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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Traders of Lucknow said There is wave of devotion to Lord Ram in state at this time

सबके राम: स्मृतियों का पिटारा खोलते हुए लखनऊ के अनूप अवस्थी बोले- तब अपराध थी रामभक्ति, आज सब राममय

Thu, 11 Jan 2024 08:17 AM IST
आकाश दुबे रोली खन्ना, लखनऊ
रोली खन्ना, लखनऊ Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 11 Jan 2024 08:17 AM IST
सार

अनूप अवस्थी उन स्मृतियों को दिखाने को बेताब दिखे, जिसे उन्होंने बरसों से संदूक में बंद कर रखा था। स्मृतियों का खजाना खुलते ही आंदोलन में उनके साथ संघर्ष करने वाले होटल कारोबारी सुरेंद्र शर्मा भी अतीत में खो जाते हैं।

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Traders of Lucknow said There is wave of devotion to Lord Ram in state at this time
Ayodhya Ram mandir - फोटो : @ShriRamTeerth

विस्तार

सठ सुधरहिं सतसंगति पाई।

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पारस परस कुधात सुहाई।।

मानस की इस चौपाई का वाचन करते हुए लखनऊ के लाटूश रोड स्थित आयुर्वेदिक दवाओं की अपनी दुकान से पुराने से एक थैले से अनूप अवस्थी प्रमाणपत्र निकालकर दिखाते हैं। उनके चेहरे पर एक साथ कई भाव उभर आते हैं। वह कहते हैं, एक वो भी दौर था, जब राम का नाम लेने पर अपराधी बना दिया जाता था। एक दौर ये भी है, जब सब राममय है। यह सब राम की कृपा का नतीजा है।

अनूप अवस्थी उन स्मृतियों को दिखाने को बेताब दिखे, जिसे उन्होंने बरसों से संदूक में बंद कर रखा था। स्मृतियों का खजाना खुलते ही आंदोलन में उनके साथ संघर्ष करने वाले होटल कारोबारी सुरेंद्र शर्मा भी अतीत में खो जाते हैं। पूर्व पार्षद अतुल अवस्थी और चौक निवासी रिद्धि गौड़ भी इस चर्चा में शामिल हो जाते हैं। अनूप अवस्थी कहते हैं, आंदोलन से जुड़ी लखनऊ से पहली टीम हमारी ही थी।

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सुरेंद्र शर्मा बताते हैं 89-90 में जब कारसेवकों का हुजूम अयोध्या पहुंचने लगा तो प्रतिबंध बढ़ने लगे थे। कारसेवकों के लखनऊ में रुकने, उनकी सुरक्षा, खानपान का प्रबंध चारबाग स्थित जैन व शाह गया प्रसाद धर्मशाला में किया जाता था। अतुल अवस्थी बताते हैं कि हम लोग छोटे थे। हाईस्कूल में पढ़ रहे थे, पर गेरुआ रंग बनाकर रात में दीवारों पर अलग-अलग नारे लिखने की जिम्मेदारी हमारी थी।

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पांच कार्ड और जुट गया हुजूम
रिद्धि गौड़ 1988 का एक किस्सा सुनाते हैं। कहते हैं, हम लोगों ने चौपटिया में मंदिर निर्माण के लिए यज्ञ शुरू किया। पांच कार्ड छपे थे और एक बैनर बना था। तभी हुजूम जुट गया। साथ ही फोर्स भी आ गई। हम लोगों ने खुद को बचाते हुए यज्ञ किया। इसके बाद किसी को जोड़ने के लिए बुलाना नहीं पड़ा।

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