Ram Mandir: विहिप अध्यक्ष बोले- कृष्ण जन्मभूमि के लिए सड़कों पर संघर्ष की जरूरत नहीं, अदालत से तय होगा मामला
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विस्तार
अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम चल रहा है। ऐसे महत्त्वपूर्ण समय में हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने राम जन्मभूमि आंदोलन में सबसे प्रमुख भूमिका निभाने वाले संगठन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार से विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की। आलोक कुमार ने कहा कि कृष्ण जन्मभूमि मथुरा को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए सड़कों पर आंदोलन चलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह मामला अदालत में है और राम जन्मभूमि की तरह इस मामले का हल भी अदालतों के माध्यम से ही निकलेगा। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
प्रश्न- आज जब भगवान राम को उनकी जन्मभूमि वापस मिल चुकी है और वे अपने मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं, आप कैसा अनुभव कर रहे हैं?
उत्तर- 500 वर्षों से अधिक समय के संघर्ष के उपरांत जब कोई सफलता मिलती है, तब उसे पाने पर कैसा अनुभव होता है, इसे शब्दों में कह पाना संभव नहीं होता। यह हमारे जीवन काल का सबसे गौरवशाली क्षण है जब इस राष्ट्र की आत्मा और स्वाभिमान के प्रतीक भगवान राम अपने मंदिर में विराजेंगे। इस अवसर पर राष्ट्र का हर वर्ग आनंदित है, लोग अपने-अपने तरीकों से भगवान राम की पूजा-आराधना, भजन-कीर्तन कर रहे हैं। इससे अच्छा और कोई दृश्य नहीं हो सकता। अब देश में 'राम राज्य' आए, सबको रोजी-रोटी और सम्मान प्राप्त हो, यही मेरी कामना है।
प्रश्न- क्या विहिप के इस 'राम राज्य' की संकल्पना में मुस्लिमों को भी अधिकार और सम्मान प्राप्त होगा?
उत्तर- राम राज्य की संकल्पना तब तक पूरी नहीं हो सकती जब तक कि उसमें समाज के हर वर्ग का सम्मान और अधिकार सुनिश्चित न हो जाए। इसमें मुसलमानों के साथ-साथ देश का हर वर्ग, हर नागरिक शामिल है। दो दिन पूर्व ही कश्मीर से मुसलमानों का एक दल मेरे पास दो किलो केसर लेकर आया। उनकी इच्छा थी कि भगवान राम के प्रसाद में उनका केसर भी शामिल किया जाए। इसे देखकर आप समझ सकते हैं कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग भी आज यह मानता है कि भगवान राम उनके भी पूर्वज हैं। उसे भी उनका सम्मान करना चाहिए। यही सोच भारत को एक सुदृढ़ और सुरक्षित राष्ट्र के रूप में स्थापित कर सकती है। यदि विदेशी हमलावरों को कुछ लोग अपना आदर्श न मानें तो विवाद का कहीं कोई कारण नहीं है।
प्रश्न- राम मंदिर बनने के बाद विहिप की स्थापना का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरा हो चुका है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते अब आपके सामने क्या लक्ष्य हैं?
उत्तर- राम मंदिर बनने के साथ राम मंदिर आंदोलन की यात्रा संपन्न हो गई है। अब इससे आगे 'राम राज्य' की यात्रा तय होनी है। विहिप इस बात का पूरा प्रयत्न करेगी कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और ज्यादा समृद्ध हो। हमारा परिवार, समाज और राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक मजबूती को बनाए रखते हुए आगे विकास करे, यही हमारा लक्ष्य होगा।
प्रश्न- क्या विहिप कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन को लेकर संघर्ष नहीं करेगी?
उत्तर- मथुरा और काशी दोनों हमारे पूज्य तीर्थ हैं। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि भी जल्द से जल्द हिंदू पक्ष को मिले, यह मेरी कामना है। लेकिन वहां के विवाद अदालत में हैं और बेहद महत्वपूर्ण स्टेज में हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि मथुरा-काशी के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं है। हमें अपनी अदालतों पर पूरा भरोसा है। जल्द न्याय होगा और ये दोनों तीर्थ भी पूरे शांतिपूर्ण माहौल में हिंदुओं को मिलेंगे।
प्रश्न- मंदिर के उद्घाटन के मुहूर्त और सरकार के राजनीतिक इरादों को लेकर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। ऐसा करने वालों में शंकराचार्य तक शामिल हैं। आप क्या कहेंगे?
उत्तर- कई शंकराचार्यों ने अपने बयान जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे मंदिर के उद्घाटन के विरोध में नहीं हैं। यह दुष्प्रचार अब समाप्त हो जाना चाहिए। केवल एक शंकराचार्य अपना विरोध जता रहे हैं।
प्रश्न- क्या आप यह मानते हैं कि राम मंदिर निर्माण के साथ ही देश की राजनीति बदल गई है? 2024 के लोकसभा चुनाव पर राम मंदिर मुद्दे का क्या असर हो सकता है?
उत्तर- मैं यह तो नहीं कह सकता कि राम मंदिर के कारण देश की राजनीति कितनी बदल गई, लेकिन एक बात अवश्य कह सकता हूं कि अब बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं की उपेक्षा कर देश में राजनीति करना संभव नहीं है। कल तक जो राजनीतिक दल अयोध्या में राम मंदिर की जगह अस्पताल-कॉलेज खोलने की बात करते थे, आज वे भी अयोध्या जाने की बात कर रहे हैं। इसका अर्थ है कि उन्हें भी अब यह बात समझ में आ गई है। इसका राजनीतिक असर कितना होगा, यह मैं नहीं बता सकता। लेकिन एक बात अवश्य कह सकता हूं कि हर हिंदू राम मंदिर के निर्माण से गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
प्रश्न- कांग्रेस ने राम मंदिर के मुद्दे पर बहुत स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। क्या कहेंगे?
उत्तर- कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव के समय जनेऊ धारण कर मंदिरों में भटकते दिखाई देते हैं, लेकिन राम मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर अयोध्या जाने के सवाल को टाल जाते हैं। प्रेस कांफ्रेंस में जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि राम मंदिर के उद्घाटन के दिन 22 जनवरी को वे जहां होंगे, वहां किसी मंदिर में जाएंगे या नहीं, इस प्रश्न का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अगले प्रश्न पर उन्होंने यह भी नहीं बताया कि जब वे अपनी यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश में होंगे तब वे अयोध्या जाएंगे। कांग्रेस नेहरू की नीति पर चल रही है। उसे अपनी सोच का परिणाम भुगतना पड़ रहा है। यदि इसके बाद भी वह नहीं समझ रहे हैं तो कोई क्या कर सकता है। जनता देख रही है। वही इसका सही उत्तर देगी।
प्रश्न- क्या राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख 22 जनवरी को हर वर्ष दीपावली की तरह एक त्योहार की तरह मनाए जाने की कोई योजना है?
उत्तर- आज राम मंदिर का कार्यक्रम एक उत्सव बन गया है। यह उत्सव विहिप ने नहीं, बल्कि देश की जनता ने बनाया है। यदि जनता चाहेगी, तो इसे हर वर्ष के एक त्योहार की तरह मनाया जाएगा। लेकिन अभी इस तरह का कोई विचार नहीं है। बाद में परिस्थितियों को देखते हुए इस पर निर्णय लिया जाएगा।