अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला का वेबिनार: महिलाएं "द ग्लास सिलिंग" मिथ को तोड़ सकती हैं- परवीन मल्होत्रा
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च के अवसर पर अमर उजाला की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन आयोजन में शीर्ष करियर और शिक्षा सलाहकार परवीन मल्होत्रा भी शामिल हुईं।
परवीन मल्होत्रा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंचे पद पर आने वाली महिलाओं की बाधाओं और चुनौतियों को लेकर बात की।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च के अवसर पर अमर उजाला की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन आयोजन में शीर्ष करियर और शिक्षा सलाहकार परवीन मल्होत्रा भी शामिल हुईं।
परवीन मल्होत्रा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंचे पद पर आने वाली महिलाओं की बाधाओं और चुनौतियों को लेकर बात की।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च के अवसर पर अमर उजाला की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का विषय महिलाओं के करियर और प्रोफेशनल लाइफ पर केंद्रित रहा। इस ऑनलाइन आयोजन में शीर्ष करियर और शिक्षा सलाहकार परवीन मल्होत्रा भी शामिल हुईं। परवीन मल्होत्रा ने महिलाओं के करियर और पेशवर जीवन की चुनौतियों को लेकर सलाह दी और अपने विचार रखे।
परवीन मल्होत्रा ने महिलाओं और मैनेजमेंट व कॉर्पोरेट वर्ल्ड की दुनिया में महिलाओं को लेकर इस्तेमाल किए जाने वाले 'ग्लास सिलिंग' के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि कैसे चालीस साल पहले एक लेडी ने इस शब्द को इस्तेमाल किया था और आगे चलकर यह वर्क प्लेस से लेकर सोसाइटी में ग्लास सीलिंग शब्द प्रयुक्त होने लगा।
बता दें कि कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं को ऊंचे पद तक पहुंचने की एक अनदेखी बाधा को ही ग्लास सीलिंग कहते हैं।
परवीन ने "ब्रेकिंग द ग्लास सिलिंग" के मायने बताते हुए कहा-
महिलाएं "द ग्लास सिलिंग" मिथ को तोड़ सकती हैं। शीशे के इस अनदेखी दीवार को तोड़ने के साथ ही एक महिला अपने सारे दायित्वों का निर्वहन बखूबी कर सकती है। ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग ऐसी कहावत है जो कई सालों से चली आ रही है।
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परवीन मल्होत्रा ने इस बारे में बातचीत में बताया-
किसी महिला को मिडिल स्तर तक आगे बढ़ाने में हर किसी का सहयोग मिलता है। लेकिन जैसे ही वो महिला ऊंचे स्तर पर सीईओ जैसे बड़े पद पर पहुंचने की कोशिश करती है तो कॉर्पोरेट सेक्टर से लेकर सरकार और पंचायत में भी उसके लिए बाधा खड़ी कर दी जाती है।
परवीन मल्होत्रा ने बताया कि पेशेवर दुनिया में एक महिला कई तरह की चुनौतियों से जूझती हैं। भारत जैसे देश में और खासतौर पर समाज में, जहां एक लड़की के लिए नौकरी कर अपने पैरों पर खड़े रहना आज भी एक सपने से कम नहीं वहां लड़कियों/ महिलाओं के पैरों में ऐसी ही बहुत सारी अनदेखी बेड़ियां है, जिससे महिलाएं जूझ रही हैं।
परवीन मल्होत्रा ने इन बेड़ियों को सामान्य महिलाओं के जीवन से भी जोड़कर दिखाया। उन्होंने कहा कि कैसे किसी घर में रसोई और बच्चे तक ही महिलाओं को सीमित रखा जाता है। लेकिन जैसे ही किसी आर्थिक निर्णय की बात आती है तो महिलाओं को पीछे छोड़ दिया जाता है।
परवीन कहती हैं-
दरअसल, हमारे समाज की यहीं वो बाधाएं हैं जो सबसे ज्यादा महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकती हैं और सही मायने में इसे ही ग्लास सीलिंग के तौर पर यानी की जीवन में आगे बढ़ने की बाधाओं के रूप में देखा जा सकता है।
परवीन ने समाज के ढांचे और सोचने के तरीके को महिलाओं की प्रगति की सबसे बड़ी बाधा मानते हुए कहा-
लड़कियों की शिक्षा, उनकी नौकरी और आगे चलकर समाज और व्यवस्था के नियमों में भागीदार नहीं बन पाने के पीछे पुरुष प्रधान समाज है। कॉर्पोरेट सेक्टर में भी महिलाओं के ऊंचे पद पर पहुंचने के लिए उन्हें रोका जाता है।
बातचीत के दौरान ही शिक्षा सलाहकार परवीन मल्होत्रा ने ग्लास सीलिंग के साथ ही एक और शब्द को परिभाषित किया। वो है ग्लास क्लिफ।
ग्लास क्लिफ शब्द का अर्थ समझाते हुए परवीन ने कहा-
जब किसी कॉर्पोरट ऑफिस में ऊंचे पद पर बैठी महिला को जरा सा कंपनी का नुकसान होने या फिर लॉस होने पर कहा जाता है कि हमने आपको मौका दिया और आप उसे निभा नहीं पाईं।
हालांकि उन्होंने केवल पुरुषों को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी इस बारे में जिम्मेदार बताया। परवीन ने बताया कि कैसे महिलाएं आगे ना बढ़कर अपनी हर नाकामी का जिम्मेदार पुरुषों को देती हैं। और अपने डर से आगे नहीं बढ़तीं। इसे स्टिकी फ्लो कहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के करियर में और भी बहुत सारी दैनिक जीवन में आऩे वाली बाधाओं के बारे में भी बात की। खासतौर पर उनकी सुरक्षा को लेकर।
परवीन ने कहा कि नौकरियों पर संस्थानों में, ऑफिस पहुंचने व देर रात को सुरक्षित घर पहुंचना भी महिलाओं व लड़कियों के लिए आसान नहीं है। परवीन ने कहा कि घर-परिवार व ऑफिस के बीच संतुलन बनाना भी महिला को करियर में आगे बढ़ने से रोकता है।
बता दें कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च 2022 मंगलवार को मनाया जाएगा। इस वर्ष महिला दिवस की थीम 'जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो' यानी "एक स्थायी कल के लिए लैंगिक समानता रखी गई है"।
देखें वेबिनार यहां

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