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कलियारपट्टू में पांच बार की चैंपियन रह चुकी हैं केरल की मुस्लिम युवती, हिजाब पहन करती हैं प्रतिद्वंदियों को चित्त

Sun, 30 May 2021 11:48 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sun, 30 May 2021 11:48 AM IST
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kerala muslim girl conquered in kalaripayattu with hijab around her head
आरिफा - फोटो : सोशल मीडिया

देसी मार्शल आर्ट के रूप में प्रसिद्ध कलियारपट्टू जिसकी उत्पत्ति केरल में हुई है। इसे पुरुषों का खेल माना जाता है। लेकिन इस कला के ट्रेनर हमजाथाली गुरुक्कुल ने इस खेल में बड़ा परिवर्तन करते हुए अपनी पोती को इस खेल में उतारा। पांच साल की पोती अरीफा कोडियैल को उन्होंने कलियारपट्टू में ट्रेंड करने का फैसला किया। लेकिन उनके इस फैसले पर मालापुरम के लोगों को आपत्ति थी। एक मुस्लिम समुदाय की लड़की को कलारी सिखाने पर सबकी भौंहे तन गई। लेकिन दादा ने हार नहीं मानी। 

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अब 26 साल की हो चुकी आरिफा हिजाब पहन कर अपने प्रतिद्वंदियों को हराती हैं। अरीफा बताती हैं कि बचपन से ही उसने परिवार के मर्दों को कलियारपट्टू की प्रैक्टिस करते देखा है। पांच साल की उम्र में मेरी रुचि इस क्षेत्र में देखकर मेरे दादा ने मुझे सिखाने का फैसला किया। 

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आरिफा पांच बार की नेशनल चैंपियन हैं। वहीं मालापुरम की वो पहली लड़की है जो कलियारपट्टू में मास्टर है। यहां तक कि उनके साथ प्रैक्टिस करने के लिए भी कोई लड़की नही होती थी। ऐसे में भाई आसिफ के साथ प्रैक्टिस करती थी। वहीं बीते दिनों में वो अकेली मुस्लिम लड़की होती थी।
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आरिफा का मानना है कि महिलाओं के लिए मार्शल आर्ट सीखना जरूरी है। आरिफा कहती हैं, "केवल महिलाओं के बैच में, मेरे पिता, बहन अंशीफा और मेरे द्वारा गुरुकुलम में लगभग 50 लड़कियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।" आरिफा का दावा है कि यदि आप सही चाल जानते हैं, तो एक महिला किसी भी चीज का उपयोग कर सकती है - बैग, छाता, कलम या पर्स - अपनी रक्षा के लिए। आरिफा कहती हैं, ''दृष्टि' में प्रशिक्षण लेने के बाद एक महिला हमलावर या पूर्व संध्या पर छेड़खानी करने वाले को केवल तीखी नजर से डराने में सक्षम हो जाएगी।

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