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Ram Mandir: महाराष्ट्र से लकड़ी, तेलंगाना-कर्नाटक से ग्रेनाइट, मूर्तिकार ओडिशा के, रामकाज में सारा हिन्दुस्तान

Sat, 30 Dec 2023 02:06 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 30 Dec 2023 02:06 PM IST
सार

Ram Mandir: मंदिर को नागर शैली में बनाया जा रहा है। गर्भगृह अष्टकोण में है और इसे इस तरह से बनाया गया है कि हर साल रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें गर्भगृह में विराजमान श्रीराम की मूर्ति पर पड़ेंगी।  

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Ram temple encompasses India: Woods from Maharashtra, granites from south, sculptors from Odisha
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राम की नगरी में राम नाम की गूंज है। रामलला की ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा से पहले राम नगरी में उत्सव सा माहौल है। तैयारियां जोरों पर हैं। नया नवेला एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन, सड़के हों या बस स्टैंड सब संवर रहे हैं और सजाए जा रहे हैं। चौराहों-दीवारों पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पहुंचकर 22 जनवरी के ऐतिहासिक पलों से पहले की झलकियां दे दीं।  
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प्रधानमंत्री ने अयोध्या के नए एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया। साथ ही प्रोटोकॉल तोड़कर यहां के निषाद परिवार से मिलकर उन्हें रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का न्योता भी दिया। मंदिर के उद्घाटन के साथ ही इसमें आम लोग दर्शन के लिए जा सकेंगे। मंदिर बनाते समय इसकी सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। राम मंदिर कैसा बना है? मंदिर की वास्तुकला कैसी है? इसमें किन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है? मंदिर की खूबी क्या है? आइये जानते हैं ...
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Ram temple encompasses India: Woods from Maharashtra, granites from south, sculptors from Odisha
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : Amar Ujala
राम मंदिर कैसा बना है? 
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल हुए। इससे पहले तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान आयोजित किए गए, जिसमें 40 किलोग्राम चांदी की ईंट की स्थापना कर सभी प्रमुख देवताओं को मंदिर में आमंत्रित करने के लिए रामार्चन पूजा की गई। भूमि-पूजन के साथ ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर के पहले चरण का आधिकारिक तौर पर निर्माण शुरू हो गया। 18,000 करोड़ रुपये में बनने वाले राम मंदिर के निर्माण का काम एलएंडटी कंपनी को मिला। 

Ram temple encompasses India: Woods from Maharashtra, granites from south, sculptors from Odisha
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : Amar Ujala
मंदिर की वास्तुकला कैसी है?
राम मंदिर को नागर शैली में बनाया जा रहा है। नागर शैली के भीतर समाहित द्रविड़ वास्तुकला की झलक है। मुख्य मंदिर जहां रामलला की मूर्ति रखी जाएगी, वह उत्तर भारत की नागर शैली में है। वहीं, कोनों पर बने चार मंदिर द्रविड़ वास्तुकला से प्रभावित हैं। इसमें रामेश्वरम, तिरूपति और कांचीपुरम में स्थित प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय मंदिरों के तत्व शामिल हैं।

दरअसल, भारत में मंदिरों की स्थापना की तीन प्रमुख शैलियां हैं जिन्हें नागर, द्रविड़ और वेसर के नाम से जाना जाता है। नागर उत्तर भारतीय मंदिर की वास्तुकला है। यहां एक पत्थर के चबूतरे पर एक पूरा मंदिर बनाया जाता है जिसके ऊपर सीढ़ियां चढ़ती हैं। दक्षिण भारत के विपरीत, इसमें आमतौर पर विस्तृत चारदीवारी या प्रवेश द्वार नहीं होते। प्राचीनतम मंदिरों में केवल एक शिखर था, लेकिन बाद में कई शिखर आए। गर्भगृह हमेशा सबसे ऊंची मीनार के नीचे स्थित होता है।

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : Amar Ujala
वास्तुकला के लिए मशहूर गुजराती परिवार ने बनाया है डिजाइन
राम मंदिर का डिजाइन गुजरात के सोमपुरा परिवार ने तैयार किया है जिसने पहले भी कई बड़े मंदिरों के डिजाइन तैयार किए हैं। इनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर, अक्षरधाम और अंबाजी मंदिर और लंदन का स्वामीनारयाण मंदिर शामिल है। इनकी 15 पीढ़ियां देश विदेश में अब तक 131 से अधिक मंदिर का डिजाइन तैयार कर चुकी हैं। सोमनाथ मंदिर का डिजाइन प्रभाशंकर सोमपुरा ने तैयार किया, जिसके लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। 

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : Amar Ujala
मंदिर की खूबी क्या है?
एक बार पूरा होने पर राम मंदिर दुनियाभर में वास्तुकला के चमत्कारों में से एक होगा। इसके अलावा यह भारत और दुनियाभर में सबसे बड़ा मंदिर भी होगा। राम मंदिर का गर्भगृह और भी खास और अनोखा है। मंदिर का गर्भगृह अष्टकोण में है और इसे इस तरह से बनाया गया है कि हर साल रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें गर्भगृह में विराजमान श्रीराम की मूर्ति पर पड़ेंगी। मंदिर की परिक्रमा गोलाई में बनाई गई है।
इसके भूतल पर पांच मंडप बनाए गए हैं जिनमें गृह मंडप, कीर्तन मंडप, नृत्य मंडप, रंग मंडप और प्रार्थना मंडप शामिल हैं। फिलहाल मंदिर की पहली मंजिल फर्श और प्रवेश द्वार पूरी तरह से तैयार है। जहां भगवान राम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा होगी वह गर्भगृह भी तैयार हो चुका है। दूसरी और तीसरी मंजिल निर्माणाधीन है।
यह कल्पना की गई है कि राम मंदिर एक हजार वर्षों तक भक्ति के प्रमाण के रूप में खड़ा रहेगा। निर्माण के दौरान मंदिर की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है जो बिना किसी नुकसान के 8 तीव्रता के भूकंप को झेलने में सक्षम है।

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : Amar Ujala
मंदिर में किन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है?
इस भव्य मंदिर के निर्माण में अद्वितीय वास्तुशिल्प योजना शामिल है, जिसमें इसके निर्माण के दौरान किसी भी रूप में लोहे के उपयोग को शामिल नहीं किया गया है। मुख्य मंदिर की इमारत राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र के 4.7 लाख घन फीट वजनी गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी है। तख्त 17,000 ग्रेनाइट पत्थरों से बनाए गए हैं जबकि जड़ाई का काम रंगीन और सफेद संगमरमर से किया गया है।

मंदिर के दरवाजे सागौन की लकड़ियों से बनाए गए हैं जो महाराष्ट्र में चंद्रपुर जिले के जंगलों से आती हैं। इमारत में इस्तेमाल किया गया ग्रेनाइट तेलंगाना और कर्नाटक से आया है, जबकि फर्श सामग्री मध्य प्रदेश से ली गई है। जटिल बलुआ पत्थर की नक्काशी ओडिशा के कुशल मूर्तिकारों द्वारा भारत भर की विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करके बनाई गई है।

लकड़ी का काम तमिलनाडु के श्रमिकों के साथ आंध्र प्रदेश स्थित एक कंपनी को सौंपा गया था। पीतल के बर्तन उत्तर प्रदेश से और सोने का काम महाराष्ट्र से मंगाया गया है। 

मंदिर के काम में एलएंडटी ने लगभग 4,000 श्रमिकों को लगाया, जिसमें राजस्थान और मैसूर के कारीगर और पत्थरों को तराशने वाले स्थानीय पत्थर तराशने वाले भी शामिल हैं।
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