फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya Ram Mandir queen clashed with Mughals for liberation of temple

Ram Mandir: मंदिर की मुक्ति के लिए मुगलों से भिड़ गईं महारानी... सालार मसूद गाजी ने की थी हमले की कोशिश

Tue, 02 Jan 2024 09:18 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला विशेष टीम, अयोध्या
अमर उजाला विशेष टीम, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 02 Jan 2024 09:18 AM IST
सार

बलरामपुर की महारानी जयराज कुंवरि स्त्री सेना, स्वामी महेश्वरानंद साधु सेना लेकर मुगलों से भिड़ गए। दरबार-ए-अकबरी ने तो लिखा कि जयराज कुंवरि ने जन्मभूमि पर अधिकार भी पा लिया। बाद में हुमायूं की सेना ने फिर हमला कर दिया। दुर्भाग्य से दोनों वीरगति को प्राप्त हुए।

विज्ञापन
Ayodhya Ram Mandir  queen clashed with Mughals for liberation of temple
Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रामजन्मभूमि पर आक्रमण करने वाला बाबर पहला आक्रमणकारी नहीं था। विदेशी यवन राजा मिनेण्डर अथवा मिलिन्द, जिसे मिहिरकुल भी कहा जाता है...अयोध्या पर बाबर से पहले आक्रमण कर चुका था। मगर, तीन माह के भीतर ही शुंगवंशीय राजा द्युमत्सेन ने उसे पराजित कर मेरी अयोध्या को मुक्त करा लिया।
विज्ञापन


हमले की कोशिश तो सोमनाथ मंदिर को कई बार लूटने वाले महमूद गजनवी के भांजे सालार मसूद गाजी ने भी की थी। दिल्ली, मेरठ, बुलंदशहर, बदायूं और कन्नौज के राजाओं को रौंदता हुआ, देवस्थानों को ध्वस्त करता हुआ बाराबंकी तक आ गया। 
विज्ञापन


बहराइच पर आक्रमण कर अयोध्या पहुंचना चाहता था, पर 1034 ईसवी में कौशल के महाराजा सुहेलदेव ने उसे और उसकी एक लाख 30 हजार की सेना को भी खत्म कर दिया। अयोध्या सुहेलदेव की उपराजधानी थी। पर, 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने जो हमला किया, मेरी अयोध्या की मुक्ति और संघर्ष की दास्तां लंबी हो गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मंदिर तोड़ने की खबर मिलते ही भाटी नरेश महताब सिंह, हंसवर नरेश रणविजय सिंह हंसवर के राजगुरु पंडित देवीदीन पांडेय ने मीर बाकी की सेना पर हमला कर दिया। 15 दिन युद्ध चला। 

बाबर की जीवनी तुजुक बाबरी में देवीदीन के शौर्य का जिक्र करते हुए लिखा है कि उन्होंने सात सौ से अधिक सैनिकों को अकेले मौत के घाट उतार दिया। अंग्रेज इतिहासकार कनिंघम ने लखनऊ गजेटियर में लिखा, 1.74 लाख लाशें गिरने के बाद ही मीर बाकी मंदिर तोड़ सका।

जन्मभूमि की मुक्ति के लिए हुमायूं के समय दस बार युद्ध हुए। बलरामपुर की महारानी जयराज कुंवरि स्त्री सेना, स्वामी महेश्वरानंद साधु सेना लेकर मुगलों से भिड़ गए। दरबार-ए-अकबरी ने तो लिखा कि जयराज कुंवरि ने जन्मभूमि पर अधिकार भी पा लिया। बाद में हुमायूं की सेना ने फिर हमला कर दिया। दुर्भाग्य से दोनों वीरगति को प्राप्त हुए।

ढांचे के सामने मंदिर की इजाजत
अकबर के समय स्वामी महेश्वरानंद के बाद संघर्ष की बागडोर संभाली स्वामी बलरामाचार्य ने। मंदिर के लिए अकबर के कालखंड में 20 बार संघर्ष हुआ। कभी मुगल सेना, तो कभी बलरामाचार्य ने यहां अधिकार जमाया। आखिरकार बलरामाचार्य मारे गए। लोग आक्रोशित हो उठे।

उन्हें शांत करने के लिए बीरबल और टोडरमल की सलाह पर अकबर ने बाबरी मस्जिद के सामने एक चबूतरे पर एक छोटा राममंदिर बनाने की इजाजत दे दी। यह हुक्म भी दिया कि हिंदुओं की पूजा-पाठ में कोई बाधा न डाली जाए। बाद में औरंगजेब ने सत्ता संभाली तो संघर्ष फिर शुरू हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed