महिलाओं और पुरुषों की समानता के मामले में ये देश है अव्वल,जानिए भारत का कौन सा स्थान है
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भारत देश में लैंगिक असमानता व्यापक स्तर पर रही है। यहां पर महिलाओं की स्थिति पुरूषों के मुकाबले कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है। इन सबके बीच एक ताजा वैश्विक रिपोर्ट में पता चला है कि 'आइसलैंड' लैंगिक समानता के मामले में विश्व का सबसे बेहतर देश बना हुआ है। इस देश में महिलाओं के साथ किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता है।
क्या कहते हैं तथ्य
लैंगिक असमानता रिपोर्ट के अनुसार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2019 की विश्व सूची में 112वां स्थान प्राप्त हुआ है। डब्लूईएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विश्वभर में लिंगभेद कम तो हो रहा है, लेकिन अभी भी महिलाओं एवं पुरुषों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्यालय तथा राजनीति में भेदभाव मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, काम और राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों में अभी भी असमानता है। हालांकि, साल 2018 में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई थी।
बात करें पड़ोसी देशों की तो उनकी स्थिति भारत से बेहतर है। इनमें चीन 106वें स्थान पर, श्रीलंका 102वें स्थान पर, नेपाल 101वें स्थान पर, बांग्लादेश 50वें नंबर पर है। हालांकि पाकिस्तान 151वें नंबर है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में राजनीतिक असमानता खत्म होने में लगभग 95 साल के लगभग लगेंगे। वैसे डब्ल्यूईएफ ने कहा कि राजनीति में महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार देखा जा सकता है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लिंगानुपात 940 था। 2017 के एसआरएस सर्वे के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में जन्म के समय लिंगानुपात 961 था, जो देश में सबसे ज्यादा था। वहीं हरियाणा में यह आंकड़ा 833 था, जो देश में सबसे कम रहा।
डब्ल्यूईएफ ने साल 2006 में जेंडर गैप को लेकर पहली बार रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में भारत उस समय 98वें स्थान पर था। भारत चार मानकों में से तीन पर पिछड़ गया है। हमारा देश वर्ष 2006 की रिपोर्ट के बाद से ही पिछड़ता जा रहा है। राजनीतिक सशक्तीकरण में हमारा देश 18वें स्थान पर है। भारत स्वास्थ्य के मामले में 150वें स्थान पर है। जबकि आर्थिक भागीदारी और अवसर के मामले में 149वें स्थान पर और शिक्षा पाने के मामले में 112वें स्थान पर है।रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर बेहद सीमित हैं। यह भारत में 34.5 फीसदी, पाकिस्तान में 32.7 फीसदी, यमन में 27.3 फीसदी और इराक में 22.7 फीसदी है। कंपनियों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व वाले देशों में भी भारत (13.8 फीसदी) काफी पीछे है।2018 की रिपोर्ट के अनुसार भारत लिंग असमानता के मामले में 04 रैंक पिछड़ गया है।

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