महिला दिवसः हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज का अलम चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पापा ने दूसरी शादी की तो लगा सब खत्म हो गया...पर मां ने हिम्मत नहीं हारने दी: इरम शमीम
बचपन में आईएएस अधिकारी बनने के सपने देखती थी, 9वीं की परीक्षा पास करने के बाद विज्ञान में रुचि बढ़ी और डॉक्टर बनने का निर्णय लिया। पिता पुलिस सेवा में थे। लेकिन अचानक उन्होंने दूसरी शादी कर ली। यह मेरे और मेरी मां शमीम अख्तर व भाई के लिए सदमे जैसा था।
हालात ऐसे बिगड़े कि लगा अब सारे सपने टूट जाएंगे। इसकी वजह से मुझे मानसिक रूप से बहुत परेशानी हुई। लेकिन मां ने मेरी मनोदशा को समझा। मेरा हौसला बढ़ाया। इसी वजह से मैं दोगुने उत्साह से अपने सपने पूरे करने यानी डॉक्टर बनने में जुट गई। यही वजह थी कि एम्स की प्रवेश परीक्षा पास कर सकी।’
परिवार-समाज कितना मजबूत, उसकी बेटियों को देखकर समझिए
‘मैंने अपने आसपास ऐसे परिवार देखे हैं जहां लड़कियों की पढ़ाई महज लड़की होने की वजह से बंद करवा दी जाती है। उनके जीवन का उद्देश्य बस शादी करना रह जाता है। किसी के जीवन का केवल यही उद्देश्य नहीं होना चाहिए। मेरा मानना है कि कोई परिवार या समाज कितना मजबूत है, यह उनकी बेटियों को देखकर समझा जा सकता है।’
इसलिए खास...
राजौरी की रहने वाली इरम शमीम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) देवघर, झारखंड से एमबीबीएस कर रही हैं। डॉक्टरी पढ़ने वाली वह अपने क्षेत्र के गुर्जर समुदाय की पहली लड़की हैं। इरम का लक्ष्य चिकित्सा की पढ़ाई के बाद आईएएस अफसर बनना है। इरम मानती हैं कि ऐसा करके वह अपने देश, राज्य, परिवार और समुदाय का नाम बढ़ा सकेंगी।
संदेश : अपने लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करना ही जीवन का उद्देश्य बनाएं।
जब अपने सरकारी स्कूल पर गर्व हो...
मनु गुलाटी
शिक्षिका
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ने दिल्ली के उसी सरकारी स्कूल का दौरा किया, जहां वह पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पिता सोमनाथ वाधवा और मां नीलम वाधवा भी शिक्षक थे, उन्होंने मुझे समाज में समानता को बढ़ावा देना सिखाया।
मुझे बच्चों को पढ़ाना पसंद था, ऐसे में शिक्षिका के तौर पर अपना कॅरिअर बनाया। हर बच्चे को अपने स्कूल पर गर्व होना चाहिए, मेरी कोशिश है कि अपने सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों में भी गर्व की अनुभूति हो। इसका एक ही तरीका है, उन्हें अच्छी पढ़ाई मिले।
खासतौर से मेरा विषय अंग्रेजी उनके लिए अहम है क्योंकि इसे स्टेटस सिंबल माना जाता है। यह धारणा है कि सरकारी स्कूल के बच्चों की अंग्रेजी अच्छी नहीं होती। मैंने उन्हें संगीत, नृत्य और अभिनय जैसी गतिविधियों में शामिल किया और इन्हीं के जरिए अंग्रेजी सिखाई। यह केवल एक भाषा के तौर पर सिखाया जाए तो बच्चे जल्दी सीखते हैं, बजाय एक विषय के रूप में पढ़ाने के।
इसलिए खास...
दिल्ली के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका मनु गुलाटी को 2019 में मार्था फैरल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं सितंबर में उन्हें नवाचारी ढंग से पढ़ाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार भी मिला। स्कूली बच्चों में लैंगिक समानता का दृष्टिकोण विकसित करने में उनका अहम योगदान है।
''स्वयं को कभी कम न आंकें और किसी भी स्तर पर संकोच की वजह से अपने काम व हक को न छोड़ें।''
सभी ने कहा था साइंस लेना ...तो शायद रिकॉर्ड न बनता
- करिश्मा अरोड़ा: सीबीएसई सीनियर सेकेंडरी में 499/500 स्कोरर
इसलिए खास...
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की करिश्मा ने 2019 सीबीएसई परीक्षा में 500 में 499 अंक हासिल किए। उन्होंने हंसिका शुक्ला के साथ देश के इतिहास में सीबीएसई में 12वीं में सर्वाधिक अंक हासिल करने का रिकॉर्ड बनाया। वह इस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वीमेन से साइकोलॉजी में बीए ऑनर्स कर रही हैं। हालांकि कथक को अपनी पहली पसंद बताती हैं।
डांस थेरेपिस्ट बनने का लक्ष्य...12वीं का परिणाम आने के बाद अपना समय दिव्यांग बच्चों को कथक सिखाने के दौरान उन्हें जीवन के नए मायने समझ में आए। इन बच्चों के बीच कुछ समय काम करने के बाद करिश्मा का कहना है कि उन्होंने डांस थेरेपिस्ट बनने का लक्ष्य बनाया है।
''लड़कियों का लक्ष्य आत्मनिर्भरता होना चाहिए। इसके लिए सपने देखिए और उन्हें पूरा करने का प्रयास कीजिये। आपका जीवन एक कैनवास की तरह है, इसमें खुद ही रंग भरने हैं।''
अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी क्षमता से काम करना है
- हंसिका शुक्ला: सीबीएसई सीनियर सेकेंडरी में 499/500 स्कोरर
इसलिए खास...
गाजियाबाद की रहने वाली हंसिका ने भी 2019 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में ह्यूमैनिटीज में 500 में से 499 अंक हासिल किए। फिलहाल वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी पढ़ रही हैं।
केवल अपनी पूरी क्षमता से काम करना है... विश्व तेजी से बदल रहा है, भारत भी इन बदलावों से दूर नहीं है।
लड़कियों को कमतर मानने वाली सोच की अब समाज में जगह नहीं बची। मुझे लगता है कि जैसी संभावनाएं आज लड़कियों के सामने हर क्षेत्र में खुल रही हैं, उतनी पहले कभी नहीं थी। अपने लक्ष्य पाने के लिए अब उन्हें केवल अपनी पूरी क्षमता से काम करना है। चाहे वह पढ़ाई हो या कॅरिअर, उन्हें कोई नहीं रोक सकता।
''जीवन में जो भी काम करें उसे पूरी लगन के साथ करें। कभी अपने को कम न आंकें और यह न सोचें कि मैं यह काम नहीं कर पाऊंगी। अपने मजबूत इरादों से सब कुछ कर सकती हैं।''

कमेंट
कमेंट X