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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya: Sales of books increased...higher demand for books on Ayodhya Mahatma and Ram Mandir struggle.

Ayodhya : पुस्तकों की बिक्री बढ़ी...राममंदिर संघर्ष की किताबों के बहुत खरीदार, रामचरितमानस की मांग अभूतपूर्व

Mon, 15 Jan 2024 05:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, अयोध्या
महेंद्र तिवारी, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 15 Jan 2024 05:17 AM IST
सार

श्रीराम पथ पर करीब 90 वर्ष पुराने पुस्तकालय के बालकृष्ण त्रिवेदी ने बताया कि पहले उनकी दुकान पर सालभर में करीब पांच हजार किताबें बिकती थीं। पिछले साल करीब 30 हजार किताबें बिकीं। गोस्वामी तुलसीदास के ग्रंथों की मांग ज्यादा है। 

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Ayodhya: Sales of books increased...higher demand for books on Ayodhya Mahatma and Ram Mandir struggle.
लगातार बढ़ रही है किताबों की मांग... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भैया अंग्रेजी वाली रामचरित मानस और श्रीमद्भगवदगीता है? अयोध्या महात्मय, अयोध्या दर्शन, विनय पीयूष और तुलसी दोहा शतक मिल पाएगा? वाल्मीकि रामायण आपके पास नहीं है, तो कहां मिलेगी? अयोध्या और राममंदिर के संघर्ष के बारे में प्रामाणिक किताबें कौन-कौन सी हैं? ऐसे ही तमाम प्रश्न इस वक्त अयोध्या आने वाले पर्यटक और रामभक्त पुस्तक विक्रेताओं से करते दिखाई दे रहे हैं। 

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श्रीराम पथ पर करीब 90 वर्ष पुराने पुस्तकालय के बालकृष्ण त्रिवेदी ने बताया कि पहले उनकी दुकान पर सालभर में करीब पांच हजार किताबें बिकती थीं। पिछले साल करीब 30 हजार किताबें बिकीं। गोस्वामी तुलसीदास के ग्रंथों की मांग ज्यादा है। 
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अन्य दुकानदार अमित मौर्या कहते हैं कि कुछ महीनों में विदेशी पर्यटक भी बढ़े हैं। गीता प्रेस की अंग्रेजी वाली रामचरित मानस और श्रीमद्भगदगीता की मांग बढ़ी है। अशोक कुमार कहते हैं कि अयोध्या में 30-35 दुकानों पर धार्मिक किताबें बिकती हैं। अयोध्या दर्शन व अयोध्या महात्म्य, विनय पीयूष शायद ही किसी दुकान पर मिल पाए। युवा शुभम कहते हैं कि धार्मिक किताबों की मांग राममंदिर और प्राण प्रतिष्ठा समारोह की वजह से बढ़ी है।
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पहले 75 हजार प्रतियां उपलब्ध कराते थे, अब एक लाख भी कम
गीता प्रेस गोरखपुर के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की तारीख घोषित होते ही रामचरितमानस की मांग अभूतपूर्व बढ़ी है। 

  • पहले रामचरितमानस की 75,000 प्रतियां हर माह उपलब्ध कराते थे। नौ माह में साढ़े आठ लाख प्रतियां छाप चुके हैं। 2-3 माह से एक लाख प्रतियां भी कम पड़ रही हैं।
  • जयपुर से करीब 50 हजार प्रतियों की मांग की गई है, लेकिन हम असमर्थता व्यक्त करने को मजबूर हुए।
  • स्थान की कमी से अतिरिक्त छपाई नहीं हो पा रही है। मांग के मुकाबले 70 फीसदी किताबें ही उपलब्ध करा पा रहे हैं। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मांग और बढ़ेगी।

 

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