फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Shakti ›   gwalior's reena shakya story how she is educating girls about periods

पहल: कभी पीरियड्स के चलते स्कूल में झेलनी पड़ी थी शर्मिंदगी, अब बच्चियों-महिलाओं को इसी बारे में कर रही हैं जागरूक

Fri, 24 Sep 2021 01:34 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 24 Sep 2021 01:34 PM IST
विज्ञापन
gwalior's reena shakya story how she is educating girls about periods
मासिक धर्म को लेकर जागरूकता की कहानी - फोटो : Pixabay
मासिक धर्म को लेकर अब भी लोगों में रुढ़िवादी सोच चली आ रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में बड़ा सुधार होता नजर आ रहा है। मासिक धर्म को लेकर लोगों को शिक्षित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ग्वालियर की रीना शाक्य इन दिनों लोगों के लिए मिसाल बन रही हैं। कभी खुद स्कूल के दिनों में पीरियड्स को लेकर रीना शर्मिंदगी की शिकार हुई थीं लेकिन अब वह खुद बच्चियों को इस बारे में शिक्षित करके उनमें आत्मविश्वास जगाने का काम कर रही हैं। रीना एक संगठन से भी जुड़ी हैं, जिसके माध्यम से वह महिलाओं को शिक्षित करने के प्रयास करती रहती हैं। रीना कहती हैं, 21वीं सदी में भी पीरियड्स को लेकर लोगों के मन में जो सोच है उसे बदलने की आवश्यकता है, मैं अपने संगठन के साथ उसी दिशा में काम कर रही हूं।
विज्ञापन


स्कूल में झेलनी पड़ी थी शर्मिंदगी
रीना शाक्य कहती हैं, युवावस्था में मुझे मासिक धर्म को लेकर अक्सर शर्मसार होना पड़ता था। पहली बार जब मुझे पीरियड्स आया, उस समय मैं स्कूल में ही थी। उस दिन सब मुझे घूरकर देख रहे थे। मैंने देखा कि मेरी फ्रॉक पर खून के दाग लगे थे, इससे मैं बहुत डर गई। चूंकि इस बारे में कभी सुना ही नहीं था, ऐसे में डर था कि कहीं मुझे कोई गंभीर रोग तो नहीं हो गया है? मां से जब यह बात बताई तो उन्होंने भी चुपचाप रहने को कहा। पूजा-घर, अचार जैसी चीजों को छूने से मना कर दिया गया। मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा था, मैं इन सबसे बिल्कुल अनजान थी।
विज्ञापन

gwalior's reena shakya story how she is educating girls about periods
पीरियड्स को लेकर लोगों को जागरूक करने की पहल - फोटो : iStock
ताकि बच्चियां हो सकें जागरूक
रीना कहती हैं, पीरियड्स को लेकर हमारे समाज में कई तरह के धार्मिक आडंबर हैं। पीरियड्स के कारण अक्सर लड़कियों को स्कूल तक छोड़ देना पड़ता है। ऊपर से हाइजीन को ध्यान न रखने के कारण तमाम तरह की दिक्कतें जो हों, सो अलग। रीना कहती हैं, अब भी ज्यादातर महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन्स नहीं मिल पाते है, उन्हें अन्य विकल्पों का सहारा लेना पड़ा है,जो सेहत के लिहाजे से नुकसानदायक हो सकता है। इन्हीं आडंबरों को दूर करने के लिए मैंने महिलाओं को इस बारे में शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। सोशल मीडिया पर इस बारे में खुलकर लिखती हूं, जिससे लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा सके। पीरियड्स भी प्राकृतिक है, जैसे अन्य शारीरिक क्रियाएं, फिर इस बारे में लोगों की सोच ऐसी क्यों?
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed