Ayodhya : अजब-गजब है साधना ...रामलला को धोती-लुंगी, पैंट-शर्ट और सीताजी के लिए अर्पित कीं चूड़ी-बिंदी-बाली
अर्थात हे गोविन्द, आपका ही सब दिया हुआ है, जो आपको ही समर्पित कर रहे हैं। हे परमेश्वर, आपके मुख के सामने जो भी है, उसे प्रसन्नता से ग्रहण करें...अयोध्या में इन दिनों रामभक्त इसी भाव में अपने रामलला को श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जो मन में भा रहा है, अर्पण करने चले आ रहे हैं।
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त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर। अर्थात हे गोविन्द, आपका ही सब दिया हुआ है, जो आपको ही समर्पित कर रहे हैं। हे परमेश्वर, आपके मुख के सामने जो भी है, उसे प्रसन्नता से ग्रहण करें...अयोध्या में इन दिनों रामभक्त इसी भाव में अपने रामलला को श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जो मन में भा रहा है, अर्पण करने चले आ रहे हैं।
रामलला के लिए रुपया-पैसा, वस्त्र, आभूषण, फल, फूल, रोली-चंदन, चावल-तेल जैसी वस्तुएं देने वाले तो आ ही रहे हैं, धोती-लुंगी, पैंट-शर्ट, शॉल और रामनामी पटका देने वाले भी हैं। महिलाएं सीताजी के लिए चूड़ी, सिंदूर, बिंदी और बाली के साथ लाली-लिपस्टिक और सौंदर्य की अन्य सामग्रियां दे जा रही हैं। कई तो अपने जीवन भर की कमाई ही दे जा रहे हैं, लेकिन इन्हें प्रचार पाने के लिए कोई लालसा नहीं है।
कुछ तो अपनी पहचान गोपनीय रखने की दुहाई दे रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि पथ के प्रवेश द्वार के दाहिने रामलला के दर्शन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कक्ष है। रामलला के पास कुछ भी ले जाने की छूट नहीं है। लिहाजा, भक्त रामलला को देने वाली वस्तुएं, सामग्रियां व अन्य तरह की भेंट यहीं दे जा रहे हैं। यहां दान लेने और पास जारी करने वाले अन्वेष मिश्रा कहते हैं, हर व्यक्ति इसी विश्वास और भक्ति के अधीन लगता है कि प्रभु उसकी भेंट को अवश्य स्वीकार करेंगे। यहां दान की हर वस्तु का लेखाजोखा रखा जाता है और ट्रस्ट को भेजा दिया जाता है। ट्रस्ट इसका उपयोग तय करता है।
दान में यह भी
- टाटा मोटर्स पुणे की ओर से राम छाप व जय श्रीराम लिखी ईंट भेजी गई है।
- ओडिशा से लेकर बंगलूरू और सलेम से शिलांग तक से हाथों से राम-राम लिखीं कापियां लगातार पहुंच रही हैं।
- रामचरित मानस और श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तकें दान में आ रहीं। एक सज्जन बड़ी मात्रा में तिलगट्टी ही दे गए हैं।
4.40 लाख खाते में, दे गए 4 लाख
82 वर्ष के सुरेश चंद्र शर्मा मथुरा से अयोध्या आए थे। उनके बैंक खाते में 4.40 लाख रुपये थे। 4 लाख का चेक दे गए। राजकुमारी देवी का किस्सा और भी रोचक है। वह घरवालों को छोड़ नाती के साथ दर्शन करने आई थीं। वह भी चार लाख दान कर गईं। आग्रह था कि पहचान उजागर न हो। बहराइच के एक श्रमिक यहीं मजदूरी करते हैं। रोज 500 रुपये कमाते हैं। इसमें से 100 से 125 रुपये निकालकर पूरा पैसा श्रीराम के लिए जमा कर देते हैं।