मनरेगा में काम करने वाले मजदूर की बेटी ने बनाया था कीर्तिमान, अब संभाल रहीं सहायक कलेक्टर का पद
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केरल की पहली महिला दलित आईएएस अधिकारी श्रीधन्या सुरेश ने कोझिकोड जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त की गईं। 2019 बैच की आईएएस ऑफिसर श्रीधन्या सुरेश सुर्खियों में आ गईं थीं क्योंकि वो केरल की पहली महिला आईएएस अधिकारी थीं। अब वो सिविल सर्विसेज की ट्रेनिंग लेने के बाद जिलाधिकारी एस सांबासिवा राव के अंडर में काम करेंगी। सबसे खास बात है कि कोझिकोड के जिलाधिकारी उनके रोल मॉडल हैं और इन्हीं की प्रेरणा से श्रीधन्या ने सिविल सर्विसेज की तैयारी की थी।
हालांकि श्रीधन्या इससे पहले प्रोजेक्ट असिस्टेंट के तौर पर वायनाड में बतौर अनुसूचित जाति विकास अधिकारी काम करती थीं। अपनी सिविल सर्विसेज की तैयारी को याद करते हुए श्रीधन्या ने बताया कि 2016 में जब मैं इस पद पर काम करती थी तो एस सांबांसिव राव वायनाड में उपजिलाधिकारी के पद पर कार्यरत थे और उन्होने ने ही मुझे इसकी प्रेरणा दी थी। श्रीधन्या केरल के अनुसूचित जाति की पहली महिला हैं जिन्होनें यूपीएससी सिविल सर्विसेज एक्जाम को पास किया है। मिस सुरेश का मकसद अनुसूचित जाति के बच्चों की शिक्षा में सुधार करना है।
श्रीधन्या के माता-पिता मजदूर हैं और कुरिछिया ट्राइबल कॉलोनी में रहते हैं। जो वायनाड जिले में आता है। जुलोजी से पोस्ट ग्रेजुएट श्रीधन्या ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की है। वहीं उनके माता-पिता मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी करते हैं। हालांकि उन्होने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दी है। श्रीधन्या की बड़ी बहन सरकारी नौकरी करती हैं और भाई पॉलीटेक्निक का छात्र है।

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