बैंगलुरु की बनशंकरी फूल बेचकर चलाती हैं घर, बनना चाहती हैं डॉक्टर
बनशंकरी फूल बेचकर पढ़ाई करती हैं ताकि वे आगे चलकर कुछ बड़ा कर सकें। गरीब होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बड़े ख्वाब नहीं देखे सकते हैं। बनशंकरी आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं।
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बैंगलुरु में रहने वालीं बनशंकरी डॉक्टर बनना चाहती हैं और फिलहाल वे फूल बेचकर अपना गुजारा कर रही हैं। बनशंकरी पिछले 5 वर्षों से सुबह 8 से दोपहर 5 बजे तक फूल बेचती हैं। बनशंकरी फूल बेचते समय भी जो थोड़ा बहुत समय मिलता है, उसमें पढ़ाई करती हैं। वे फिलहाल नहीं जानती हैं कि वे किस तरह से डॉक्टर बनेंगी लेकिन वे ख्वाब देखना नहीं छोड़ती हैं। जानिए बनशंकरी की कहानी।
बनशंकरी को मिलेगा लेपटॉप
फिलहाल बनशंकरी अपने हिसाब से मोबाईल पर जो उन्हें समझ पढ़ता है, वे पढ़ाई करती हैं लेकिन जल्द वे अपनी पढ़ाई को आसानी से कर सकेंगी क्योंकि बीबीएम्पी चीफ कमिश्नर गौरव गुप्ता को उनके ख्वाब के बारे में पता चला है और वे उनकी सहायता करेंगे। उन्हें लैपटॉप दिया जाएगा।
अधिक आमदनी नहीं होती
बनशंकरी के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे उसे पढ़ा सकें। बनशंकरी बहुत मेहनती हैं, वे परिवार चलाने में सहायता करने का प्रयास कर रही हैं। बनशंकरी पिछले लंबे समय से यह फूल बेचने का काम कर रही हैं लेकिन इससे उन्हें बहुत अधिक आमदनी नहीं हो पाती है।
काम करके भी करती हैं पढ़ाई
बनशंकरी जब दिन में फूल बेचकर जाती हैं तब वे एक से दो घंटे के लिए पढ़ाई करती हैं और घर काम में मां का हाथ बंटाकर वे फिर से फूल बेचने के लिए लौट आती हैं। त्योहारों पर उनके फूल अच्छे बिकते हैं। सामान्य दिनों में कई बार वे खाली बैठती हैं तो वे पढ़ाई ही किया करती हैं।

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