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Arundhati Roy: पढ़ाई के लिए बेचती थीं खाली बोतलें, अरुंधति राय ऐसे बनी देश की बड़ी लेखिका और समाजसेविका

Sat, 25 Dec 2021 01:20 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 25 Dec 2021 01:20 PM IST
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Arundhati Roy Birthday Biography Book Awards
अरुंधती राय - फोटो : PTI

भारत की महिलाएं काफी सशक्त हैं। सेना में फाइटर जेट उड़ाने से लेकर देश की न्यायपालिका की रक्षा और कानून व्यवस्था को बनाएं रखने के लिए काले कोट से खाकी वर्दी तक में महिलाएं समाज में अपना योगदान दे रही हैं। देश में ऐसी भी महिलाएं हैं जिनके पास वर्दी नहीं, न ही देश की रक्षा के लिए बल है लेकिन अथाह ज्ञान और कलम की ताकत है, जिसका इस्तेमाल वह समाज सुधारने के लिए कर रही हैं। यहां बात अरुंधति राय की हो रही है। अरुंधति राय अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखिका हैं। इतना ही नहीं अरुंधति समाज सेविका हैं। उन्हें लेखन से लेकर सोशल वर्क तक के लिए कई बड़े अवाॅर्ड मिल चुके हैं। देश में ही नहीं अरुंधति राय का नाम विदेशों में भी मशहूर है। 24 नवंबर को अरुंधति राय का जन्मदिन होता है। चलिए जानते हैं देश की सुप्रसिद्ध उपन्यासकार और समाजसेविका अरुंधति राय के बारे में।

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अरुंधति राय का जीवन परिचय

अंग्रेजी भाषा की उपन्यासकार अरुंधति राय का जन्म शिलौंग में 24 नवम्बर 1961 में हुआ था। अरुंधति राय की मां का नाम मैरी रॉय है। वहीं उनके पिता राजीब राॅय हैं। मैरी राॅय केरल की सीरियाई ईसाई परिवार से थीं, जबकि उनके पिता कलकत्ता के निवासी बंगाली हिंदू हैं। अरुंधति जब दो साल की थीं तो उनके माता पिता एकदूसरे से अलग हो गए। उसके बाद से अरुंधति अपनी मां और भाई के साथ केरल आ गईं, जहां उन्होंने अपना बचपन गुजारा।
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अरुंधति राय की शिक्षा

अरुंधति ने केरल के अयमनम में रहती थीं। शुरुआती शिक्षा अपनी मां के स्कूल, जिसका नाम कॉर्पस क्रिस्टी था, से ली। बाद में दिल्ली आकर आर्किटेक्ट की पढ़ाई पूरी की।
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16 साल में छोड़ दिया था घर

अरुंधति राय ने 16 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था और दिल्ली आकर रहने लगीं। अरुंधति ने एक इंटरव्यू में खुद बताया था कि उन्होंने खाली बोतले बेचकर पैसे जुटाए थे। उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। जब जाकर उनका दिल्ली स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में दाखिला हुआ।

लेखिका अरुंधति का करियर

अरुंधति ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में अभिनय भी किया। मैसी साहब नाम की फिल्म में अरुंधति लीड रोल में रहीं। इसके बाद अरुंधति ने कई फिल्मों के लिए पटकथाएं लिखीं। अरुंधति राय पर अपने परिवार, खासकर माता पिता का गहरा असर रहा। यही वजह है कि अरुंधति की एक किताब में उन बातों का जिक्र था, जो दो साल की उम्र में उनके साथ घटित हुईं थीं। उन्होंने इस बारे में कहा था, 'मुझे खुद याद नहीं है कि मैंने उन घटनाओं के बारे में कैसे लिख दिया। शायद वो घटनाएं मेरे मस्तिष्क में एकत्र हो गई हों और सही वक्त पर बाहर आ गई हों।

अरुंधति राय की किताब

उपन्यासकार अरुंधति ने 'इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस (1989), इलेक्ट्रिक मून (1992) और गॉड ऑफ स्माल थिंग्स जैसे उपन्यास लिखे।

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