फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Shakti ›   international women day 2022 women should take financial decisions and stand on own feet

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022: वित्तीय मामलों में जरूरत है सोच बदलने की, जिससे महिलाएं ले सकें बड़े आर्थिक निर्णय

Tue, 08 Mar 2022 01:09 PM IST
स्वाति शैवाल अपर्णा तिवारी
अपर्णा तिवारी Published by: स्वाति शैवाल Updated Tue, 08 Mar 2022 01:09 PM IST
सार

किसी भी मध्यम वर्गीय परिवार के खर्चों को सुचारू रूप से चलाने में एक महिला का हाथ होता है। छोटी-छोटी रकम जमाकर वो घर के बडे सामान भी खरीदती है। तो फिर आखिर क्यों नौकरी में महिलाओं को फाइनेंस की जिम्मेदारी देने में हिचक।

विज्ञापन
international women day 2022 women should take financial decisions and stand on own feet
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022 - फोटो : Istock

विस्तार

विज्ञापन

बचपन से अपने घर में, रिश्तेदारों के यहां और आस पड़ोस में मैंने घर की महिलाओं को खर्चों को मैनेज करते देखा है।  एक रुपया, दस रुपये जमा कर कर के उन्हें घर के लिए बड़ी चीजें खरीदते भी देखा है। आमतौर पर हम भारतीय मिडिल क्लास घरों में महिलाओं द्वारा की गई यही बचत समय पड़ने पर बहुत काम की साबित होती है। इसी तरह घर खर्च चलाने से लेकर बाजार से खरीदारी करने तक बहुत सावधानी से, किफायत के साथ और सटीक तरीके से महिलाएं फाइनेंस के मैनेजमेंट का काम करती हैं। इसके बावजूद जब नौकरी में फाइनेंस विभाग सम्भालने की बारी आती है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।  

international women day 2022 women should take financial decisions and stand on own feet
स्वाती शैवाल - फोटो : अमर उजाला

आज के दौर में जब महिलाएं सारे काम बखूबी कर रही हैं। यह अंतर अखरता है। और अब जब हमारी वित्त मंत्री ही महिला हैं जो पूरे देश का फाइनेंस सम्भाल रही हैं। तब महिलाओं की इस स्थिति के बारे में सोचने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। मैंने अक्सर यह अनुभव किया है कि महिलाओं को कैशियर, फाइनेंस या इसी तरह की भूमिकाएं देने के पहले यह हिचक होती है कि महिलाएं ये रिस्क वाला काम कर पाएंगी है नहीं?

वाकई काम आसान नहीं होता। जरा सा आंकड़ों का हेर फेर मुश्किल खड़ी कर देता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि महिलाएं इसे नही कर सकतीं। दिक्कत यह है कि खुद महिलाएं भी ये रिस्क लेने से हिचकती हैं। क्योंकि ज्यादातर मामलों में बचपन से उनकी परवरिश इस तरह की होती है कि वे सोचती हैं हमसे कोई गड़बड़ हो गई तो?

ये सोच ठीक ऐसी ही है जैसी किसी कीमती सामान के टूटने को लेकर होती है और यही होता है महिलाओं के आगे बढ़ने की राह का सबसे बड़ा रोड़ा। जब किसी काम को करने से पहले आपके मन मे ये शंका हो कि ये खराब हो गया तो क्या होगा? तो आगे बढ़ने में दिक्कत तो आएगी ही।
 

यहां यह सोचना जरूरी है कि लड़के जन्म से तो चीजें सीख कर नहीं आते। पढ़ाई भी उनके लिए कोई अलग नहीं होती। लेकिन रिस्क उठाने की उनकी आदत उन्हें आगे बढ़ा देती है। तो अगर एक तरफ लोगों को ये सोच बदलकर महिलाओं को भी वित्त से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी सौंपनी होगी, वहीं महिलाओं को भी अपने आत्मविश्वास को बढ़ाकर रिस्क उठाना सीखना होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

international women day 2022 women should take financial decisions and stand on own feet
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022 - फोटो : social media

जब मैंने एमबीए फाइनेंस से करने का निर्णय लिया तो घर के लोगों ने बढ़ावा ही दिया लेकिन कुछ लोगों ने ऐसी सलाह भी दी। "अरे एचआर में कर लो, लड़कियों के हिसाब से सबसे अच्छा डिपार्टमेंट होता है" या फिर "डिग्री ही तो लेनी है कॉरेस्पोंडेंस से कर लो!" जब कॉलेज पहुंची तो पाया यहां भी सोच में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। इसलिए ढेर सारे लड़कों के बीच फाइनेंस पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या मुट्ठीभर भी नहीं थी। आज मुझे इसी क्षेत्र में काम करते हुए 17 साल से ज्यादा वक्त हो गया है। हालांकि अब भी लड़कियों की संख्या तो ज्यादा नही है लेकिन एक बड़ा परिवर्तन मैंने जरूर देखा है। वो है लड़कियों और महिलाओं की  फाइनेंस संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता में इजाफा। 
 

आज बड़ी संख्या में न केवल नौकरीपेशा लड़कियां हमारे पास घर और गाड़ी के लिए अकेले लोन लेने आती हैं बल्कि वे पूरी रिसर्च करके आती हैं। उन्हें पूरी जानकारी होती है कि किस लोन को कैसे लेने से फायदा होगा। सबसे खास बात यह कि ज्यादातर मामलों में लड़कियां वक्त पर ईएमआई देती है, फटाफट लोन चुकता कर देती हैं और उनके सारे डॉक्युमेंट्स हमेशा कंप्लीट होते हैं। इतना ही नहीं म्यूचल फंड्स से लेकर निवेश के अन्य साधनों तक की उनको अच्छी जानकारी होती है। यह परिवर्तन अच्छा लगता है। 


एक बात यह भी है कि विवाह के बाद परिवार की जिम्मेदारी को लेकर भी लोगों की सोच होती है कि महिलाएं अब जिम्मेदारी ठीक से नही संभाल पाएंगी और उनको या तो कम जिम्मेदारी वाले काम सौंप दिए जाते हैं या फिर वे नौकरी ही छोड़ देती हैं। वहीं हमारे यहां अब भी लड़कियों को इस सोच के साथ बड़ा किया जाता है कि उनकी डिग्री उनके वैवाहिक बायोडाटा में वजन डालने के लिए है। इसलिए लड़कियां खुद भी शादी के बाद जॉब छोड़ देती हैं। यही कारण है कि ऊंचे पदों तक कम लड़कियां पहुंच पाती है। परिवार अगर जिम्मेदारियां साझा करता है तो आसानी से सब मैनेज हो सकता है और लड़कियां भी पूरी तरह फोकस होकर करियर बना सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed