Ram Mandir: राम मंदिर के संघर्ष का पाठ हिंदी और गुजराती में पढ़ेंगे छात्र, 1,100 रुपये के कोर्स का ये है सिलेबस
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विस्तार
अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। इस बीच देश में पहली बार सूरत की वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी राम मंदिर के 500 साल के संघर्ष का इतिहास पढ़ाने जा रही है। यह कोर्स महज 30 घंटे का सर्टिफिकेट कोर्स होगा। इसे ऑफलाइन पढ़ाया जाएगा। गुजराती और हिंदी माध्यम में पढ़ाए जाने वाले इस कोर्स में बाबरी मस्जिद के विवादित हिस्से से लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी शामिल किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज इस पाठ्यक्रम के प्रस्ताव को एकेडमिक काउंसिल के पास रखेगी। इसके बाद इस कोर्स पर निर्णय लिया जाएगा। इस निर्णय के बाद कोर्स को एक माह के भीतर शुरू करने की संभावना है। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विवि के सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज के संयोजक बालाजी राजे ने बताया कि देश में पहली बार वीर नर्मद विवि राम जन्मभूमि के इतिहास पर प्रमाण पत्र कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। आज कई छात्रों को राम मंदिर के इतिहास के बारे में कई भ्रम है, जो इस कोर्स से दूर हो जाएगा।
दो यूनिटों में ये विषय पढ़ाया जाएगा
यूनिट वन
- इतिहास अध्ययन, प्रलेखन का महत्व और पद्धति
- रामायण का भारतीय समाज पर प्रभाव
- अयोध्या का एतिहासिक परिप्रेक्ष्य
- आक्रमण काल, उद्देश्य और पद्धति, राम मंदिर पर आक्रमण और विध्वंस
यूनिट टू
- राम मंदिर के लिए संघर्ष 1528 से 1858 तक
- मंदिर के लिए जागरुकता अभियान
- कानूनी राजनीतिक संघर्ष
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
- एतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मंदिर का जीर्णोद्धार
विश्वविद्यालय ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए इस कोर्स को डिजाइन किया है। इसे एक माह में 15 दिन तक पढ़ाया जाएगा। इस कोर्स की फीस 1,100 रुपये है। 12 वर्ष के अधिक उम्र के छात्र और जिन्होंने पढ़ाई नहीं की है, वे भी इस कोर्स को कर सकते हैं। यहीं नहीं विश्वविद्यालय के छात्र इस कोर्स को करते हैं, तो उन्हें दो अकादमिक अंक मिलेंगे। इस कोर्स को पीएम द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति से मंजूरी मिली है।
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति किशोर सिंह चावड़ा ने कहा कि हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में एक सर्टिफिकेट कोर्स डिजाइन किया था, जो 30 घंटे की अवधि का है और शुल्क 1,100 रुपये है और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रधानमंत्री द्वारा अनुमोदित किया गया है। हम पूरे भारत में सबसे पहले दस हजार साल पुरानी भारतीय सभ्यता, राम जन्मभूमि के इतिहास पर यह पूर्ण प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित करने जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी से 1.40 करोड़ लोग जुड़े हैं, हम उन्हें टारगेट करेंगे। सभी को इसके बारे में बताएंगे और सबको इसकी जानकारी देंगे।