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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya Ram Mandir Two thousand years ago Maharaja Vikramaditya had established it in Ram Janmabhoomi

Ram Mandir: श्याम वर्ण के एक और राम... पहले से हैं कालेराम; दो हजार साल पहले विक्रमादित्य ने किया था स्थापित

Sat, 20 Jan 2024 09:10 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 20 Jan 2024 09:10 AM IST
सार

Ayodhya Ram Mandir: नवनिर्मित श्रीराम मंदिर में श्याम रंग के रामलला की मूर्ति भी विराजित की गई है। यह कालेराम के नाम से विख्यात हैं। दो हजार साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने रामजन्मभूमि में इन्हें स्थापित किया था। कालेराम 220 वर्षों तक सरयू नदी में डूबे रहे थे।

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Ayodhya Ram Mandir Two thousand years ago Maharaja Vikramaditya had established it in Ram Janmabhoomi
Ayodhya Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रामलला को जन्मभूमि में स्थापना के लिए करीब 500 वर्षों का इंतजार करना पड़ा। सिर्फ रामलला को नहीं, बल्कि अयोध्या के ही एक अन्य मंदिर में भी भगवान राम को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा था। करीब 220 वर्षों तक सरयू नदी में डूबे रहने के बाद आखिरकार उनकी स्थापना मंदिर में की जा सकी थी। 
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नवनिर्मित राममंदिर में श्याम रंग के रामलला की मूर्ति विराजित की गई है। अयोध्या में श्याम रंग के एक और राम विराजमान हैं, जो कालेराम के नाम से विख्यात हैं। मान्यता है कि महाराजा विक्रमादित्य ने कालेराम को रामजन्मभूमि परिसर में ही स्थापित किया था। यह मूर्ति 1500 वर्षों तक रामजन्मभूमि में ही विराजित रही।
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सरयू किनारे नागेश्वरनाथ मंदिर के पीछे प्राचीन कालेराम मंदिर स्थित है। मंदिर में स्थापित राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी कि मूर्तियों को लेकर मान्यता है कि इन्हें विक्रमादित्य ने दो हजार वर्ष पहले रामजन्मभूमि में स्थापित किया था। 
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1528 के आसपास बाबर की सेना ने अयोध्या में जन्मभूमि पर आक्रमण किया तो तत्कालीन पुजारी श्यामानंद ने भगवान के विग्रह को बचाने के लिए सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया था। यह विग्रह 1748 के आसपास सरयू किनारे सहस्त्र धारा के पास महाराष्ट्रीयन संत नरसिंह राव मोघे को मिला।
 

मान्यता है कि मूर्ति के मिलने से पहले नरसिंह राव को तीन बार स्वप्न में सरयू में मूर्ति होने की जानकारी हुई। स्वप्न में ही मिले आदेश के बाद जब वे सरयू नदी के पास पहुंचे तो उन्हें मूर्ति मिली। इसके बाद कालेराम कि मूर्ति को सरयू किनारे उन्होंने स्थापित किया। 



 

220 वर्ष तक नदी के तलहटी में पड़े होने के चलते मूर्ति काली पड़ गई थी। ऐसे में हाथ में मूर्ति लेते ही संत नरसिंह राव के मुंह से अचानक ''''कालेराम'''' शब्द निकल पड़ा। इसके बाद इस विग्रह को जहां स्थापित किया गया, मंदिर का नाम कालेराम ही रखा गया।

 

मंदिर में स्थापित है श्रीराम यंत्र
श्रीकालेराम जी मंदिर में भगवान श्रीराम के मंत्र ''''श्रीराम जय राम, जय जय राम'''' को 13 करोड़ बार लिखकर रामयंत्र के रूप में स्थापित किया गया है। साथ ही मंदिर में 18 पुराण, चारों वेद, गीता, रामायण आदि सभी धार्मिक पुस्तकों को स्थापित किया गया है। मान्यता है कि कोई भी श्रद्धालु इन पुस्तकों व श्रीराम मंत्र की परिक्रमा करता है तो उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

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