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Bachendri Pal: माउंट एवरेस्ट पर फतह करने वाली इस महिला के बारे में जानें, कैसे बिना सहारे के रचा इतिहास

Fri, 25 Aug 2023 04:26 PM IST
मेघा कुमारी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 25 Aug 2023 04:26 PM IST
सार

अगर इंसान ठान ले तो बड़े से बड़े काम आसानी से कर सकता है। ये कहावत तो आपने सुनी होगी। ठीक ऐसी ही कहानी बछेंद्री पाल की है।

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Bachendri Pal story Know about this woman who conquered Mount Everest
Bachendri Pal - फोटो : Amarujala

विस्तार

Bachendri Pal Story: अगर इंसान ठान ले तो बड़े से बड़े काम आसानी से कर सकता है। ये कहावत तो आपने सुनी होगी। ठीक ऐसी ही कहानी बछेंद्री पाल की है। बछेंद्री पाल माउंट एवरेस्ट पर फतह करने वाली और तिरंगा फहराने वाली पहली भारतीय महिला हैं। साथ ही दुनिया की पांचवी महिला हैं, जो एवरेस्ट पर चढ़ाई कर चुकी हैं। पहाड़ पर चढ़ना आसान नहीं है। हालांकि, बछेंद्री पाल ने ये कर दिखाया है। उनके संघर्षों को दुनिया सलाम करती हैं। बछेंद्री पाल की ये उपलब्धि व परिश्रम हर महिला के लिए प्रेरणा है। बछेंद्री पाल ने इस उपलब्धि को पाने के लिए कड़ी मेहनत की है। उसी का परिणाम है कि, आज इतिहास के पन्नों पर उनका नाम लिखा है। वह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नकुरी गांव से है। अपने सफल प्रयासों से न केवल उन्होंने परिवार का नाम रोशन किया है बल्कि पूरे देश को उनपर नाज है। आइए बछेंद्री पाल के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

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घर वाले बनाना चाहते थे टीचर

बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नकुरी गांव में हुआ था। उन्होंने बीए में ग्रेजुएशन और संस्कृत से मास्टर की डिग्री को हासिल किया। मास्टर करने के बाद बछेंद्री पाल ने बीएड की पढ़ाई को पूरा किया। उनके परिवार वाले चाहते थे कि, वह टीचर बनें। पर्वतारोही बनने के लिए पाल को अपने परिवार से बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं मिला। बछेंद्री पाल के पिता किशन पाल सिंह एक साधारण व्यापारी थे।

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ऐसे रचा इतिहास

बछेंद्री पाल ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिला लिया। साल 1984 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए एक अभियान दल का गठन हुआ था। जिसका नाम एवरेस्ट 84 था। इस दल में बछेंद्री पाल भी शामिल थीं। ट्रेनिंग के बाद उसी साल मई में उनका दल अभियान के लिए निकला। खराब मौसम और तूफान में कठिन चढ़ाई करते हुए 23 मई 1984 के दिन बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट पर फतह करते हुए इतिहास रच दिया।

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पद्मभूषण से हो चुकी है सम्मानित

बछेंद्री पाल कठिन संघर्षों से अपने नाम कई उपलब्धियां कर चुकी है। उन्हें साल 1984 में पद्मश्री, 1986 में अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें 2019 में पद्मभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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