Durga Puja: एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में दुर्गा पूजा का आयोजन, यौनकर्मी खुद बनीं ब्रांड एंबेसडर
यौनकर्मियों ने अपनी पूजा के प्रचार के लिए किसी नामचीन हस्ती की तलाश की काफी कोशिश की। लेकिन हर ओर से नाउम्मीद होने के बाद इन लोगों ने खुद ही अपनी पूजा का ब्रांड एंबेसडर बनने का फैसला किया और प्रतिमा के साथ फोटोशूट कराया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता स्थित एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट इलाके सोनागाछी की यौनकर्मी वर्ष 2013 से ही अपनी दुर्गापूजा आयोजित कर रही हैं लेकिन इस साल उनको अपनी पूजा के प्रचार के लिए कोई चेहरा नहीं मिला तो उन्होंने खुद ही इसका चेहरा बनने का फैसला किया है। इस इलाके की यौनकर्मी वर्ष 2013 से ही एक कमरे में पूजा आयोजित करती रही हैं, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2017 में उनको सार्वजनिक रूप से पूजा करने की अनुमति मिली। वर्ष 2018 में यौनकर्मियों के दुर्गा पूजा आयोजन ने देश-विदेश में सुर्खियां बटोरी। तब उनके पंडाल में भारी भीड़ जुटी थी।
यौनकर्मियों ने किया दुर्गा पूजा का आयोजन
सोनागाछी इलाके में 11 हजार यौनकर्मी स्थायी तौर पर रहती हैं। इसके अलावा कोलकाता से सटे उपनगरों से भी औसतन तीन हजार महिलाएं यहां आती हैं। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्यौहार है। राजधानी कोलकाता में आयोजित होने वाली सैकड़ों पूजा समितियों का बजट करोड़ों में होता है। वे अपनी पूजा, पंडाल और इसकी थीम के प्रचार के लिए अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को ब्रांड एंबेसडर बनाते रहे हैं। लेकिन सोनागाछी की यौनकर्मियों को यह सहूलियत नहीं मिल पाती। वजह है बजट की कमी और इस पेशे का बदनाम होना।
खुद कर रहीं पूजा पंडाल का प्रचार
इस साल इन यौनकर्मियों ने अपनी पूजा के प्रचार के लिए किसी नामचीन हस्ती की तलाश की काफी कोशिश की। लेकिन हर ओर से नाउम्मीद होने के बाद इन लोगों ने खुद ही अपनी पूजा का ब्रांड एंबेसडर बनने का फैसला किया और प्रतिमा के साथ फोटोशूट कराया।
सोनागाछी की दुर्गा पूजा को इस बार महिलाओं के अर्जुनपुर तालतला आमरा सबाई क्लब का भी समर्थन मिला है। क्लब की मौसमी नस्कर बताती हैं कि हमने भोग (प्रसाद) के लिए जरूरी सामान की सप्लाई का जिम्मा लिया है। इसके अलावा कुछ नगद सहायता भी दी है। इस पूजा की आयोजक दुर्बार महिला समन्व्य समिति की सचिव विशाखा नस्कर बताती हैं कि हमने अपनी थीम की शूटिंग खुद की है। यौनकर्मी ही अपनी पूजा की ब्रांड एंबेसडर हैं। हमने उन तस्वीरों के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में बैनर लगाए हैं। वह बताती हैं कि इस बार पूजा का बजट करीब आठ लाख रुपए है लेकिन पहले दिन से ही पंडाल में काफी भीड़ उमड़ रही है।
दुर्गा प्रतिमा के लिए रेड लाइट एरिया की मिट्टी जरूरी
शायद कम लोग ही यह बात जानते हैं कि रेड लाइट इलाके की मिट्टी के बिना दुर्गा प्रतिमा का निर्माण नहीं हो सकता लेकिन उससे भी कम लोग यह बात जानते होंगे कि सोनागाछी की यौनकर्मियों को लंबी अदालती लड़ाई के बाद सार्वजनिक रूप से दुर्गा पूजा आयोजित करने का अधिकार मिला था। दुर्गा प्रतिमा के लिए रेड लाइट इलाके से मिट्टी लेने की बात शायद सबके गले के नीचे नहीं उतरे। मन में यह सवाल पैदा होना लाजमी है कि इतने पवित्र आयोजन के लिए समाज में हाय निगाहों से देखे जाने वाले रेड लाइट इलाके की मिट्टी क्यों ली जाती है?
वेश्यालय की चौखट की मिट्टी को क्यों मनाते हैं पवित्र
दरअसल, एक बेहद पुरानी पौराणिक मान्यता है कि बहुत पहले एक यौनकर्मी देवी दुर्गा की बहुत बड़ी उपासक हुआ करती थी लेकिन समाज से बहिष्कृत उस यौनकर्मी को तरह-तरह की यातनाओं का सामना करना पड़ता था। माना जाता है कि अपनी भक्त को इसी तिरस्कार से बचाने के लिए मां दुर्गा ने स्वयं आदेश देकर उसके आंगन की मिट्टी से अपनी मूर्ति स्थापित करवाने की परंपरा शुरू करवाई थी। साथ ही देवी ने उसे वरदान भी दिया था कि उसके यहां की मिट्टी के उपयोग के बिना प्रतिमाएं पूरी नहीं होंगी। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि जब कोई पुरुष किसी कोठे के भीतर जाता है तो अपनी सारी पवित्रता वेश्यालय की चौखट के बाहर ही छोड़ देता है। इसलिए चौखट के बाहर की मिट्टी पवित्र हो जाती है।

कमेंट
कमेंट X