अफगानिस्तान से पढ़ने आई एक लड़की की कहानी, जिसने भारत आकर जाना 'क्या है आजादी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफगानिस्तान जैसे देशों में महिलाओं की क्या स्थिति है ये इस लड़की के उन शब्दों से पता लगाया जा सकता है। जिसमें उसने कहा कि भारत आकर जाना कि आजादी क्या होती है। अफगानिस्तान की गलियों में तालीबानी जिस लड़की को मारना चाहते थे वो दिल्ली आकर पीएचडी करने लगी। ये कहानी है एक अफगानी लड़की की। जिसे लड़कों की तरह बाल काटने की सजा देने के लिए तालिबान ढूंढ रहा है।
फातिमा बताती हैं कि जब वो सात साल की थी तो बालों को कटवाकर लड़कों जैसा करवा लिया था। एक दिन जब बाल सही कराने नाई की दुकान पर गई तो कानों की बाली देख उन्हें मेरे लड़की होने पर शक हो गया। नाई ने मुझे भागने का इशारा किया। वहां से भागकर कुएं में कूदकर अपनी जान बचाई। लेकिन तालिबानियों ने मुझे न पकड़ पाने के बाद नाई को मुंह काला कर पूरे बाजार में घुमाया और कोड़े मारे। 2017 में फातिमा इंडियन कॉउंसिल ऑफ कल्चरल रिलेशंस में स्कॉलरशिप हासिल कर दिल्ली आ गई। यहां जाना आजादी क्या होती है। वो भारत में रहकर पीएचडी करना चाहती है लेकिन उसे अपनी मां और बहनों के लिए अपने वतन लौटना ही होगा। फातिमा अपने देश लौटकर नौकरी करना चाहती हैं। साथ ही वो एनजीओ के साथ जुड़कर महिलाओं के हक के लिए लड़ना चाहती हैं और उन्हें हिजाब, बुर्का और चादरी जैसी प्रथा से मुक्त किया जा सके। ये सारे रिवाज उन पर जबरदस्ती थोपें न जाएं।

कमेंट
कमेंट X