Ram Mandir: राम मंदिर आंदोलन में बलिदान हुए कोठारी बंधुओं की बहन बोली- भाइयों की आत्मा को संतुष्टि मिल गई होगी
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विस्तार
राम मंदिर आंदोलन में कोलकाता के कोठारी बंधुओं ने सबसे पहले अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आंदोलन को दबाने में जुटी तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया था और उन गोलियों के सबसे पहले शिकार बने थे- शरद कोठारी और राम कुमार कोठारी। दो नवंबर 1990 को घटी इस घटना के ठीक एक सप्ताह बाद उनकी बहन पूर्णिमा कोठारी का विवाह होना तय था।
लेकिन जब आरएसएस-विश्व हिंदू परिषद ने हर घर से एक युवा के राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने की अपील की, तो जल्द वापस आने की बात कहकर दोनों भाई आंदोलन में भाग लेने घर से निकल पड़े थे। लेकिन वे फिर कभी नहीं आए। केवल उनकी मौत का समाचार आया। पास पड़ोस के लोगों ने उनके पिता को बताया था कि कोठारी बंधुओं को सरकार की गोलियों का शिकार बन जाना पड़ा था। जब उन्होंने यह समाचार सुना तो उन पर वज्रपात हो गया।
पूर्णिमा कोठारी ने अमर उजाला से कहा कि भाइयों की मौत के बाद उन्होंने विवाह करने से इनकार कर दिया था। उसके बाद उन्होंने करीब दस वर्ष बाद 2000 में विवाह किया। पास पड़ोस के लोगों ने उनके पिता से कहा था कि यदि कोठारी परिवार के पास और बेटे होते, तो वे परिवार की जिम्मेदारी संभाल लेते। लेकिन उनके पिता ने कहा था कि यदि उनके पास और भी बेटे होते, तो वे उन्हें भी रामकाज में वीरगति पाने के लिए भेज देते।
भाइयों को याद करते हुए पूर्णिमा कोठारी आज भी रो पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि राम के जिस काम के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया था, आज वह सार्थक हो गया। अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन चुका है और उसका उद्घाटन होने जा रहा है। आज उनके भाइयों का बलिदान सार्थक हो गया। वे स्वर्ग से भगवान राम का मंदिर बनते देख रहे होंगे। इससे उनकी आत्मा को संतुष्टि मिल गई होगी।
इस बलिदान को याद रखें
पूर्णिमा कोठारी ने कहा कि राम मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर वे देशवासियों को यही कहना चाहती हैं कि वे उन बलिदानियों को न भूलें, जिन्होंने अपना सर्वस्व देकर देश को यह दिन देखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम ऐसे कार्य करें जिससे देश की यह सांस्कृतिक विरासत बनी रहे और लगातार आगे बढ़ती रहे। उन्होंने राम मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं दीं।