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Indian Army Lady Captain: भारतीय सेना में शामिल होने के लिए सरिया अब्बासी ने ठुकराई कई नौकरियां, अब हैं कैप्टन

Fri, 16 Dec 2022 04:37 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 16 Dec 2022 04:37 PM IST
सार

सरिया अब्बासी छोटी उम्र में ही भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देख लिया था। देश सेवा और सुरक्षा के लिए देखे गए इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी ठुकरा दी।

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Indian Army Lady Captain Sariya Abbasi Success Story Family Education and Career in hindi
भारतीय सेना की महिला कैप्टन - फोटो : facebook

विस्तार

भारत-चीन सीमा पर तनाव के बाद भारतीय सेना ने अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी। लड़ाकू हेलीकॉप्टर चीता एलएसी पर उड़ान भरने के लिए तैयार है। कई मानवरहित जंगी विमान और एंटी एयरक्राफ्ट गन एल 70 की क्षमता बढ़ा दी गई। सैनिक, हथियार, एयरक्राफ्ट आदि सभी तरह से भारत सीमा पर मुस्तैद है। लेकिन देश की सीमा सुरक्षा में महिलाएं भी पीछे नहीं है। एक महिला सिपाही ने तो देश की सुरक्षा के लिए देश-विदेश की नौकरी को ठुकरा दिया। भारतीय सेना की इस जांबाज महिला सैनिक का नाम है, सरिया अब्बासी। सरिया अब्बासी भारतीय सेना में कैप्टन हैं और अरुणाचल में एलएसी पर एंटी एयरक्राफ्ट गन एल 70 के साथ तैनात हैं। आईए जानते हैं महिला कैप्टन सरिया अब्बासी के बारे में।

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सरिया अब्बासी का जीवन परिचय

भारतीय सेना में पिछले पांच सालों से अपनी सेवाएं दे रहीं सरिया अब्बासी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम डाॅ. तहसीन अब्बासी है, जो ऑल इंडिया रेडियो में डायरेक्टर के पद पर रह चुके हैं। सरिया की मां रेहाना अब्बासी एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल थीं। सरिया का एक  छोटा भाई भी है, जो लंदन में एमबीए की पढ़ाई कर रहा है।
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सरिया अब्बासी की शिक्षा

सरिया अब्बासी छोटी उम्र में ही भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देख लिया था। देश सेवा और सुरक्षा के लिए देखे गए इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी ठुकरा दी। सरिया ने बायोटेक्नोलॉजी से बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी के ऑफर मिले। अच्छे पैकेज पर देश-विदेश की कई नौकरियों के प्रस्ताव सरिया के पास आए लेकिन सरिया के दिल में देश प्रेम की भावना इस कदर हावी थीं कि उन्होंने सेना में भर्ती होने के लिए नौकरी के प्रस्ताव ठुकरा दिए।
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सेना में भर्ती होने की तैयारी

उन्होंने सेना में भर्ती होने के लिए जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी। वह उस दौर में सेना में शामिल हुईं जब भारतीय सेना में महिलाओं के लिए बहुत ही कम सीटें हुआ करती थीं। सीडीएस की परीक्षा के पहले प्रयास में असफल रहने के बाद भी सरिया ने हार नहीं मानी और दोबारा यूपीएससी की सीडीएस परीक्षा में शामिल हुई। उस समय सीडीएस में महिलाओं के लिए सिर्फ 12 सीटें ही थीं, लेकिन सरिया ने महज 12 सीटों में ही अपने लिए जगह बना ली।

कैप्टन बनी सरिया अब्बासी

सरिया को भारतीय सेना में कैप्टन का पद मिला। प्रशिक्षण के लिए सरिया अब्बासी को चेन्नई भेजा गया। कठिन ट्रेनिंग के बाद साल 2017 में सरिया को कमीशन दिया गया। एक सेना अधिकारी के तौर पर सरिया अब्बास ने देश सेवा में खुद के जीवन को समर्पित कर दिया। सरिया अब्बासी भारतीय सेना में अपने पांच साल के करियर में एलएसी और आसपास के इलाकों में तैनात रहीं। इस दौरान उन्होंने ड्रोन किलर की टीम की अगुवाई की।

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