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Kargil War Female Pilot Warrior: मिलिए कारगिल युद्ध की महिला चीता पायलट से, ऐसी है साहस की कहानी

Tue, 26 Jul 2022 02:30 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 26 Jul 2022 02:30 PM IST
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Kargil War Female Pilot Warrior Gunjan Saxena and Srividya Rajan Inspirational Real Story in Hindi
गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन के अदम्य साहस की कहानी। - फोटो : self

Kargil War Female Pilot Warrior: आज हर भारतीय देश के जांबाज शहीदों को याद कर रहा है। कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों के कब्जे से कारगिल की पहाड़ियों को आजाद कराते हुए जंग में जीत की घोषणा कर दी। इस दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गए। विक्रम बत्रा की शहादत को हर कोई याद करता है लेकिन क्या आपको पता है कि कारगिल युद्ध में भारतीय सेना में कुछ दमदार महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने अपने साहस से इस जंग को जीत में बदलने में मदद की। उनकी भूमिका कारगिल युद्ध में बहुत अहम है। कारगिल युद्ध की दमदार महिला योद्धाओं में दो नाम शामिल हैं, एक फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना और दूसरी श्रीविद्या राजन। फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन ने न केवल कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन की मिसाइलों का मुकाबला किया, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों के लिए हेलीकॉप्टर से रसद भी पहुंचाई। घायल सैनिकों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने का काम किया। चलिए जानते हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना और दूसरी श्रीविद्या राजन के अदम्य साहस की कहानी।

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वायुसेना की महिला पायलटों की भूमिका 


कारगिल युद्ध से पहले वायुसेना में महिलाओं को फुल कमीशन नहीं दिया जाता था। उस दौर में महिलाएं शाॅर्ट सर्विस कमीशन के जरिए 7 साल ही देश की सेवा कर सकती थीं। उन दिनों गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन उन 25 ट्रेनी पायलटों में से थीं, जो 1994 में भारतीय वायुसेना के पहले बैच में शामिल हुई थीं।
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कारगिल युद्ध में उतरीं गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन

सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना और फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रीविद्या राजन को देश के लिए कुछ कर दिखाने का मौका मिला 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान। इसके पहले तक उन्होंने कभी फाइटर जेट उड़ाया तक नहीं था। लेकिन जब युद्ध हुआ तो सेना को पायलट की जरूरत पड़ी। गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन मौके की तलाश में थीं, और यही उनके लिए मौका था। दोनों घायल सैनिकों को लाने, राशन की सप्लाई करने का काम करती थीं।
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पाकिस्तानी मिसाइलों का मुकाबला करते हुए मिशन किया पूरा

सबसे अहम युद्ध क्षेत्र में पाकिस्तानी पोजीशन पर निगाह रखने की जिम्मेदारी भी इन दो महिला पायलटों को सौंपी गई। दोनों ऐसे इलाके में उड़ान भरती थीं, जहां से वह पाकिस्तानी सेना की मिसाइलों के जद में आ सकती थीं। हालांकि वह डरी नहीं और इस मिशन के लिए छोटे चीता हेलीकॉप्टर से पहली बार युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरी। न तो उनके पास आत्म रक्षा के लिए कुछ था और न बड़े मिसाइलों के सामने भिड़ने के लिए छोटे चीता हेलिकॉप्टर क्षमतावान थे। लेकिन जान की परवाह किए बिना दोनों ने उड़ान भरी और अपने मिशन को अंजाम दिया।

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