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28 वर्षीय अलीना दिव्यांगों के हित में कर रही हैं कई अच्छे काम, ताकि वे भी अपने जीवन को सम्मान के साथ जी सकें

Tue, 03 Aug 2021 04:34 PM IST
संकल्प सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Tue, 03 Aug 2021 04:34 PM IST
सार

आज हम बेंगलुरु की 28 वर्षीय अलीना आलम की बात करने वाले हैं। अलीना 'समर्थनम ट्रस्ट' के जरिए दिव्यांग लोगों के जीवन को सुधारने के लिए कई बेहतरीन काम कर रही हैं। इस ट्रस्ट के माध्यम से दिव्यांग लोगों के लिए खास तरह के इंटर्नशिप प्रोग्राम को चलाया जा रहा है। अलीना इसके जरिए दिव्यांगों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहती हैं, जिसकी मदद से वे अपने जीवन को पूरे मान सम्मान के साथ जी सकें।

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28 years old Alina Alam is doing many good things in the interest of differently abled people in Bengaluru
अलीना आलम - फोटो : Instagram/alinaa0312

विस्तार

हमारे समाज में ऐसे भी लोग होते हैं, जो दीनहीन और लाचार लोगों की जिंदगी को बदलने के लिए कई अच्छे काम करते हैं। समाज में इन लोगों को खूब मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। अक्सर इन क्षेत्रों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। इसी कड़ी में आज हम बेंगलुरु की 28 वर्षीय अलीना आलम की बात करने वाले हैं। अलीना 'समर्थनम ट्रस्ट' के जरिए दिव्यांग लोगों के जीवन को सुधारने के लिए कई बेहतरीन काम कर रही हैं। इस ट्रस्ट के माध्यम से दिव्यांग लोगों के लिए खास तरह के इंटर्नशिप प्रोग्राम को चलाया जा रहा है। अलीना इसके जरिए दिव्यांगों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहती हैं, जिसकी मदद से वे अपने जीवन को पूरे मान सम्मान के साथ जी सकें। आपको बता दें कि बेंगलुरु का मिट्टी कैफे दिव्यांगों द्वारा ही चलाया जाता है। मिट्टी कैफे की पूरी देखभाल अलीना आलम करती हैं। अलीना चाहती हैं कि दिव्यांग भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। 

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अलीना एक ऐसे मॉडल को बनाने की दिशा में काम कर रही हैं, जो प्रैक्टिकल होने के साथ साथ इंटरेक्टिव भी हो। उनका कहना है कि हम सभी लोगों की प्राथमिकता भोजन है। भोजन ही लोगों को आपस में एक दूसरे के साथ जोड़ता है। इसी वजह से वे अपने मिट्टी कैफे के माध्यम से अधिक से अधिक दिव्यांगों के साथ जुड़ना चाहती हैं।

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आलीना से जब यह पूछा गया है कि आपने अपने कैफे का नाम मिट्टी ही क्यों चुना? इस पर उन्होंने कहा - "हम भले ही चाहे किसी भी वर्ग या समुदाय से संबंध रखते हों, पर हमारा उद्गम मिट्टी से ही हुआ है और हमारा अंत भी इसी में होगा। इसी वजह से मैंने इस कैफे का नाम मिट्टी रखा।"

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आपको बता दें कि साल 2017 में सबसे पहले मिट्टी कैफे को बी.वी.बी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में देशपांडे फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया था। अलीना मिट्टी कैफे की ब्रांड एंबेसेडर होने के साथ-साथ एक जानी मानी शख्सियत भी हैं। उनकी इस पहल के चलते कई दिव्यांग लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। वहीं उनका यह काम कई लोगों के लिए एक प्रेरणा भी बना है।

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