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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya Ram Mandir: Planets and constellations are favourable

Ayodhya Ram Mandir : ग्रह-नक्षत्र अनुकूल, स्वर्ण द्वार से आएगी भरपूर समृद्धि, देश के लिए शुभ

Sun, 14 Jan 2024 06:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा आलोक कुमार त्रिपाठी, अयोध्या
आलोक कुमार त्रिपाठी, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 14 Jan 2024 06:14 AM IST
सार

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 8 जनवरी को लगा मुख्यद्वार भक्तों के साथ ही देश के लिए काफी शुभ है। इस द्वार को लगाते समय ग्रह और नक्षत्र सब अनुकूल थे। इसलिए इससे देश की समृद्धि के दरवाजे भी खुलेंगे। सभी दरवाजे मुहूर्त के अनुसार ही लगाए जा रहे हैं।

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Ayodhya Ram Mandir: Planets and constellations are favourable
राम मंदिर का भव्य स्वर्ण द्वार। - फोटो : amar ujala

विस्तार

रामंदिर के गर्भगृह में कुल 44 द्वार लगाए जा रह हैं। इनमें सागौन की लकड़ी के ऊपर 14 दरवाजों पर स्वर्णपत्तर तो 30 पर चांदी की परत लगाई जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 8 जनवरी को लगा मुख्यद्वार भक्तों के साथ ही देश के लिए काफी शुभ है। इस द्वार को लगाते समय ग्रह और नक्षत्र सब अनुकूल थे। इसलिए इससे देश की समृद्धि के दरवाजे भी खुलेंगे। सभी दरवाजे मुहूर्त के अनुसार ही लगाए जा रहे हैं।

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राममंदिर का मुहूर्त देने वाले पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ के अनुसार पहले द्वार को वृषभ लग्न में अनुराधा नक्षत्र में लगाया गया है। लग्न की स्थिति को देखें तो केंद्र में चंद्र, बुध, शुक्र तथा 11वें भाव में राहु शुभ फलदायी हैं। अष्टमस्थ चतुर्थेश सूर्य पर गुरु की दृष्टि है। चतुर्थ स्थान पर गुरु पूर्ण दृष्टि शुभ है, जो कि भारत के लिए भी शुभफलदायी होगी।
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ज्योर्तिविदाभरण ग्रंथ में मृदु नक्षत्र को द्वार स्थापना के लिए लिया गया है। मृदु नक्षत्र में अनुराधा नक्षत्र आता है। पाप मुक्त होने पर चंद्रभुक्त होने से ग्राह्य है। अनुराधा पापविद्ध नहीं है और चौघड़िया मुहूर्तानुसार लाभघटिका है, जो कि शुभ है। वृषभ लग्न में कन्यानवांश में द्वार स्थापना का मुहूर्त उत्तम है। कन्यानवांश कुंडली के अनुसार पांच इष्ट ग्रह हैं। इनमें चद्रमा, शुक्र, राहु, बुध और गुरु हैं। बुध पर गुरु की दृष्टि होने से दोष परिहार होता है।
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स्वर्ण, गो और अन्नदान के बाद पहले द्वार की स्थापना
राममंदिर के पहले स्वर्णद्वार की स्थापना से पहले दोषों का परिहार किया गया। इसमें वृषभ लग्न की शुद्धि के लिए सबसे पहले स्वर्ण दान किया। इसके बाद खरमास के लिए गोदान, पौषकृष्ण द्वादशी के लिए चावल का दान कर पहला स्वर्णद्वार स्थापित किया गया।

  • स्वर्ण द्वार 12 फुट ऊंचा और आठ फुट चौड़ा है। मंदिर में इस तरह के 13 दरवाजे और लगाए जा रहे हैं जो कि इसी हफ्ते लग जाएंगे। दरवाजों को सागौन की लकड़ी से तैयार किया गया है और इस पर हजार किलोग्राम के सोने का पत्तर चढ़ाया गया है। नक्काशीदार दरवाजों पर विष्णु कमल , वैभव प्रतीक गज, प्रणाम स्वागत मुद्रा में देवी चित्र अंकित किए गए हैं।
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