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महबूबा सिराज: अफगान महिलाओं के हक की आवाज उठाने वाली महिला, इस बात से हैं चिंतित
Mon, 23 Aug 2021 01:53 PM IST
Abhilash Srivastava
लाइफ स्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफ स्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:53 PM IST
सार
तालिबान लड़ाकों की बढ़ती ताकत के बाद अफगानी महिलाओं के भीतर भी डर और अधिक बढ़ गया है। इस तरह की डर को लेकर महबूबा सिराज काफी चिंतित हैं। महबूबा सिराज कहती हैं, जिस तरह से मौजूदा हालात अफगानिस्तान में हैं, उसे देख कर डर लगता है।
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अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति
- फोटो : Social media
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विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही वहां के हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। तालिबानी आतंकियों से सुरक्षित रहने के लिए लोग देश छोड़कर भाग जाना चाहते हैं। कई ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिनमें मांएं अपने बच्चों को सेना के जवानों को सौंप रही हैं, ताकि बच्चे सुरक्षित रह सकें। अफगानिस्तान में तालिबान का डर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक, सभी में है, हालांकि इसमें सबसे ज्यादा खतरा वहां की लड़कियों और महिलाओं के लिए बताया जा रहा है।
तालिबानी शासन किस तरह के महिलाओं पर जुल्म करता है, यह किसी से छिपा नहीं है। तालिबान की नजर में महिलाओं के लिए कोई मानवाधिकर नहीं है, महिलाओं का हक सबसे ज्यादा खतरे में है। ऐसे में याद आता है वह चेहरा जो अफगानी महिलाओं की आवाज को हमेशा बुलंद करती रही हैं- अफगान महिला नेटवर्क की संस्थापक महबूबा सिराज। यह वही नाम है जिसने यहां की औरतों को हक के साथ स्वतंत्र रहना सिखाया।
तालिबान लड़ाकों की बढ़ती ताकत के बाद अफगानी महिलाओं के भीतर भी डर और अधिक बढ़ गया है। इस तरह की डर को लेकर महबूबा सिराज काफी चिंतित हैं। महबूबा सिराज कहती हैं, जिस तरह से मौजूदा हालात अफगानिस्तान में हैं, उसे देख कर डर लगता है। काफी जद्दोजहद के बाद महिलाओं को जो हक मिल पाया था वह अब फिर से छिनता हुआ दिख रहा है। देश सदियों पीछे जा रहा है, कोई मदद नहीं कर रहा है। तालिबानी वाले भले ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वादा कर रहे हैं, पर इनपर कौन भरोसा करे? भविष्य को सोच कर रूह कांप जाती है।
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तालिबानी शासन किस तरह के महिलाओं पर जुल्म करता है, यह किसी से छिपा नहीं है। तालिबान की नजर में महिलाओं के लिए कोई मानवाधिकर नहीं है, महिलाओं का हक सबसे ज्यादा खतरे में है। ऐसे में याद आता है वह चेहरा जो अफगानी महिलाओं की आवाज को हमेशा बुलंद करती रही हैं- अफगान महिला नेटवर्क की संस्थापक महबूबा सिराज। यह वही नाम है जिसने यहां की औरतों को हक के साथ स्वतंत्र रहना सिखाया।
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तालिबान लड़ाकों की बढ़ती ताकत के बाद अफगानी महिलाओं के भीतर भी डर और अधिक बढ़ गया है। इस तरह की डर को लेकर महबूबा सिराज काफी चिंतित हैं। महबूबा सिराज कहती हैं, जिस तरह से मौजूदा हालात अफगानिस्तान में हैं, उसे देख कर डर लगता है। काफी जद्दोजहद के बाद महिलाओं को जो हक मिल पाया था वह अब फिर से छिनता हुआ दिख रहा है। देश सदियों पीछे जा रहा है, कोई मदद नहीं कर रहा है। तालिबानी वाले भले ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वादा कर रहे हैं, पर इनपर कौन भरोसा करे? भविष्य को सोच कर रूह कांप जाती है।
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Must watch interview with Mahbooba Seraj the founder of the Afghan Women’s Network pic.twitter.com/ILyFGoN4m1
— Saad Mohseni (@saadmohseni) August 10, 2021
एक हालिया इंटरव्यू में महबूबा कहती हैं, अफगानिस्तान को इस संकट से बचाने के लिए दुनिया के बड़े नेताओं को ध्यान देना चाहिए। यहां जो हो रहा है और आगे जो भी होगा उसके लिए इतिहास हमेशा से समकालीन दुनिया के बड़े नेताओं की चुप्पी को जिम्मेदार मानेगा। महिलाओं के साथ तालिबानी बर्बरता कर रहे हैं, हम फिर से वहीं आ खड़े हुए हैं, जहां करीब 20 साल पहले थे।

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