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Ramlala Pran Pratishtha: संकल्प पूरा, संघर्ष खत्म... रामलला के आंगन में आंदोलन की साध्वियों का भावुक मिलन

Tue, 23 Jan 2024 04:41 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 23 Jan 2024 04:41 AM IST
सार

1990 के दशक में जब राममंदिर आंदोलन शुरू हुआ, तो महिलाओं को इससे जोड़ने की जिम्मेदारी साध्वियों ने उठाई। अयोध्या करती है आह्वान.. ठाट से कर मंदिर निर्माण, शिला की जगह लगा दे प्राण.. बिठा दो वहां राम भगवान जैसे गीतों के साथ साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती के ओजस्वी भाषण राममंदिर आंदोलन में कारसेवकों में जबरदस्त जोश भरते थे।

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Ramlala Pran Pratishtha Emotional meeting of sadhvis of the movement in the courtyard of Ramlala
गले लगकर रोती हुईं साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती - फोटो : ANI

विस्तार

राममंदिर आंदोलन की नेत्रियों में शामिल साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती और निरंजन ज्योति के बीच सोमवार को रामलला के आंगन में बेहद भावुक मुलाकात हुई। आंसुओं की धाराओं के बीच गले मिलीं। साध्वियों के बहते आंसुओं में राममंदिर के लिए हुए संघर्ष से उपजी वेदना, करोड़ों भारतीयों के आराध्य की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी और संतोष सहज ही व्यक्त हो गए। 

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1990 के दशक में जब राममंदिर आंदोलन शुरू हुआ, तो महिलाओं को इससे जोड़ने की जिम्मेदारी साध्वियों ने उठाई। अयोध्या करती है आह्वान.. ठाट से कर मंदिर निर्माण, शिला की जगह लगा दे प्राण.. बिठा दो वहां राम भगवान जैसे गीतों के साथ साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती के ओजस्वी भाषण राममंदिर आंदोलन में कारसेवकों में जबरदस्त जोश भरते थे। 6 दिसंबर, 1992 को उमा भारती ने कारसेवकों को नारा दिया। एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो। उनके इन नारों को दोहराते हुए कारसेवक विवादित ढांचे को गिराने गुंबदों पर चढ़ गए और इसके बाद की कहानी देश जानता है।
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कहो गर्व से हम हिंदू हैं
साध्वी ऋतंभरा ने नारा दिया, कहो गर्व से हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है। उनका नारा पूरी दुनिया में हिंदू जागरण का मंत्र बन गया। साध्वी ऋतंभरा मंदिर आंदोलन की सबसे चर्चित किरदारों में हैं। उनके भाषणों के ऑडियो कैसेटाें ने घर-घर आंदोलन की अलख जगाई और लोगों को जोड़ा। केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को भी राममंदिर आंदोलन से पहचान मिली। 1992 में साध्वी भी अयोध्या थीं।

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संघर्ष को सहने का साहस राम ने दिया
साध्वी ऋतंभरा ने कहा, भगवान राम ने ही सभी रामभक्तों को इस संघर्ष को सहने की शक्ति और साहस दिया। उन्होंने कहा, राममंदिर का श्रेय स्वयं श्रीराम को जाता है। उन्हीं की प्रेरणा, साहस व शक्ति से सब संभव हुआ। 
साध्वी ऋतंभरा ने कहा, वह खुद को और उन सभी लोगों को भाग्यशाली मानती हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस आंदोलन से जुड़े रहे। राम जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर की खुशी शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। यह ऐसा अनुभव है, जो भावातीत, कल्पनातीत और वर्णन से परे है। 500 वर्ष बाद भारत के आत्मसम्मान व गौरव की स्थापना है। 

संकल्प पूरा, संघर्ष खत्म
1992 के बाद यह संभवतः पहला मौका होगा जब ये साध्वियां एकसाथ अयोध्या में राममंदिर के सामने उपस्थित हुईं। हालांकि, 1992 और 2024 की उपस्थिति में बड़ा फर्क इस बात का है कि तब जो संकल्प लिया, आज वह पूर्ण हुआ। 
विवादित ढांचे को ढहाने के आरोप में सीबीआई ने भाजपा और संघ परिवार के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर और विष्णु हरि डालमिया के साथ ही साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती को भी आरोपी बनाया था। हालांकि, 20 सितंबर, 2020 को विशेष अदालत ने सभी को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। 

खुशी से झूम उठीं साध्वी निरंजन और हेमा मालिनी
समारोह में देशभर से अतिथि पहुंचे। वहीं, मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यहां उनकी भेंट साध्वी निरंजन ज्योति से हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर दोनों अपनी खुशी को जाहिर करने से रोक नहीं पाईं और प्रभु श्रीराम की भक्ति में रमकर नृत्य करनें लगीं।  

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