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Engineers Day 2022: मिलिए भारत की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता से, ऐसी है सफलता की कहानी

Thu, 15 Sep 2022 09:30 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 15 Sep 2022 09:30 AM IST
सार

परिवार के समर्थन पर ललिता ने मद्रास काॅलेज आफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। उस दौरान लड़कियों के लिए इंजीनियरिंग काॅलेज में हाॅस्टल तक नहीं थे।

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Engineers Day Ayyalasomayajula Lalitha Biography Interesting Facts of India’s First Female Engineer In Hindi
ए ललिता - फोटो : facebook

विस्तार

Engineers Day 2022: भारत में हर साल 15 सितंबर को अभियंता दिवस मनाया जाता है। अभियंता यानी इंजीनियर्स को सम्मान और उनके योगदान को याद रखने के लिए इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। वैसे तो अभियंता दिवस भारत के महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की याद में मनाया जाता है। इस दिन मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। उन्होंने आधुनिक भारत की रचना की और देश को एक नया रूप दिया। कई बड़ी नदियों के लिए बांध और पुल बनाएं। उनके मार्ग पर चलकर ही देश को कई बड़े और होनहार इंजीनियर मिलें जो अपने अपने क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। लेकिन मार्ग, बांध या आधुनिक भारत के निर्माण में केवल पुरुषों का योगदान नहीं रहा। इस क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आज कई महिला इंजीनियर देश का गौरव बढ़ा रही हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की पहली महिला इंजीनियर कौन थीं? एक महिला ने इंजीनियर बनने का सपना क्यों देखा और उसे पूरा करने के लिए उस महिला को क्या क्या कदम उठाने पड़े? इंजीनियर दिवस के मौके पर जानिए देश की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता के बारे में।

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कौन हैं देश की पहली महिला इंजीनियर

भारत की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता हैं। वह एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थीं। उस दौर में महिलाओं के कंधे पर कुप्रथाओं का बोझ होता था। औरतों को पढ़ने लिखने की आजादी कम ही थी। उनका जीवन गृह कार्य तक ही सीमित होता था। ऐसे समय में स्कूल जाना, पढ़ाई करना और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना एक बड़ा और सराहनीय पहल थी।
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ए ललिता का जीवन परिचय

ए ललिता का पूरा नाम अय्योलासोमायाजुला ललिता था। उनका जन्म 27 अगस्त 1919 को चेन्नई में हुआ था। ए ललिता के पिता का नाम पप्पू सुब्बा राव था, जो पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। ललिता अपने माता पिता की पांचवी संतान थी। जिसके बाद उनके दो छोटे भाई-बहन और थे। सात बच्चों के परिवार में लड़को को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई गई और बेटियों को बुनियादी शिक्षा तक ही सीमित रखा गया। ए ललिता के तीनों भाई इंजिनियर थे।
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15 साल की उम्र में शादी

जब ललिता महज 15 साल की थीं, जो उनकी शादी कर दी गई। हालांकि शादी के समय वह मैट्रिक पास कर चुकी थीं। शादी के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन उनके पति की मौत ने ललिता को विधवा बना दिया। वह अपनी नन्ही से बेटी के साथ रहने लगीं और भविष्य के लिए चिंता करने लगीं। पिता ने बेटी ललिता के दर्द को समझा और उन्हें ससुराल से वापस मायके ले आए।

विधवा ललिता ने इंजीनियरिंग की चुनी राह

पति की मौत के बाद ललिता के जीवन का नया दौर आया। खुद की और बेटी की जिंदगी को संवारने के लिए ए ललिता ने दोबारा शिक्षा शुरू करने के बारे में सोचा। वह अपने पिता और भाईयों की तरह नौ से पांच बजे वाली नौकरी करना चाहती थीं। ताकि काम के साथ अपनी बेटी को भी वक्त दे सकें। इंजीनियरिंग का प्रभाव उनपर बचपन से ही पड़ चुका था, ऐसे में इंजिनियरिंग को अपना लक्ष्य बनाते हुए उन्होंने पढ़ाई शुरू की।

ए ललिता की शिक्षा

परिवार के समर्थन पर ललिता ने मद्रास काॅलेज आफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। उस दौरान लड़कियों के लिए इंजीनियरिंग काॅलेज में हाॅस्टल तक नहीं थे। दो और लड़कियों ने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और ललीता समेत तीनों ने हाॅस्टल में रहकर 1943 में अपनी डिग्री हासिल कर ली। इसी के साथ वह भारत की पहली महिला इंजीनियर बन गईं।

ए ललिता का करियर

बाद में ललिता ने बिहार के जमालपुर में रेलवे वर्कशॉप में अप्रेंटिस की। फिर शिमला के सेंट्रल स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया में इंजीनियरिंग असिस्टेंट के पद पर कार्य किया। यूके में लंदन के इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स से ग्रेजुएट शिप एग्जाम भी दिया और अपने पिता के साथ रिसर्च कार्य में भी जुड़ीं।

कई जगहों पर काम करने के साथ ए ललिता भारत के सबसे बड़े भाखड़ा नांगल बांध के लिए जनरेटर प्रोजेक्ट का हिस्सा बनीं। यह उनके सबसे प्रसिद्ध कामों में से एक है। 1964 में पहले इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आफ वुमन इंजीनियर एंड साइंटिस्ट कार्यक्रम के आयोजन में उन्हें आमंत्रित किया गया। 1979 में 60 साल की उम्र में ए ललिता का निधन हो गया।

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