91 साल की कांता स्वरूप सालों से चला रहीं ब्लड डोनेशन कैंप, इस उम्र में कर रहीं लोगों को जागरुक
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91 साल की कांता स्वरूप कृष्णा के लिए अकेले सारे काम करना मुमकिन नही है। लेकिन वो अपने इस पेशे को छोड़ना नहीं चाहती। वो सालों से ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन करती आ रही हैं। उनका कहना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग ब्लड कैंप का आयोजन करें। जिससे कि किसी गरीब जरूरतमंद को खून खरीदना ना पड़े। फिलहाल वो आजकल फोन कर लोगों को इस काम के लिए जागरुक कर रही हैं।
हालांकि कांता स्वरूप के इस सालों पुराने काम को संभालने में उनकी बेटी नीति सरीन मदद करती हैं। कांता लोगों को ब्लड बैंक के लिए आर्थिक मदद देने की भी अपील करती हैं। कांता को उनके इस सराहनीय काम के लिए सालों पहले 1971 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। हालांकि वर्तमान समय की स्थिति को देखते हुए उन्हें काफी दुख होता है। उनका कहना है कि कोविड की वजह से इस समय ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन बहुत कम हो गया है। जबकि ये समय सबसे ज्यादा ब्लड की जरूरत है। इसलिए जरूरी है कि ऐसे कैंप का आयोजन हर हाल में हो।
कांता स्वरूप कृष्ण ने साल 1964 से अभियान की शुरूआत की थी। कांता ने 2004 में रोटरी क्लब की मदद से रोटरी और ब्लड बैंक सोसाइटी सेंटर की स्थापना की थी। जो कि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन द्वारा तय किए गए मूल्य पर मरीजों को खून उपलब्ध कराती थीं। कांता को अपने इस अभूतपूर्व कार्य के लिए राजीव गांधी अवॉर्ड और मदर टेरेसा अवॉर्ड से भी नवाजा गया है।

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