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Ram Mandir: कारसेवा में गए शिक्षा मंत्री ने बाल्टी में पका कर खाए थे चावल, पुलिसकर्मी ने बाजू पर मारी थी लाठी

Fri, 12 Jan 2024 08:14 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Fri, 12 Jan 2024 08:14 PM IST
सार

सरयू नदी के पास पुलिसकर्मी ने हरियाणा के वर्तमान शिक्षा मंत्री की बाजू पर लाठी मारी थी। मंत्री कंवरपाल तब 30 साल की उम्र में दुकान चलाते थे। 

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Ram Mandir: Education Minister, who went to KarSeva, ate rice cooked in a bucket
शिक्षा मंत्री कंवरपाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अयोध्या में राम मंदिर के लिए वर्ष 1990 में हुए आंदोलन में तब हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने भी हिस्सा लिया था। तब कंवरपाल भाजपा से नहीं जुड़े थे और एक छोटे से दुकानदार थे। साध्वी ऋतंभरा का भाषण सुनकर उनका मन बदल गया और कारसेवक के रूप में अयोध्या पहुंच गए।

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तब कंवरपाल को पुलिस की लाठी भी लगी थी। इतना ही नहीं अपने साथियों के साथ वह एक पशुबाड़े भी ठहरे थे। यहीं पर उन्होंने उस बाल्टी में चावल बनाकर खाए थे जिसमें भैंसों को पानी पिलाते थे। आज श्रीराम का भव्य मंदिर बनने और उसमें जल्द राम लला के विराजमान होने पर कंवरपाल बहुत खुश हैं। मंत्री कंवरपाल ने अयोध्या जाने की यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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मंत्री कंवरपाल ने बताया कि वर्ष 1987-88 में राम जन्मभूमि का आंदोलन जोर पर था। तब मेरी उम्र 30 साल थी। मैं अपनी दुकान चलाता था। राम जन्मभूमि आंदोलन से मेरा पड़ोसी महीपाल जुड़ा हुआ था। उसी दौरान साध्वी ऋतंभरा जगाधरी में आईं थी। उनका भाषण सुनकर मैं इतना प्रभावित हुआ। तब अयोध्या जाने के लिए फार्म भरकर वह अंबाला पहुंचे।
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60 से 80 किलोमीटर का पैदल किया था सफर
अंबाला में 51 सदस्यों की एक वाहिनी बनाई गई। कानपुर में ट्रेन से ज्यादातर लोग गिरफ्तार कर लिए गए। लेकिन हम 16 लोग पुलिस से बच कर निकल गए। अगले दिन दोबारा ट्रेन में बैठे। एक बार फिर पुलिस ने ट्रेन रोक सभी कारसेवकों को नीचे उतार दिया। लेकिन जब ट्रेन चली तो हम दौड़ कर उसमें चढ़ गए। परंतु हमारे पांच साथियों को पुलिस ने पकड़ लिया।

रास्ते में मनका-मनकी जगह पर कारसेवकों ने चेन खींच कर ट्रेन रोक दी। वहां से करीब 60 से 80 किलोमीटर सफर सभी ने पैदल ही किया। तब हर जगह पुलिस की बहुत सख्ती थी। रास्ते में ग्रामीणों ने हमें भोजन कराया। सरयू नदी पर पहुंच कर मैंने उसके रेत को छुआ तो बहुत भावुक हो गया। तभी पुलिस ने हमें घेर कर लाठी चार्ज कर दिया। एक लाठी मेरी कोहनी पर भी लगी। जिसमें कई दिन तक दर्द रहा।

पशु बाड़े में काटी थी रात
कंवरपाल ने बताया कि वह अयोध्या से करीब पांच किलोमीटर पहले एक पशु बाड़े में रात को रूके। उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था। तब उनमें एक कारसेवक ऐसा था जिसकी दाड़ी बड़ी थी। पकड़े जाने के डर से उसने अपना पहनावा कुछ ऐसा बना लिया जैसे स्थानीय निवासी हों। वह कहीं से चावल लेकर आया। उन्होंने नमक डाल कर चावल उस बाल्टी में बनाए थे जिसमें भैंसाें को पानी पिलाते थे। तड़के साढ़े चार बजे वह उस पुल पर पहुंचे जहां से अयोध्या जाते थे। पुल के पास पुलिस ने लोगों को रोक कर लाठीचार्ज कर दिया। उसी दौरान ही कोठारी बंधुओं को गोली मारने की सूचना मिली थी। वरिष्ठ नेताओं की बातचीत के बाद कारसेवकों को अंदर जाने की इजाजत मिल गई। वहां दर्शन करने के बाद पुलिस ने उन्हें ट्रेन में बिठाकर वापस लौटा दिया।


ईंटे निकालने से गिरा था तीसरा गुंबद
कंवरपाल ने बताया कि जब लोग विवादित ढांचे पर चढ़े थे तब वह उनसे मात्र पांच फीट की दूरी पर खड़े थे। वह घटना उन्होंने अपनी आंखों से देखी। लोग रूकने वाले नहीं थे और विवादित ढांचे को तोड़ना शुरू कर दिया। दो गुंबद टूट चुके थे। तीसरे गुंबद के नीचे से कारसेवकों ने ईंटे निकालनी शुरू कर दी। देखते ही देखते गुंबद नीचे गिर गया। इससे कई कारसेवकों को चोट भी लगी थी। इसके बाद 1992 में वह दोबारा प्रतीकात्मक कारसेवा के लिए भी गए थे। आज मंदिर निर्माण हो रहा है तो वह बहुत खुश हैं। 22 जनवरी के बाद मंदिर में राम लला के दर्शन करने जरूर जाएंगे।

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