Ram Mandir Shubh Muhurat: 22 जनवरी ही शुभ मुहूर्त क्यों? तिथि बताने वाले ज्योतिषी ने ही दिया जवाब
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विस्तार
सोमवार 22 जनवरी को आज भगवान राम के नए विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। रामलला अब नए राम मंदिर में नए अवतार में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। 22 जनवरी को ही प्राण प्रतिष्ठा की तिथि क्यों चुनी गई, इसका जवाब स्वयं तिथि निकालने वाले काशी के विद्वान गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने दिया है। एक प्रश्नकर्ता के जवाब में उन्होंने बताया है कि 22 जनवरी की तिथि प्राण प्रतिष्ठा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त क्यों है।
क्या प्रश्न पूछा था?
महाराष्ट्र के पुणे जिले के बीएल मस्के ने गणेश्वरशास्त्री द्राविड को एक पत्र लिखते हुए पूछा था कि 22 जनवरी 2024 पौष शुक्ल 12 सोमवार को मेषलग्न में वृश्चिक नवांश के अभिजित मुहूर्त में अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थान पर राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। इस मुहूर्त को लेकर कुछ प्रश्न किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि वे बताएं कि यह तिथि उन्होंने क्यों चुनी? यह प्रश्न उन्होंने इसी माह 11 जनवरी को पूछा था।
प्रश्न का जवाब
काशी के विद्वान गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने इस प्रश्न को बहुत हर्ष के साथ स्वीकार किया। उन्होंने उनका अभिवादन करते हुए बताया कि 22 जनवरी का मुहूर्त सबसे शुभ क्यों है? गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने अपने उत्तर में कहा है कि किसी देवमंदिर की प्रतिष्ठा दो प्रकार से होती है- पहला मंदिर के संपूर्ण रूप से बन जाने पर, और दूसरा मंदिर में कुछ कार्य शेष रहने पर।
उन्होंने बताया है कि जहां पर संपूर्ण मंदिर बन जाने पर देवप्रतिष्ठा होती है, वहां गर्भगृह में देवप्रतिष्ठा होने पर मंदिर के ऊपर कलश प्रतिष्ठा किसी संन्यासी के द्वारा की जाती है। कलशप्रतिष्ठा गृहस्थ के द्वारा नहीं होती। गृहस्थ के द्वारा कलशप्रतिष्ठा होने पर वंशक्षय होता है। मंदिर का पूर्ण निर्माण हो जाने पर देवप्रतिष्ठा के साथ मंदिर के ऊपर कलश प्रतिष्ठा होती है। लेकिन जहां पर मंदिर पूर्ण नहीं बना रहता, वहां देवप्रतिष्ठा के बाद मंदिर का पूर्ण निर्माण हो जाने पर किसी शुभ मुहूर्त में मंदिर के ऊपर कलश प्रतिष्ठा करने की परंपरा है। शास्त्रों में यही विधि लिखी हुई है।
शुभ मुहूर्त के संदर्भ में अपनी बात को प्रमाणित करते हुए गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने लिखा है कि वैदिक मामलों के जानकार अण्णाशास्त्री वारे द्वारा निर्मित 'कर्मकाण्ड प्रदीप' ग्रंथ में पत्र संख्या 338 में ''इति व्रतोद्यापन-वद्द्व्यहःसाध्यः सर्वदेवप्रतिष्ठाप्रयोगः समाप्तः" के बाद "अथ कलशारोपणविधिः" से आरम्भ कर "इति प्रतिष्ठासारदीपिकोक्त: कलशारोपणविधिः" तक स्वतन्त्र रूप से कलशारोपणविधि दी गयी है।
उन्होंने कहा है कि पाञ्चरात्रागम में ईश्वरसंहिता का अग्रिमवचन भी उक्त व्यवस्था के विरुद्ध नहीं है। इसके समर्थन में उन्होंने कहा है कि शास्त्रों में यह वचन इस प्रकार है-
"प्रासादाङ्गेषु विप्रेन्द्राः! क्रमान्निगहितेषु च। देवताधारभूतेषु यद्यदऊंग् न कल्पितम्॥
यत्र वा तत्तदधिकं तत्रापि च समाचरेत्। तत्तत्स्थाने तु बुद्ध्या तु देवतान्यासमूहतः॥"
(ईश्वरसंहिता अध्याय 3 श्लोक 165-166 पृष्ठ 32)
उनके अनुसार, बृहन्नारदीयपुराण में कहा गया है कि-
"अकृत्वा वास्तुपूजां यः प्रविशेन्नवमन्दिरम्। रोगान् नानाविधान् केशानश्नुते सर्वसङ्कटम्॥
अकपाटमनाच्छन्नमदत्तबलिभोजनम्। गृहं न प्रविशेदेवं विपदामाकरं हि तत्॥"
(बृहन्नारदीय पुराण, पूर्वखण्ड, अध्याय 56 श्लोक 618-619, पत्र 116)
इसके अनुसार मंदिर में जब तक द्वार नहीं बनता, और मंदिर पर जब तक आच्छादन नहीं होता अर्थात् मंदिर जबतक नहीं ढका जाता, और वहां वास्तुशांति जबतक नहीं होती, और उसमें देवताओं को यथायोग्य माषभक्त बलि एवं पायसबलि नहीं दी जाती, और वास्तुशांति का अङ्गभूत ब्राह्मणभोजन जब तक नहीं होता, तब तक मन्दिर में देवप्रतिष्ठा नहीं हो सकती।
यह व्यवस्था बना प्राण प्रतिष्ठा का कारण
गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने लिखा है कि लोकव्यवहार में एक मंजिल बनने पर भी वास्तु शांति करके लोग गृहप्रवेश करते हैं। बाद में गृह का ऊपरी भाग बनता है। अत: पूर्ण भवन बनने पर ही वास्तु प्रवेश होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। चूंकि अयोध्या का राम मंदिर देवगृह है, अतः उसमें उक्त नियम लागू हो सकता है।
अयोध्या के राममंदिर में प्रतिष्ठा के पूर्व वास्तुशांति, प्रस्तुत बलिदान एवं ब्राह्मण भोजन होने वाला है। मन्दिर के दरवाजे लग गए हैं। गर्भगृह पूर्ण रूप से शिलाओं द्वारा ढका गया है। अत: उसमें रामप्रतिष्ठा करने में कोई दोष नहीं है। मन्दिर का काम पूर्ण होने पर कर्मकाण्ड प्रदीप में उद्धृत प्रतिष्ठासार दीपिकोक्त कलशारोपणविधि के अनुसार कलशारोपण किया जा सकता है।
अन्य मुहूर्त क्यों नहीं
गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने कहा है कि 22 जनवरी 2024 पौष शुक्ल द्वादशी सोमवार मृगशीर्ष नक्षत्र के दिन सर्वोत्तम मुहूर्त है, इसी कारण प्राण प्रतिष्ठा के लिए चयन किया गया है। उनके अनुसार इसके अलावा कई धार्मिक-ज्योतिषीय कारणों से दूसरा मुहूर्त नहीं बन रहा था जिसके कारण सब बातों का विचार करके 22 जनवरी 2024 का राम प्रतिष्ठा मुहूर्त दिया गया।
गणेश्वरशास्त्री द्राविड ने कहा है कि इसके पूर्व में आनन-फानन में जो मुहूर्त लोगों ने दिया, उसमें कुछ कमी थी। इसी कारण मंदिर तोड़े गये। इसलिए सभी बातों को ध्यान में रखकर 22 जनवरी 2024 को प्रतिष्ठा का मुहूर्त दिया गया है। इसमें लग्नस्थ गुरु की दृष्टि पश्चम, सप्तम एवं नवम पर होने से मुहूर्त उत्तम है। मकर का सूर्य हो जाने से पौषमास का वर्ज्यत्व (दोष) समाप्त हो जाता है।