कमजोर आंखों की भी नहीं कर रहीं परवाह, 98 साल की उम्र में घंटों मास्क सिलकर बांट रहीं गुरदेव कौर
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कोरोना से लड़ने के लिए पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है। सभी अपने स्तर पर एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। बच्चे हो या बड़े सभी अपना योगदान इस महामारी से निपटने के लिए दे रहे हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति की पत्नी अपने हाथों से मास्क सिल रही हैं। ताकि मास्क की कमी को पूरा किया जा सके। ऐसे में आम जनता को तो आगे आना ही है। ऐसी ही कहानी है गुरदेव कौर की, जिन्होंने ढलती उम्र को अपने हौंसलों के आगे पस्त नहीं पड़ने दिया।
पंजाब के मोगा में रहने वाली 98 वर्षीय गुरदेव कौर धालीवाल अपने बुलंद हौसलों के साथ मदद के लिए आगे आईं हैं। अपने बूढ़े शरीर और कमजोर हो चुकी आंखों की परवाह किए बिना वह रोजाना 8 घंटे जरूरतमंदों के लिए मास्क बनाने का काम कर रही हैं। लोगों की मदद के लिए मास्क बना रही गुरदेव कौर यह भी कहती हैं कि देश में जारी लॉकडाउन उनका हम सभी को पालन करना चाहिए, ताकि दुनिया पर आए इस संकट सभी मिलकर सामना कर सके।
गुरदेव कौर के परिवाल वाले कहते हैं कि उनकी मां की आंखे कमजोर हैं और उन्हें ठीक से दिखाई नहीं देता है। फिर भी वो अपनी सेहत की परवाह न करते हुए रोज सुबह अपनी दिनचर्या को पूरा करने के बाद सिलाई मशीन लेकर बैठ जाती हैं। जिससे वो रोजाना आठ घंटे तक मास्क सिलती हैं। जिस सिलाई मशीन को गुरदेव कौर इस्तेमाल करती हैं उसके बारे में भी परिवार वाले दिलचस्प बात बताते हैं। कहते हैं कि ये मशीन करीब सौ साल पुरानी है। जिसे उनके घरवाले सिंगापुर से लेकर आए थे। मास्क सिलने की प्रेरणा उनको एक मोहल्ले के सब्जी विक्रेता से मिली। दरअसल, एक दिन जब उन्होंने सब्जी विक्रेता को बिना मास्क लगाये सब्जी बेचते देखा तो उसे मास्क पहनने के लिए कहा। जब उस सब्जी वाले ने बताया कि उसके पास मास्क खरीदने के पैसे नही है तब उन्होंने मास्क सिलने का फैसला किया।

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