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हुनर को बनाएं पैसे कमाने का जरिया, महिलाएं घर बैठे कर सकती हैं ये उद्योग

Sun, 18 Aug 2024 08:34 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sun, 18 Aug 2024 08:34 AM IST
सार

जयपुर की दिशि सोमानी के पिता भी नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी बिजनेस करें, क्योंकि इसमें बहुत जोखिम होते हैं, लेकिन दिशि खुद को एक मौका देना चाहती थीं। उनके दिमाग में ज्वेलरी डिजाइनिंग का आइडिया आया और महज पांच हजार रुपये की पूंजी से उन्होंने ऑनलाइन व्यवसाय शुरू कर दिया।
 

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Best Home Business Ideas For Women Entrepreneurs in India
घर बैठे महिलाएं करें बिजनेस - फोटो : Pexel

विस्तार

अंशु सिंह

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आपके पास हुनर है। आप कुछ बना सकती हैं। कई बार आपने सोचा भी कि अपने हुनर को एक बाजार दें, लेकिन आपने शुरू नहीं किया। अब देर न करें। कई लोग अपने घर से ही काम करते हुए बहुत आगे निकल गए हैं। आप भी अपने हुनर से ढेर सारे रुपये कमा सकती हैं।

सदियों से हमारे समाज में एक लिंग भेद रहा है। जब एक पुरुष अपने घर में बिजनेस करने की इच्छा जाहिर करता है तो उससे सवाल नहीं किए जाते, बस बोला जाता है कि ‘तुम कर लोगे न?’ इससे उसका आत्मविश्वास खुद-ब-खुद बढ़ जाता है। दूसरी ओर, लड़कियों को साफ कह दिया जाता है कि ‘तुम नहीं कर पाओगी।’ उनके मन में छोटी-सी उम्र में ही इतनी सारी शंकाएं भर दी जाती हैं कि उन्हें खुद की काबिलियत पर शक होने लगता है। हां, यह सच है कि बिजनेस में अनेक प्रकार के दांव-पेंच होते हैं, कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और अगर कारोबारी पृष्ठभूमि न हो तो चुनौतियां कई गुना अधिक बड़ी लगती हैं।
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जयपुर की दिशि सोमानी के पिता भी नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी बिजनेस करें, क्योंकि इसमें बहुत जोखिम होते हैं, लेकिन दिशि खुद को एक मौका देना चाहती थीं। उनके दिमाग में ज्वेलरी डिजाइनिंग का आइडिया आया और महज पांच हजार रुपये की पूंजी से उन्होंने ऑनलाइन व्यवसाय शुरू कर दिया।
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उद्यमिता में आने के अपने निर्णय के बारे में दिशि बताती हैं, “परिवार में कोई भी ज्वेलरी बिजनेस में नहीं था। न ही किसी को इस उद्योग की जानकारी थी। मैंने अकेले अपने दम पर शून्य से शुरुआत की। मां ने एस्थेटिक डिजाइन में मदद की तो पिता ने गाइड की भूमिका निभाई। इसके अलावा मेरे कुछ दोस्त थे, जिन्होंने बिना कोई फीस लिए एक प्रारंभिक वेबसाइट तैयार करने में मदद की। इसके बाद मैंने कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया और लोकप्रिय ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस के साथ टाई-अप किया। इसके बाद ऑर्डर आने लगे। इस बीच छोटी-छोटी चुनौतियां रहीं, जैसे कि स्टाफ और कारीगरों के साथ काम करते हुए उत्पाद की गुणवत्ता को निरंतर बनाए रखना, लेकिन यह शायद सभी स्टार्टअप उद्यमियों के साथ होता है। इस काम में हमें संयम रखना होता है और हमारी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता एक दिन सफलता में जरूर बदल जाती है।”

निवेशक भी आ रहे आगे

पेशे से किसान कन्या देवी ने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन उनकी पहचान पशुपालन व्यवसायी के रूप में होगी। इसके लिए उन्होंने खुद पर विश्वास किया, मेहनत की और अपने परिवार के लिए एक समृद्ध एवं सुरक्षित भविष्य का निर्माण करने में सक्षम हो सकीं। हमारे देश में लगभग 69.2 करोड़ महिलाओं की कुल आबादी में से 37 फीसदी सक्रिय रूप से रोजगार में हैं। पारंपरिक पेशों, सर्विस सेक्टर के अलावा उद्यमिता में उनकी सशक्त उपस्थिति दिखाई देने लगी है।

अमेरिका की बेन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 20 फीसदी उद्यम महिलाओं के स्वामित्व में हैं। वे स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूह से लेकर सोशल मीडिया की मदद से आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसमें सरकारी योजनाएं भी उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में पूरा सहयोग कर रही हैं और निवेशक तक महिला उद्यमियों पर विश्वास करने में पीछे नहीं हैं।

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घर बैठे महिलाएं करें बिजनेस - फोटो : Pexel

मुमकिन है हर चीज

महिलाओं की इस दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज देश में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप की संख्या करीब 18 फीसदी तक बढ़ गई है। मास्टरकार्ड इंडेक्स ऑफ वूमेन एंटरप्रेन्योर की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में देश में लगभग 14 फीसदी महिला उद्यमी हैं।

वहीं, एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र का करीब 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों से बना है। प्रौद्योगिकी, पर्सनल हेल्थ, खाद्य एवं पेय पदार्थ और फैशन एवं रियल एस्टेट सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं, डिजिटल क्रांति के बाद से वे हैंडमेड प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल मार्केटिंग, घर के बने खाने की होम डिलिवरी कर अच्छी कमाई कर रही हैं तो विविध विषयों पर यूट्यूब चैनल चलाकर आय का नया रास्ता भी तलाशा है।

बृष्टि कुमारी के यूट्यूब चैनल के करीब 4.72 मिलियन सब्सक्राइबर हैं, जो नई-नई डिशेज की वीडियो को काफी पसंद करते हैं। इससे वह आज घर बैठे ही लाखों में कमाई कर रही हैं। स्वाति गर्ग को भी कुकिंग के शौक ने होम शेफ बना दिया। स्वाति ने 2015 में घर पर ही चॉकलेट बनाना शुरू किया। आगे चलकर केक एवं अन्य आइटम्स भी बनाने लगीं।

स्वाति बताती हैं, “मैं अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को प्रॉडक्ट्स भेजा करती थी। सबको इसका स्वाद अच्छा लगा और उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर बनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने हॉबी क्लासेज से बेकिंग की बारीकियां सीखीं। अपने हुनर को और तराशा, जिस से उत्पादों में नयापन ला पाई। मैं इसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट करती थी, जिससे धीरे-धीरे ऑर्डर्स आने लगे। कुछ वर्ष यूं ही चलने के बाद 2018 में मैंने फूड लाइसेंस लिया और अपने यूट्यूब चैनल की नींव डाली। आज मेरे मेन्यू में केक के अलावा कपकेक, कुकीज, आइसक्रीम, पाई, डार्ट आदि शामिल हैं। किसी भी प्रकार का उद्यम शुरू करने के लिए सबसे पहले अपने ऊपर ही दांव खेलना पड़ता है। साथ ही अगर आप पूरे जज्बे के साथ कुछ करना चाहें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।”

कांथा कला को व्यवसाय से जोड़ा

देश में लगभग 83 लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी 90 करोड़ से अधिक महिलाएं इस बात की गवाह हैं कि अगर हुनर के साथ पक्का इरादा हो तो रास्ते निकल ही आते हैं। पौलमी साहा ने बंगाल की प्राचीनतम कलाओं में से एक कांथा कला को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यमिता में कदम रखा। पहले-पहल सिर्फ एक महिला कारीगर उनके साथ थी, जिसे उन्होंने प्रशिक्षित किया। आहिस्ता-आहिस्ता कारवां बढ़ता गया।

पौलमी कांथा कला का साड़ियों से इतर बैग, ज्वेलरी और अन्य एक्सेसरीज पर प्रयोग करती हैं और प्रदर्शनियों, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्टोर्स के माध्यम से उसे बड़े बाजार तक पहुंचाती हैं।

वह कहती हैं, “मैंने गरीब तबके की महिलाओं को जोड़ा, जिन्हें घर से बाहर निकलकर काम करने की आजादी नहीं थी। आज सभी घर पर रहकर ही काम करती हैं। मैं उन्हें डिजाइन के नमूने, कपड़े और अन्य सामग्रियां उपलब्ध कराती हूं। इस कार्य से न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, बल्कि वे बचत कर बच्चों को पढ़ा-लिखा भी पा रही हैं।”

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घर बैठे महिलाएं करें बिजनेस - फोटो : Pexel

कहां से मिलेगी आर्थिक मदद

केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जो बिजनेस प्लान तथा मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने के साथ उन को बाजार तक कैसे पहुंचाना है, यह भी सिखाती हैं। वहीं वित्तीय जानकारी को मजबूत करने के लिए कार्यशालाओं के जरिये बजट, सेविंग, निवेश आदि की जानकारी दी जाती है। भारतीय महिला बैंक एवं स्टेट बैंक ऑफ मैसूर ‘अन्नपूर्णा’ योजना के तहत महिलाओं को स्वयं का खान-पान व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण देते हैं, तो भारतीय स्टेट बैंक ‘स्त्री शक्ति पैकेज’ के तहत उन महिलाओं को कर्ज प्रदान करता है, जो किसी भी व्यवसाय में 50 फीसदी या उससे अधिक की भागीदारी रखती हैं।

‘स्टार्ट अप इंडिया ऋण’ योजना के तहत महिलाओं को उद्यम शुरू करने के लिए 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का ऋण दिया जाता है। यह ऋण किसी भी महिला उद्यमी को दिया जा सकता है, जो सेवा, व्यापार या विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत पहली बार कोई उद्यम शुरू कर रही हो। नीति आयोग के तहत ‘महिला उद्यमिता मंच’ एक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के रूप में महिला उद्यमियों से संबंधित सूचना एवं सेवाएं प्रदान करता है। उन्हें फंडिंग एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने के अलावा समुदाय एवं नेटवर्किंग, इंक्यूबेशन, कौशल विकास एवं मेंटरशिप में मदद करता है।

सपनों के पीछे भागने की जिद हो तो...

जयपोर की सह-संस्थापक शिल्पा शर्मा कहती हैं, मेरा मानना है कि उद्यमिता कहीं न कहीं महिलाओं को अपने सपनों के पीछे भागने की आजादी देती है। इसमें हमेशा नया करने की गुंजाइश होती है। महिलाओं को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि अपने कार्यों एवं फैसलों के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होती हैं, इसलिए जितनी अधिक से अधिक महिलाएं उद्यमिता से जुड़ेंगी, उससे अनेकानेक हाथों को रोजगार मिलेगा। मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है, जब मैं बुनकरों, हस्तकरघा कारीगरों को बाजार से जोड़ पाती हूं, क्योंकि उनके लिए वहां तक पहुंचना आज भी बड़ी चुनौती है। मैं महिलाओं के स्वयं सहायता समूह, सेवा मंदिर जैसी कला संस्थाओं के अलावा उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर के बुनकरों, कारीगरों के साथ काम करती हूं, ताकि उनके उत्पादों को बड़े स्तर तक ले जा सकूं। उन्हें बड़े प्लेटफॉर्म्स या रिटेल स्टोर्स तक पहुंचा सकूं।

यह खुद पर भरोसे की बात है

एथनिचिक के संस्थापक रौशनी पुथुकुडी बताती हैं, पिता के एयरफोर्स में होने के कारण मुझे देश के विभिन्न प्रांतों में रहने का अवसर मिला। पेशे से इंजीनियर होने के बावजूद बचपन से चित्रकला में दिलचस्पी थी। मधुबनी पेंटिंग से लेकर केरल का म्यूरल आर्ट सब सीखा, लेकिन नौकरी से दो-तीन वर्ष के ब्रेक के बाद जब वापसी का समय आया तो कला के क्षेत्र में ही नई शुरुआत करने का निर्णय लिया। अकेले ही घर के एक कमरे से पारंपरिक कलाओं के मिश्रण से हस्तनिर्मित होम डेकोर आइटम्स, ज्वेलरी, एक्सेसरीज आदि डिजाइन करने शुरू किए। मुझे बाजार में काफी गुंजाइश दिखी तो अपना ऑनलाइन व्यवसाय शुरू किया। आज मेरा अपना स्टूडियो सेटअप है, जिसमें फुलटाइम लोग काम करते हैं। मैं खुद डिजाइन बनाती हूं, साथ में कई फ्रीलांसर आर्टिस्ट भी जुड़े हैं और सोशल मीडिया से ब्रांड का प्रमोशन करती हूं। मैंने यही सीखा है कि हमें खुद पर विश्वास करना चाहिए और किसी भी चुनौती से हार नहीं माननी चाहिए। हां, इसके लिए कड़ी मेहनत, समर्पण के साथ धैर्य रखना होता है।

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