदालगुरी में बोडो और बांग्लादेशियों के बीच हुई हिंसा को काबू करने के लिए भेज दिया गया। वर्तमान में आईपीएस संजुक्ता पराशर असम के सोनितपुर जिले में बतौर एसपी तैनात हैं।
संजुक्ता पराशर को आयरन लेडी ऑफ असम क्यों कहा जाता है
संजुक्ता पराशर पुलिस विभाग की लेडी सिंघम हैं। असम के लोग उन्हें आयरन लेडी ऑफ असम कहते हैं। इसकी कई वजह हैं। आईपीएस संजुक्ता ने बोडो उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में प्रमुख भूमिका निभाई थी। साल 2015 में असम के जोरहाट जिले में बतौर एसपी आईपीएस संजुक्ता ने लगातार अभियान चलाया। इस दौरान उन्होनें असम के जंगलों में एके-47 लिए सीआरपीएफ के जवानों और कमांडो को लीड किया।
पिछले साल अप्रैल में उनकी टीम ने सेना पर हमला करने वाले उग्रवादियों को दबोचा था। उन्होंने 15 महीनों में 16 एनकाउंटर किए थे। असम में ऐसी जगहें, जहां ऑपरेशन चलाना मुश्किल था, वहां तक संजुक्ता अपनी टीम के साथ पहुंच गईं और उग्रवादियों पर हमला कर दिया। उनके नेतृत्व में 16 उग्रवादियों को मार गिराया गया और 64 नक्सलियों को गिरफ्तार कर किया गया।

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