{"_id":"604233268ebc3e5902116351","slug":"international-women-s-day-2021-madhuri-kanitkar-lieutenant-general","type":"story","status":"publish","title_hn":"International Women's Day 2021: लेफ्टनेंट जनरल माधुरी कानिटकर ने कभी नहीं छोड़ी हिम्मत, कडे़ संघर्ष के बाद मिली सफलता","category":{"title":"Shakti","title_hn":"शक्ति","slug":"shakti"}}
International Women's Day 2021: लेफ्टनेंट जनरल माधुरी कानिटकर ने कभी नहीं छोड़ी हिम्मत, कडे़ संघर्ष के बाद मिली सफलता
Sat, 06 Mar 2021 09:14 AM IST
योगेश जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Sat, 06 Mar 2021 09:14 AM IST
विज्ञापन
मेजर जनरल डॉ. माधुरी कानिटकर
- फोटो : ANI
माधुरी कानिटकर भारतीय सशस्त्रबलों में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पहुंचने वाली तीसरी महिला और पहली बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उनका सफर काफी प्रेरणादायर रहा है। माधुरी का कहना है कि अगर महिलाएं फौज में आएंगी तो परिवार का साथ भी जरूर मिलेगा, क्योंकि फौज में सिर्फ परिवार नहीं होता है, पूरी फौज ही एक परिवार होता है।
विज्ञापन
माधुरी कहती हैं कि कई बार ऐसा हुआ कि उनके बच्चों की देखभाल उनके सहयोगियों ने की। माधुरी अपने पिता की मृत्यु के समय भी मौजूद नहीं थी। उनके साथी ही उस वक्त उनके पिता के साथ थे। माधुरी का हौसला कई बार कमजोर हुआ लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। माधुरी का कहना है कि जब उनके बच्चे छोटे थे तो उन्हें लगता था कि घर से बाहर न जाऊं। उस समय उनका साथ माता- पिता और पति ने दिया। माधुरी का अपने साथियों का भी पूरा साथ मिला।
विज्ञापन
माधुरी का मानना है कि सीनियर्स की डांट और उनसे सीखना हर जूनियर की प्रोफेशनल जिंदगी में अहम भूमिका निभाता है। माधुरी का कहना है कि सीनियर के हौसले और उनकी डांट ने उन्हें आज यहां तक पहुंचा दिया है।"
विज्ञापन

कमेंट
कमेंट X