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Ramlala Pran Pratishtha: क्यों हो रही है रामलला के बालस्वरूप की स्थापना? जानें यहां

Mon, 22 Jan 2024 12:08 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 22 Jan 2024 12:08 PM IST
सार

 रामलला की जिस मूर्ति की स्थापना की जाएगी वह पांच साल की श्याम वर्ण की होगी।  राम लला की मूर्ति 51 इंच की है। 5 साल के बाल स्वरूप में श्रीराम कमल पर विराजमान होंगे। पर क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों 05 साल के उम्र के ही रामलला की मूर्ति स्थापित की जा रही है, और इसकी लंबाई 51 इंच ही क्यों रखी गई है।

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Ramlala Pran Pratishtha ayodhya ram mandir know about idol specialties of ramlala in hindi
प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha: आज अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। आज आखिरकार रामलला अपने बलस्वरूप में मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए जाएंगे।  रामलला की जिस मूर्ति की स्थापना की जाएगी वह पांच साल की श्याम वर्ण की होगी।  राम लला की मूर्ति 51 इंच की है। 5 साल के बाल स्वरूप में श्रीराम कमल पर विराजमान होंगे। पर क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों 05 साल के उम्र के ही रामलला की मूर्ति स्थापित की जा रही है, और इसकी लंबाई 51 इंच ही क्यों रखी गई है। आइए जानते हैं विस्तार से। 

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क्यों हो रही है बाल्यकाल की मूर्ति की स्थापना 
रामलला की जो मूर्ति स्थापित की जा रही है वह बलस्वरूप की है। इनकी उम्र पांच वर्ष की है। हिंदू धर्म में आमतौर पर बाल्यकाल को 05 साल की उम्र तक माना जाता है। इसके बाद बालक को बोधगम्य माना जाता है। पांच साल की उम्र तक बच्चे की हर गलती माफ होती है, क्योंकि वो अबोध होता है। हमारे ग्रंथों में भी पांच साल की उम्र तक भगवान और दिव्य पुरुषों की बाल लीला का अधिक आनंद लिया गया है। भगवान राम की पांच साल की उम्र की मूर्ति स्थापित किए जाने के संबंध में काकभुशुंडी के श्लोक बहुत सामयिक और सटीक लगते हैं
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काकभुशुंडी के अनुसार जब भी वह अयोध्यापुरी जाते हैं उनकी बाल लीला देखकर हर्षित होते हैं। वह कहते हैं कि भगवान की शिशु लीला देखने के लोभ में 05 साल तक वहीं रहते हैं। इसीलिए अयोध्या के राम मंदिर में उनके बाल्य काल की मूर्ति की स्थापना ही उचित है। 
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मूर्ति 51 इंच की ही क्यों
रामलला की मूर्ति की ऊंचाई 51 इंच बहुत सोच समझकर रखी गई है। अमूमन भारत में एक 5 वर्षीय बच्चे की लंबाई 51 इंच के आसपास होती है। साथ ही 51 शुभ अंक माना जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह  में स्थापित होने वाली मूर्ति का आकार 51 इंच का रखा गया है। मूर्ति का निर्माण शालीग्राम पत्थर को तराशकर किया गया है। शालीग्राम एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर है, जो आमतौर पर नदियों की तलहटी में पाया जाता है और दूध आदि डालने से खराब भी नहीं होता।  

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