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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya Ram Temple : PM Modi said – Offer your bravery and efforts to Lord Ram; offerings of dedication

Ayodhya : प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी ने कहा- प्रभु राम को चढ़ाएं पराक्रम, पुरुषार्थ; समर्पण का प्रसाद

Tue, 23 Jan 2024 04:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 23 Jan 2024 04:42 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सदियों का धैर्य, अनगिनत बलिदान, त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु आ गए हैं। इस शुभ घड़ी की समस्त देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई।

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Ayodhya Ram Temple : PM Modi said – Offer your bravery and efforts to Lord Ram; offerings of dedication
अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद संबोधन के दौरान पीएम मोदी - फोटो : social media

विस्तार

प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए हैं। सदियों का धैर्य, अनगिनत बलिदान, त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु आ गए हैं। इस शुभ घड़ी की समस्त देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई।

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मैं अभी गर्भगृह में ईश्वरीय चेतना का साक्षी बनकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूं। कितना कुछ कहने को है... लेकिन कंठ अवरुद्ध है। मेरा शरीर अब भी स्पंदित है, चित्त अब भी उस पल में लीन है। हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। रामलला अब इस दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास है, अपार श्रद्धा है कि जो घटित हुआ है उसकी अनुभूति, देश के, विश्व के, कोने-कोने में रामभक्तों को हो रही होगी। ये वातावरण, ये ऊर्जा, ये घड़ी... प्रभु श्रीराम का हम सब पर आशीर्वाद है। 22 जनवरी, 2024 का सूरज अद्भुत आभा लेकर आया है। ये कैलेंडर पर लिखी एक तारीख नहीं, ये नए कालचक्र का उद्गम है। राम मंदिर के भूमिपूजन के बाद पूरे देश में उमंग और उत्साह बढ़ता ही जा रहा था। निर्माण कार्य देख, देशवासियों में नया विश्वास पैदा हो रहा था। 
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आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है, हमें श्रीराम का मंदिर मिला है। गुलामी की मानसिकता तोड़कर उठ खड़ा हो रहा राष्ट्र, अतीत के हर दंश से हौसला लेता राष्ट्र, ऐसे ही नव इतिहास का सृजन करता है। आज से हजार साल बाद भी लोग आज की इस तारीख की, आज के इस पल की चर्चा करेंगे। ये कितनी बड़ी रामकृपा है कि हम इस पल को जी रहे हैं, इसे साक्षात घटित होते देख रहे हैं। साथियों, मैं आज प्रभु श्रीराम से क्षमा याचना भी करता हूं। हमारे पुरुषार्थ, हमारे त्याग, तपस्या में कुछ तो कमी रह गयी होगी कि हम इतनी सदियों तक ये कार्य कर नहीं पाए। आज वो कमी पूरी हुई है। मुझे विश्वास है, प्रभु राम आज हमें अवश्य क्षमा करेंगे।
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जिसमें रम जाया जाए वही राम
पिछले 11 दिनों में रामायण अलग-अलग भाषा में, अलग-अलग राज्यों में सुनने का सौभाग्य मिला। राम को परिभाषित करते हुए ऋषियों ने कहा है- रमन्ते यस्मिन् इति रामः॥ अर्थात्, जिसमें रम जाया जाए, वही राम है। राम लोक की स्मृतियों में, पर्व से लेकर परंपराओं में, सर्वत्र समाये हुए हैं। हर युग में लोगों ने राम को जिया है। हर युग में लोगों ने अपने-अपने शब्दों में, अपनी-अपनी तरह से राम को अभिव्यक्त किया है। और ये रामरस, जीवन प्रवाह की तरह निरंतर बहता रहता है। रामकथा असीम है, रामायण भी अनंत हैं। राम के आदर्श, राम के मूल्य, राम की शिक्षाएं, सब जगह एक समान हैं।

सागर से लेकर सरयू तक हर जगह उत्सव भाव, भारत की अंतरात्मा में ही एकत्व
आज गांव-गांव में एकसाथ कीर्तन, संकीर्तन हो रहे हैं। मंदिरों में उत्सव हो रहे हैं, स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। पूरा देश दीपावली मना रहा है। मैं श्रीराम के आशीर्वाद से धनुषकोडि में रामसेतु के आरंभ बिंदु अरिचल मुनाई पर गया था। जिस घड़ी प्रभु राम समुद्र पार करने निकले थे, उस पल ने कालचक्र को बदला था। उस भावमय पल को महसूस करने का मेरा ये विनम्र प्रयास था। वहां मेरे भीतर एक विश्वास जगा कि जैसे उस समय कालचक्र बदला था उसी तरह अब कालचक्र फिर बदलेगा और शुभ दिशा में बढ़ेगा। अपने 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान के दौरान मैंने उन स्थानों का चरण स्पर्श करने का प्रयास किया, जहां प्रभु राम के चरण पड़े थे। चाहे वो नासिक का पंचवटी हो, केरल का पवित्र त्रिप्रायर मंदिर हो, आंध्र प्रदेश में लेपाक्षी हो, श्रीरंगम में रंगनाथ स्वामी मंदिर हो, रामेश्वरम में श्री रामनाथस्वामी मंदिर हो, या फिर धनुषकोडि... मेरा सौभाग्य है कि इसी पुनीत पवित्र भाव के साथ मुझे सागर से सरयू तक की यात्रा का अवसर मिला। सागर से सरयू तक, हर जगह राम नाम का वही उत्सव भाव है। प्रभु राम भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। राम, भारतवासियों के अंतर्मन में विराजे हुए हैं। हम भारत में कहीं भी, किसी की अंतरात्मा को छुएंगे तो इस एकत्व की अनुभूति होगी, और यही भाव सब जगह मिलेगा। इससे उत्कृष्ट, इससे अधिक, देश को समायोजित करने वाला सूत्र और क्या हो सकता है?

अतीत से सुंदर होगा भविष्य
आज का ये अवसर उत्सव का क्षण तो है ही, लेकिन ये भारतीय समाज की परिपक्वता के बोध का क्षण भी है। हमारे लिए ये अवसर सिर्फ विजय का नहीं, विनय का भी है। दुनिया का इतिहास साक्षी है कि कई राष्ट्र अपने ही इतिहास में उलझ जाते हैं। ऐसे देशों ने जब भी अपने इतिहास की उलझी गांठों को खोलने का प्रयास किया, उन्हें सफलता पाने में बहुत कठिनाई आई। लेकिन हमारे देश ने इतिहास की इस गांठ को जिस गंभीरता और भावुकता के साथ खोला, वो ये बताती है कि हमारा भविष्य हमारे अतीत से बहुत सुंदर होने जा रहा है।

यह संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास की प्राण प्रतिष्ठा
अयोध्या में, केवल श्रीराम के विग्रह रूप की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई है। श्रीराम के रूप में साक्षात भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास की भी प्राण प्रतिष्ठा है। ये साक्षात मानवीय मूल्यों और सर्वोच्च आदर्शों की भी प्राण प्रतिष्ठा है। इन मूल्यों की, इन आदर्शों की आवश्यकता आज सम्पूर्ण विश्व को है। सर्वे भवन्तु सुखिन: ये संकल्प हम सदियों से दोहराते आए हैं। आज उसी संकल्प को राममंदिर के रूप में साक्षात् आकार मिला है। जब राम की प्रतिष्ठा होती है, तो उसका प्रभाव वर्षों या शताब्दियों तक ही नहीं होता। उसका प्रभाव हजारों वर्षों के लिए होता है।

कर्तव्य की पराकाष्ठा ही हमारा आधार
लंकापति रावण प्रकांड ज्ञानी थे, अपार शक्ति के धनी थे। लेकिन जटायु जी की मूल्य निष्ठा देखिए, वे महाबली रावण से भिड़ गए। उन्हें भी पता था कि वो रावण को परास्त नहीं कर पाएंगे। लेकिन फिर भी उन्होंने रावण को चुनौती दी। कर्तव्य की यही पराकाष्ठा समर्थ-सक्षम, भव्य-दिव्य भारत का आधार है। और यही तो है, देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। हम संकल्प लें कि राष्ट्र निर्माण के लिए हम अपने जीवन का पल-पल लगा देंगे। रामकाज से राष्ट्रकाज, समय का पल-पल, शरीर का कण-कण, राम समर्पण को राष्ट्र समर्पण के ध्येय से जोड़ देंगे। हमें नित्य पराक्रम, पुरुषार्थ, समर्पण का प्रसाद प्रभु राम को चढ़ाना होगा। इनसे नित्य प्रभु राम की पूजा करनी होगी, तब हम भारत को वैभवशाली और विकसित बना पाएंगे। प्रभु को जो भोग चढ़ेगा, वो विकसित भारत के लिए हमारे परिश्रम की पराकाष्ठा का प्रसाद भी होगा।  

हम विकास की ऊंचाई पर पहुंच कर रहेंगे
यह भारत का समय है। भारत अब आगे बढ़ने वाला है। शताब्दियों की प्रतीक्षा के बाद हम यहां पहुंचे हैं। हम सब ने इस युग का, इस कालखंड का इंतजार किया है। अब हम रुकेंगे नहीं। हम विकास की ऊंचाई पर जाकर ही रहेंगे। 

राम आग नहीं ऊर्जा हैं, विवाद नहीं समाधान हैं
गुलामी की मानसिकता को तोड़कर खड़ा हुआ राष्ट्र, अतीत की हर पीड़ा से साहस लेकर खड़ा हुआ राष्ट्र, ऐसे ही नया इतिहास रचता है। आज से एक हजार साल बाद लोग इस तारीख, इस पल के बारे में बात करेंगे। भगवान राम की महान कृपा है कि हम इस क्षण में जी रहे हैं, इसे घटित होते हुए देख रहे हैं।

एक समय था जब कुछ लोग कहते थे कि अगर राम मंदिर बनेगा तो अशांति फैलेगी...ऐसे लोग भारत की सामाजिक भावना की पवित्रता को समझने में नाकाम रहे। मंदिर निर्माण आग नहीं भड़का रहा है, बल्कि ऊर्जा को जन्म दे रहा है। राम आग नहीं, ऊर्जा हैं। राम विवाद नहीं, समाधान हैं। आज, मैं उन लोगों से आह्वान करता हूं...इसे महसूस करें, अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करें।

युवाओं के सामने हजारों सालों की प्रेरणा है...
आप देश की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो चांद पर तिरंगा फहरा रही है, जो सूर्य तक 15 लाख किमी की यात्रा करके मिशन आदित्य का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है, जो आकाश में तेजस और समुद्र में विक्रांत का झंडा लहरा रही है। आपको अपनी विरासत पर गर्व करते हुए भारत का नया सवेरा लिखना है।


महंत गोविंद गिरि ने तुड़वाया उपवास
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना उपवास तोड़ा। महंत गोविंददेव गिरि ने चरणामृत पिला कर पीएम का उपवास तुड़वाया। महंत गोविंद गिरि ने कहा, पीएम को तीन दिन उपवास के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने 11 दिन का कड़ा उपवास रखा।

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