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Year Ender 2023: देश दुनिया को आकर्षित कर रहा अयोध्या का नया अध्याय; एक रंग एक स्वरूप में निखरी रामनगरी
Sat, 30 Dec 2023 02:05 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 30 Dec 2023 02:05 PM IST
सार
नौ नवंबर 2019 को राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद न सिर्फ रामलला की टेंट से आजादी हुई बल्कि अयोध्या का भी वनवास खत्म हुआ। पांच अगस्त 2020 को पीएम नरेंंद्र मोदी ने जिस दिन राममंदिर की आधारशिला रखी उसी दिन अयोध्या के नवनिर्माण की भी नींव पड़ गई।
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Yar Ender 2023
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धर्म, संस्कृति के साथ राजनीति की धुरी मानी जानी वाली अयोध्या का नया अध्याय सबको आकर्षित करने वाला है। साल 2024 में रामभक्तों का इंतजार खत्म होने को है। 22 जनवरी को रामलला की प्राणप्रतिष्ठा होने जा रही है। राममंदिर के लिए पीढि़यों ने संघर्ष किया।राममंदिर का निर्माण पांच सौ साल की प्रतीक्षा, संघर्ष और आंदोलनों का नतीजा है।
नौ नवंबर 2019 को राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद न सिर्फ रामलला की टेंट से आजादी हुई बल्कि अयोध्या का भी वनवास खत्म हुआ। पांच अगस्त 2020 को पीएम नरेंंद्र मोदी ने जिस दिन राममंदिर की आधारशिला रखी उसी दिन अयोध्या के नवनिर्माण की भी नींव पड़ गई।
नौ नवंबर 2019 से पहले की अयोध्या संतप्त सी नजर आती थी। साल के कुछेक महीनों को छोड़कर सन्नाटा पसरा रहता था। विवाद के चलते अयोध्या आने से देश-दुनिया के लोग कतराते थे।
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रोजी-रोजगार का संकट था, मेलों पर अयोध्या की अर्थव्यवस्था निर्भर थी, लेकिन तब की अयोध्या और अब की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है। आज अयोध्या में श्रद्धालुओं व पर्यटकों का रेला है। रोजगार की भरमार है, सुविधाओं का अंबार है। -प्रस्तुत है तब की अयोध्या व अब की अयोध्या की तस्वीर प्रस्तुत करती एक रिपोर्ट...
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नौ नवंबर 2019 को राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद न सिर्फ रामलला की टेंट से आजादी हुई बल्कि अयोध्या का भी वनवास खत्म हुआ। पांच अगस्त 2020 को पीएम नरेंंद्र मोदी ने जिस दिन राममंदिर की आधारशिला रखी उसी दिन अयोध्या के नवनिर्माण की भी नींव पड़ गई।
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नौ नवंबर 2019 से पहले की अयोध्या संतप्त सी नजर आती थी। साल के कुछेक महीनों को छोड़कर सन्नाटा पसरा रहता था। विवाद के चलते अयोध्या आने से देश-दुनिया के लोग कतराते थे।
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रोजी-रोजगार का संकट था, मेलों पर अयोध्या की अर्थव्यवस्था निर्भर थी, लेकिन तब की अयोध्या और अब की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है। आज अयोध्या में श्रद्धालुओं व पर्यटकों का रेला है। रोजगार की भरमार है, सुविधाओं का अंबार है। -प्रस्तुत है तब की अयोध्या व अब की अयोध्या की तस्वीर प्रस्तुत करती एक रिपोर्ट...
पर्यटन का केंद्र बनी राम की पैड़ी
सरयू तट व अयोध्या की शोभा मानी जाने वाली राम की पैड़ी कभी गंदा नाला बनकर रह गई थी। आज स्थिति बदली है, राम की पैड़ी पर्यटन स्थल के रूप में निखरी है। 450 मीटर लंबी राम की पैड़ी का विस्तार अब 900 मीटर में हो चुके हैं। नए घाट बन गए हैं। हजारों श्रद्धालु यहां पर्यटन का आनंद उठाने आते हैं। राम की पैड़ी का अविरल प्रवाह आकर्षित करता है। रोजाना शाम को लेजर शो के जरिए रामकथा की प्रस्तुति होती है।
संकरी गलियां नहीं अब प्रशस्त मार्ग
रामनगरी में अब संकरी गलियां नहीं हैं, बल्कि फोरलेन मार्ग बन चुके हैं। अयोध्या का मुख्य मार्ग रामपथ के रूप में विकसित हो रहा है। 40 फीट का रास्ता 80 फीट में तब्दील हो चुका है। अयोध्या में प्रवेश करने वाले मुख्य मार्ग को धर्मपथ के रूप में चमकाया जा रहा है। रामकथा का चित्रण रात में जगमगाते सूर्य स्तंभ अयोध्या की महिमा बताते हैं। रामजन्मभूमि जाने के लिए बहुत ही सकरा रास्ता था, आज 100 फीट चौड़ा नया रास्ता रामजन्मभूमि पथ बन गया है। एक साथ एक लाख श्रद्धालु इस मार्ग से रामलला के दर्शन को जा सकते हैं।
अयोध्या बन रही स्मार्ट सिटी
तीन दशक पहले की अयोध्या में गंदगी की भरमार होती थी, श्रद्धालुओं को सुविधाओं की कमी अखरती थी। नागरिक सुविधाओं का अभाव था, आज अयोध्या स्मार्ट सिटी के रूप में तब्दील हो रही है। रामनगरी में सात फ्लाईओवर, पांच मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण हो रहा है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त अयोध्या रेलवे स्टेशन विकसित हो रहा है। एयरपोर्ट भी बन गया है, देश-दुनिया से अयोध्या की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। अब सड़कों पर नालियां नहीं बहतीं, डक्ट बना दिए गए हैं। बिजली के खंभों पर तार नहीं झूलते हैं, पूरी रामनगरी में अंडरग्राउंड केबलिंग की जा चुकी है। 24 घंटे सफाई चलती है, सफाई के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई जाती हैं। अयोध्या में बड़े-बड़े होटल बन रहे हैं।
रामकोट में मुश्किल होता था भीड़ नियंत्रण
कभी रामकोट में भीड़ नियंत्रण मुश्किल होता था। रामकोट में रामजन्मभूमि, कनकभवन, हनुमानगढ़ी समेत अन्य पीठ है, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं। अब रामकोट जाने के लिए चौड़े रास्ते हैं। श्रृंगारहाट से रामजन्मभूमि तक 80 फीट चौड़ी सड़क का विकास भक्तिपथ के रूप में किया गया है। इस पर आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जा चुकी हैं। सोलर पैनल लगाए गए हैं।
नगर निगम बनने के बाद बढ़ी नागरिक सुविधाएं
पहले अयोध्या-फैजाबाद नगर पालिकाएं थीं, इनकी आबादी लगभग दो लाख थी। अब दोनों नगर पालिकाओं को मिलाकर नगर निगम बना दिया गया। नगर निगम का विस्तार करते हुए 41 गांवों को भी समाहित कर दिया गया है। फ्लोटिंग आबादी को मिलाकर अब नगर निगम की आबादी पांच लाख के करीब हो गई। नागरिक सुविधाएं बढ़ गईं। नगर निगम क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछ गया। सीवर लाइन पड़ गई। नगर निगम क्षेत्र को सोलर पैनल से युक्त किया जा चुका है। आधुनिक लाइटों से शहर जगमगाता है।
एक रंग एक स्वरूप में निखरी अयोध्या
अयोध्या में कॉमन बिल्डिंग कोड लागू होने के बाद शहर की सुंदरता बढ़ गई है। विकास प्राधिकरण की इस योजना के तहत अयोध्या की सभी इमारतों का मुखड़ा एक रंग व एक स्वरूप में किए जाने की व्यवस्था है। नयाघाट से सहादतगंज तक रामपथ के दोनों तरफ के भवनों की एक समान डिजाइनिंग भक्तों को आकर्षित करती है। ये सभी भवन एक रंग में रंगे नजर आते हैं। पहले इस मार्ग पर प्राचीन व जर्जर इमारतें थीं, लंबे समय से इनका रंग-राेगन नहीं हुआ था, अब इनका स्थान चमचमाते भवनों ने ले लिया है।
एक रंग में निखर रहे हैं प्राचीन मंदिर
रामनगरी की पौराणिकता के गवाह रामनगरी के प्राचीन मंदिरों का भी सुंदरीकरण कराया जा रहा है। पहले चरण में 37 प्राचीन मंदिरों का चयन किया गया है, जिनका सुंदरीकरण कर यहां सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें से कई ऐसे मंदिर हैं जिनकी पहचान धूमिल हो रही थी, अब इनकी गौरव-गरिमा लौट रही है। इन मंदिरों का फसाड चमकाया जा रहा है। प्राचीनता को सहेजते हुए इन्हें आधुनिक रूप दिया जा रहा है। अगले कुछ महीनों में ये मंदिर धार्मिक महत्ता को बढ़ाते नजर आएंगे।
अस्तित्व खो रहे प्राचीन कुंडों को मिला जीवन
रामनगरी में स्थित रामायण कालीन कुंड भी अब पर्यटन का केंद्र बन चुके हैं। 10 से अधिक कुंडों का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। खर्जुकुंड, अग्निकुंड, गणेश कुंड, हनुमान कुंड आदि का अस्तित्व ही खतरे में थे, इनकी गौरव-गरिमा धूमिल हो रही थी, लेकिन अब ये कुंड आस्था के साथ पर्यटन का केंद्र बन चुके हैं। सूर्यकुंड पर्यटन स्थल बन गया है, यहां रोजाना लेजर शो का आयोजन होता है। गणेश कुंड का भी दर्शन करने भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है।