लोकगायिका शारदा सिन्हा बोलीं : मिथिला ने जमाई की तरह जिया है राम को...उनसे वहीं की नारी कुटवा सकती है धान
यह सौभाग्य तो केवल मिथिला की नारी को ही मिला है। मैं भी मिथिला की नारी हूं और भगवान राम को हमने जमाई की तरह जिया है। यहां की हर बेटी सियाजी हैं।
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हमारे अलावा किसकी हिमाकत है जो रामजी से धान कुटवा दे। यह सौभाग्य तो केवल मिथिला की नारी को ही मिला है। मैं भी मिथिला की नारी हूं और भगवान राम को हमने जमाई की तरह जिया है। यहां की हर बेटी सियाजी हैं। रामजी तो मिथिला के पाहुन (दामाद) हैं तो अवध में वह दशरथ नंदन श्रीराम हैं। यह कहते हुए लोकगायिका शारदा सिन्हा के की आवाज में मिथिलांचल के भाव और उल्लास को आसानी से महसूस किया जा सकता है।
शारदा सिन्हा अमर उजाला से बातचीत के दौरान मिथिला और अवध के राम के सवाल पर मुस्कुराते हुए कहती हैं कि अवध तो रामजी का जन्मस्थान और कर्मस्थान है। मिथिला उनकी ससुराल है। ससुराल में उनके रूप और कोमलता का वर्णन मिलता है। शरीर सौष्ठव का वर्णन मिलता है। मिथिला में बहुत जांच परख कर विवाह किया जाता है। विवाह के दौरान एक रस्म है, जिसे ओठंगर बोलते हैं। रामजी जब विवाह करने के लिए पहुंचे तो मिथिला की नारियां कहती हैं कि होंगे आप नृपकुल के, उससे हम नहीं समझेंगे। हम समझेंगे ओखरी मूसल से कि आप धान कूट पाएंगे कि नहीं। आप होंगे अपने अवध के राजा, आपको यहां कूटना पड़ेगा धान। यह साहस केवल मिथिला की नारी ही कर सकती है, जहां उनका ससुराल है। वरना किसकी हिमाकत है जो रामजी से धान कुटवा दे।
वह गुनगुनाती हैं आजु धनवा कुटाउ चारू बरवा से, आजु धनवा कुटाउ, बरवा से चारो बरवा से, बनि ठनि बर एला अवधवा से, जे रघुकुल के वीर कहावथि, बाधु सखि कांचि डोरवा से, ई बहिया के नृप कुल बालक, बुझब ओखली मुसरवा से...आजु धनवा कुटाउ चारू बरवा से...।
रामजी के हठ और प्रण को समझे युवा शक्ति
त्रेतायुग के राम और कलियुग के राम के सवाल पर शारदा सिन्हा कहती हैं कि राम कभी नहीं बदले। राम वही थे, वही हैं और रहेंगे। राम के चरित्र को युवा शक्ति चरितार्थ करने लगे तो देश में सच्चा बदलाव आएगा। हम जिस विकास की बात कर रहे हैं, वह युवा शक्ति के जरिये ही आएगा। युवा शक्ति को बहुत जरूरत है कि वह रामजी के हठ और प्रण को समझे। सियाजी के ममत्व को समझें। तभी हम सच में जगदगुरु हो सकेंगे।
रामभद्राचार्य जी कहते हैं समधन कैसी हैं आप
शारदा सिन्हा पिछले साल का वाकया याद करते हुए कहती हैं कि बक्सर में कार्यक्रम के दौरान रामभद्राचार्य जी से मुलाकात हुई। उन्होंने आशीर्वाद दिया और कहा कि एक तो सुनूंगा ही। मैंने भी कहा, मैं मिथिला की नारी हूं, आप अवध के हैं तो मैं तो सुनाऊंगी ही। मैंने गाली गाई रामजी से पूछे जनकपुर के नारी बता दे, बबुआ लोगवा देत काहें गारी...।
- इसके बाद वह ऐसे लजाकर बात करने लगे, जैसे समधी हों। उसके बाद से तो उन्होंने हमको समधन कहना ही शुरू कर दिया। जब भी मुलाकात या बात होती है...पूछते हैं कि समधन कैसी हैं आप?
पीएम की अपील पर शबरी जोहेली बटिया किया रिकॉर्ड
पीएम मोदी की अपील पर शारदा सिन्हा ने भी अपनी आवाज में गीत रिकॉर्ड किया है। वह भोजपुरी में गुनगुनाती हैं, अपना रामजी के शबरी जोहेली बटिया, हे जोहेली बटिया, अपना रामजी के शबरी जोहेली बटिया, लामी लामी केसिया शबरी झाड़ी के बहारे हो रामा, एहि बाट अइहें रघुनंदन रसिया। कहती हैं, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आने का निमंत्रण तो मिला है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से नहीं आ पाने का दुख मन में है। बहुत मन था कि जब पूजा हो रही हो तब मैं गाती।
गिरमिटिया भी साथ ले गए रामायण : शारदा सिन्हा कहती हैं कि लोक और लोकगीतों में राम बसे हुए हैं। भोजपुरी पट्टी में तो राम व रामायण को लोगों ने जिया है। रामचरित्र को आत्मसात किया है। यहां तक कि देश के बाहर जो गिरमिटिया गए, वे भी अपने साथ रामायण ले गए। वह गुनगुनाती हैं...तोरे भाल के चंदनवा राम हिया बस गेल...। इतने सलोने हैं राम।