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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya: Ramnaam has been reciting verses to Ramji for 30 years

Ayodhya : 30 साल से सुना रहे रामजी को पद-लिख रहे रामनाम, पावन नगरी के भक्तों का कुछ ऐसा है विश्वास

Thu, 18 Jan 2024 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा आलोक कुमार त्रिपाठी, अयोध्या
आलोक कुमार त्रिपाठी, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 18 Jan 2024 05:46 AM IST
सार

यानी तुलसीदास जी यही मांगते हैं कि मेरा एकमात्र राम पर ही भरोसा रहे, राम ही का बल रहे और जिसके स्मरण मात्र ही से शुभ, मंगल और कुशल की प्राप्ति होती है, उस राम नाम में ही विश्वास रहे। कुछ ऐसा ही विश्वास है अयोध्या के रामभक्तों का।

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Ayodhya: Ramnaam has been reciting verses to Ramji for 30 years
अयोध्या राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास, सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास...यानी तुलसीदास जी यही मांगते हैं कि मेरा एकमात्र राम पर ही भरोसा रहे, राम ही का बल रहे और जिसके स्मरण मात्र ही से शुभ, मंगल और कुशल की प्राप्ति होती है, उस राम नाम में ही विश्वास रहे। कुछ ऐसा ही विश्वास है अयोध्या के रामभक्तों का। एक रिपोर्ट... 

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बंदगी हमारी फितरत है तुम खुदा हो खुदा ना हो...
जय श्री जानकी वल्लभ लाल, मणि मंदिर श्री कनक भवन में यह पंक्तियां जैसे ही गूंजती हंै, श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। 30 वर्षों से यहां भगवान राम व माता सीता को भक्ति पद अर्पित कर रहे मिथिलेश बिहारी दास नित्य नियम से प्रभु चरणों में संगीतांजलि अर्पित करते हैं। वे संगीत में प्रभाकर हैं। कहते हैं कि शिक्षा उन्होंने लोकरंजन नहीं, भव भय भंजन के लिए ली है। 1989 में ही वह घर-बार छोड़कर अयोध्या आ गए और 1992 के साक्षी व सहयोगी भी बने। कहते हैं, मैं पहला सौभाग्यशाली साधु हूं, जिसको अयोध्या धाम में माता-पिता की सेवा का अवसर मिला। हालांकि अब वे इस दुनिया में नहीं हैं, पर श्रीराम और सीताजी का आशीष बना हुआ है। दिल कदमों में सिर झुका हो झुका ना हो, बंदगी हमारी फितरत है तुम खुदा हो खुदा ना हो...आप भगवान हैं इसलिए मैं आपकी पूजा नहीं कर रहा, पूजा मेरा स्वभाव होना चाहिए...हमारा सत्कर्म न रुके यही हमारी उपलब्धि होनी चाहिए।
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सरयू की लहरों पर सजा देते हैं रामजी का नाम
सफेद कागज पर रंग-बिरंगे नाम...दूर से देखने वालों को यह डिजाइन लगेगी, लेकिन यह राम नाम की 15 वर्षों की साधना है। सरयू किनारे आश्रम में रहने वाले विनय मिश्रा 2007 से कागजों पर राम-राम लिख रहे हैं। प्रयागराज में एक साधु की प्रेरणा से उन्होंने कागजों पर राम नाम लिखना शुरू किया था। 60 साल की उम्र में भी रामनाम की डिजाइन बनाने के लिए बेहद छोटे अक्षर लिखते हैं। डिजाइन पूरी होने के बाद वह इस डिजाइन को सरयू में प्रवाहित कर देते हैं। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड को भी रामनाम में ढाल चुके हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय ने 2015 में उनको रामभक्त की पदवी दी। 
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सेवा...55 वर्षों से लगा रहे कनक भवन में हाजिरी
सेवक का धर्म सबसे कठोर होता है। कुछ ऐसी ही कहानी है नरेंद्र शंकर नाथ की। वह कनक भवन के बाहर श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल की निगरानी करने का जिम्मा संभाल रहे हैं। 1966 से नित्य रामलला और कनक भवन के दर्शन करते हैं। 2008 में पोस्टमास्टर पद से सेवानिवृत्त नरेंद्र शंकर जब भी कनक भवन आते थे, तो आए दिन किसी न किसी श्रद्धालु के जूते-चप्पल गायब होने की शिकायत मिलती थी। इसके बाद उन्होंने मंदिर प्रबंधन के सहयोग से वहां पर जूता-चप्पल स्टैंड के संचालन की शुरुआत की। 

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