Jhalkari Bai Jayanti: कौन थीं झलकारी बाई, जयंती के मौके पर जानें आजादी की जंग में उनका योगदान
आज स्वतंत्रता संग्राम की इस महिला आंदोलनकारी झलकारी बाई की जयंती है। आइए जानते हैं झलकारी बाई के जीवन से जुड़ी अहम बातें।
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Jhalkari Bai Jayanti 2023 : गुलाम भारत में अंग्रेजों की प्रताड़ना का सामना कई भारतीयों को करना पड़ा। भारतीयों ने आजादी की लड़ाई के लिए स्वतंत्रता संग्राम का आगाज 1857 की क्रांति किया। 1857 की क्रांति इतिहास के पन्नों में मुख्य रूप से शामिल है।
इस क्रांति में मंगल पांडे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम प्रमुख हैं। आंदोलन की लड़ाई में झांसी की रानी की अकेली महिला नहीं थीं, उनका साथ देने के लिए एक महिला और थीं, जिनका नाम झलकारीबाई था। झलकारी बाई न तो रानी थीं और न ही झांसी की सत्ता उनके हाथ में थी। लेकिन मातृभूमि की रक्षा के लिए झलकारी बाई ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। आज स्वतंत्रता संग्राम की इस महिला आंदोलनकारी झलकारी बाई की जयंती है। आइए जानते हैं झलकारी बाई के जीवन से जुड़ी अहम बातें।
झलकारी बाई का बचपन
इतिहासकार बताते हैं कि झलकारी बाई झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के किले के पास रहती थीं। किले के दक्षिण में उन्नाव गेट था, जहां भोजला गांव स्थित था। इस गांव में झलकारी बाई के घराने के लोग आज भी रहते हैं। बचपन से ही साहसी झलकारी बाई ने मां के निधन के बाद पिता से घुड़सवारी और हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया।
साहसी झलकारी बाई
एक बार बचपन में झलकारी बाई पर एक तेंदुए ने हमला कर दिया था। बिना डरे कुल्हाड़ी से तेंदुए को मारकर झलकारी बाई ने अपना साहस दिखाया था। कहते हैं एक बार कुछ डकैतों ने गांव के व्यापारी के घर पर हमला कर दिया था, तब भी झलकारी बाई ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया और गांव से खदेड़ दिया।
झलकारी बाई की शादी
झांसी की सेना में तैनात एक सैनिक पूरन कोरी से झलकारी बाई का विवाह हुआ था। शादी के बाद रानी लक्ष्मी बाई से एक पूजा के दौरान झलकारी बाई की मुलाकात हुई। झलकारी बाई को देख कर रानी लक्ष्मीबाई हैरान रह गईं, क्योंकि वह बिल्कुल लक्ष्मीबाई जैसी दिखती थीं। लक्ष्मीबाई ने झलकारी बाई को झांसी की सेना में शामिल कर लिया। झलकारी बाई ने बंदूक चलाना, तलवार और तोप चलाना सीखा।
अंग्रेजों ने जब झांसी के किले पर हमला किया तो सेनापतियों ने रानी लक्ष्मीबाई को किले से निकल जाने की सलाह दी। युद्ध में झलकारी बाई के पति भी शहीद हो चुके थे। झलकारी बाई ने अंग्रेजों को चकमा देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई के कपड़े पहनें और सेना की कमान संभाल ली। अंग्रेजों को पता तक नहीं चला कि वह रानी लक्ष्मीबाई नहीं, बल्कि झलकारी बाई हैं।

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