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रामलला प्राण प्रतिष्ठा: PM मोदी ने शुरू किया 11 दिन का खास अनुष्ठान, ऑडियो संदेश में मां को याद कर कही यह बात

Fri, 12 Jan 2024 09:20 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 12 Jan 2024 09:20 AM IST
सार

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'आप भी मेरी स्थिति समझ सकते हैं। जिस सपने को अनेकों पीढ़ियों ने वर्षों तक अपने हृदय में एक संकल्प की तरह अपने हृदय में जिया, मुझे उसकी सिद्धी के समय उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है। प्रभू ने मुझे सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है।' 

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Ayodhya Ram Mandir From Dry Day to Live Telecast at Times Square Know Preparations for Prana Pratishtha
PM Modi - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक ऑडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, 'अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में केवल 11 दिन ही बचे हैं। मेरा सौभाग्य है कि मैं भी इस पुण्य अवसर का साक्षी बनूंगा। प्रभु ने मुझे प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है। इसे ध्यान में रखते हुए मैं आज से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान आरंभ कर रहा हूं। मैं आप सभी जनता-जनार्दन से आशीर्वाद का आकांक्षी हूं। इस समय, अपनी भावनाओं को शब्दों में कह पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन मैंने अपनी तरफ से एक प्रयास किया है।

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वीडियो की शुरुआत पीएम मोदी ने 'सियावर रामचंद्र की जय' और 'राम-राम' के साथ की। उन्होंने कहा, 'जीवन के कुछ क्षण ईश्वरीय आशीर्वाद की वजह से ही यथार्थ में बदलते हैं। आज हम सभी भारतीयों के लिए, दुनियाभर में फैले रामभक्तों के लिए ऐसा ही पवित्र अवसर है। हर तरफ प्रभु श्रीराम की भक्ति का अद्भुत वातावरण है। चारों दिशाओं में राम नाम की धूम है। राम भजनों की अद्भुत सौंदर्य माधुरी है। हर किसी को इंतजार है 22 जनवरी का। उस ऐतिहासिक पवित्र पल का।' 
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उन्होंने कहा, 'अब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में केवल 11 दिन ही बचे हैं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी इस पुण्य अवसर का साक्षी बनने का अवसर मिल रहा है। यह मेरे लिए कल्पनातीत अनुभूतियों का समय है। मैं भवुक हूं। भाव विह्वल हूं। मैं पहली बार जीवन में इस तरह के मनोभाव से गुजर रहा हूं। मैं एक अलग ही भाव भक्ति का अनुभव कर रहा हूं। मेरे अतर्मन की यह भाव यात्रा, मेरे लिए अभिव्यक्ति नहीं अनुभूति का अवसर है। चाहे हुए भी मैं इसकी गहनता, तीव्रता और व्यापकता को शब्दों में बांध नहीं पा रहा हूं।' 
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पीएम मोदी ने आगे कहा, 'आप भी मेरी स्थिति समझ सकते हैं। जिस सपने को अनेकों पीढ़ियों ने वर्षों तक अपने हृदय में एक संकल्प की तरह अपने हृदय में जिया, मुझे उसकी सिद्धी के समय उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है। प्रभू ने मुझे सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है।' 

उन्होंने कहा, 'यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। जैसा हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, हमें ईश्वर के यज्ञ, आराधना के लिए स्वयं में भी दैवीय चेतना जागृत करनी होती है। इसके लिए शास्त्रों में व्रत और कठोर नियम बताए गए हैं, जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा से पहले पालन करना होता है। इसलिए आध्यात्मिक यात्रा की कुछ तपस्वी आत्माओं और महापुरुषों से मुझे जो मार्गदर्शन मिला, उन्होंने जो यम नियम सुझाए हैं, उसके अनुसार मैं आज से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान आरंभ कर रहा हूं। इस पवित्र अवसर पर मैं परमात्मा के श्रीचरणों में प्रार्थना करता हूं। ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों का पुध्यस्मरण करता हूं। जनता-जर्नादन, जो ईवर का रूप है, उनसे प्रार्थना करता हूं कि आप मुझे आशीर्वाद दें ताकि मन से, वचन से, कर्म से, मेरी तरफ से कोई कमी न रहे।'

पीएम मोदी ने कहा, 'मेराये सौभाग्य है कि 11 दिन के अपने अनुष्ठान का आरंभ मैं नासिक धाम-पंचवटी से कर रहा हूं। पंचवटी, वो पावन धरा है, जहां प्रभू श्रीराम ने काफी समय बिताया था और आज मेरे लिए एक सुखद संयोग यह भी है कि आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती है। ये स्वामी विवेकानंद ही तो थेख् जिन्होंने हजारों वर्षों से आक्रांतित भारत की आत्मा को झकझोरा था। आज वही आत्मविश्वास भव्य राम मंदिर के रूप में हमारी पहचान बनकर सबके सामने हैं।'

उन्होंने कहा, 'सोने पर सुहागा देखिए, आज माता जीजाबाई की भी जन्म जयंती है। माता जीजा बाई, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में एक महामानव को जन्म दिया था। आज हम अपने भारत को जिस अक्षुंड रूप में देख रहे हैं, इसमें माजा जीजाबाई का बहुत बड़ा योगदान है और साथियों जब मैं माता जीजाबाई का पुण्य स्मरण कर रहा हूं तो सहज रूप से मुझे अपनी मां की याद आना स्वाभाविक है। मेरी मां जीवन के अंत तक माला जपते हुए सीताराम का नाम भजा करती थी।'

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'प्राण प्रतिष्ठा की मंगल घड़ी चराचर श्रृष्टि का वह चैतन्य पल आध्यात्मिक अनुभूति का वह अवसर गर्भगृह  उस पल क्या कुछ नहीं होगा। शरीर के रूप में मैं तो उस पवित्र पल का साक्षी बनूंगा ही, लेकिन मेरे मन में, मेरे हृदय के हर स्पंदन में 140 करोड़ भारतीय मेरे साथ होंगे। आप मेरे साथ होंगे, हर रामभक्त मेरे साथ होगा और वो चैतन्य पल हम सबकी साझी अनुभूति होगी। मैं अपने साथ राम मंदिर के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले अनगिनत व्यक्तित्वों की प्रेरणा लेकर जाऊंगा। त्याग, तपस्या की वो मूर्तियां, 500 साल का वो धैर्य, दीर्घ धैर्य का वो काल, अनगिनत त्याग और तपस्या की घटनाएं, दानियों की... बलिदानियों की... गाथाएं... कितने ह लोग हैं, जिनके नाम तक कोई नहीं जानता, लेकिन जिनकेजीवन का एकमात्र ध्येय रहा है, भव्य राम मंदिर का निर्माण। ऐसे असंख्य लोगों की स्मृतियां मेरे साथ होंगी।'

उन्होंने कहा, 'जब 140 करोड़ देशवासी, उस पल में मन से मेरे साथ जुड़ जाएंगेऔर जब मैं आपकी ऊर्जा को साथ लेकर गर्भगृह में प्रवेश करूंगा तो मुझे भी एहसास होगा कि मैं अकेला नहीं, आप सब मेरे साथ हैं। ये 11 दिन व्यक्तिगत रूप से मेरे यम नियम तो है ही, लेकिन मेरे भाव विश्व में आप सब समाहित है। मेरी प्रार्थना है कि आप भी मन से मेरे साथ जुड़े रहें। रामलला के चरणों में मैं आप के भावों को भी उसी भाव से अर्पित करूंगा जो भाव मेरे भीतर उमड़ रहे हैं।'


पीएम मोदी ने कहा, 'हम सब इस सत्य को जानते हैं कि ईश्वर निराकार है,लेकिन ईश्वर साकार रूप में भी हमारी आध्यात्मिक यात्रा को बल देते हैं। जनतर-जनार्दन में ईश्वर का रूप होता है। यह मैंने साक्षात देखा है, महसूस किया है, लेकिन जब ईश्वर रूपी वही जनता शब्दों में अपनी भावनाएं प्रकट करती है, आशीर्वाद देती है तो मुझमें भी नई ऊर्जा का संचार होता है। आज मुझे आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है, इसलिए मेरी प्रार्थना है कि शब्दों में, लिखित में अपनी भावनाएं जरूर प्रकट करें, मुझे अशीर्वाद जरूर दें। आपके आशीर्वाद का एक-एक शब्द मेरे लिए शब्द नहीं, मंत्र है। मंत्र की शक्ति के तौर पर वह अवश्य काम करेगा। आप अपने शब्दों को, अपने भावों को नमो एप के माध्यम से सीधे मुझ तक पहुंचा सकते हैं। आइए, हम सब प्रभू श्रीराम की भक्ति में डूब जाएं। इसी भाव के साथ आप सभी रामभक्तों को कोटि कोटि नमन। जय सियाराम, जय सियाराम, जय सियाराम।'
 

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