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सबके राम: भए प्रगट कृपाला की गूंज और सियासी चौसर पर चाल, सरयू से जानिए अयोध्या की मुक्ति के संघर्ष की दास्तां

Sun, 07 Jan 2024 09:24 AM IST
शाहरुख खान अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, अयोध्या
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 07 Jan 2024 09:24 AM IST
सार

Ayodhya Ram Mandir: सरयू से जानिए अयोध्या की मुक्ति के संघर्ष की दास्तां। वर्ष 1949 की 22-23 दिसंबर की कड़ाके की ठंड। रात आधी से ज्यादा गुजर चुकी थी। मैं नींद में थी, तभी छप-छप के साथ राम-राम की आवाज गूंजी...

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Ayodhya Ram Mandir Know story of struggle for liberation of Ayodhya from Saryu
Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुझे उम्मीद थी कि आजादी मिलने के बाद शायद प्रभु राम का जन्मस्थान भी विवादों से आजाद हो जाए। उम्मीदों की वजह थी विधानसभा की फैजाबाद सीट पर 1948 में बाबा राघव दास की आचार्य नरेंद्र देव पर जीत। राघव दास कांग्रेस उम्मीदवार थे और राम के नाम पर विजयी हुए थे। इस नतीजे का अयोध्या विवाद से क्या नाता है, आगे बताऊंगी...फिलहाल।
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वर्ष 1949 की 22-23 दिसंबर की कड़ाके की ठंड। रात आधी से ज्यादा गुजर चुकी थी। मैं नींद में थी, तभी छप-छप के साथ राम-राम की आवाज गूंजी। देखा गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत दिग्विजय नाथ, आचार्य नरेंद्र देव को पराजित करने वाले महंत बाबा राघव दास, महंत अभिराम दास, रामचंद्र परमहंस और गीता प्रेस के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार मेरे जल में डुबकी लगा रहे हैं। 
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एक बार तो मैं चौंकी कि इतनी ठंड में देर रात स्नान। फिर उनींदी-अलसाई सो गई। अचानक सन्नाटे को चीरते हुए मेरे कानों में आवाज पड़ी...भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी। साथ में घंटा-घड़ियाल और शंख की ध्वनि। पौ फटते ही मेरे तट पर काफी भीड़। आवाज आई रामलला प्रगट हो गए हैं। 
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तारीख 23 दिसंबर, 1949। परिसर को पुलिस ने घेर लिया है। पर, साधुओं का जत्था और रामलला के दर्शन को आ रही भीड़ वहां से हटने को तैयार नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि आधी रात स्नान करने वाले साधुओं ने ही परिसर में जबरन रामलला की मूर्ति रखकर उनके प्रगट होने का दावा किया है, जबकि उस रात परिसर में तैनात तत्कालीन सिपाही अब्दुल बरकत ने रोजनामचे में दर्ज बयान में रामलला के प्रगट होने की बात कही। 

कुछ देर बाद पता चला कि तत्कालीन प्रभारी सीनियर सब इंस्पेक्टर रामदेव दुबे ने महंत अभिराम दास सहित स्नान करने वाले साधुओं समेत 50-60 लोगों के विरुद्ध संबंधित परिसर में घुसकर मूर्ति रखने में एफआईआर दर्ज कराई है।

नेहरू का नहीं माना आदेश
घटना के समय केरल में जन्मे नायर फैजाबाद में जिला अधिकारी थे। तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने मूर्ति हटाने का आदेश दिया। पर, नायर ने स्थिति और तथ्यों का उल्लेख करते हुए इन्कार कर दिया। यह वही नायर साहब थे, जो पत्नी के साथ जनसंघ के टिकट पर सांसद भी निर्वाचित हुए। 

 

मूर्ति हटाने को लेकर प्रदेश के तत्कालीन सीएम गोविंद वल्लभ पंत और नेहरू के बीच तनाव हुआ। मूर्ति नहीं हटी। म्युनिसिपल बोर्ड के चेयरमैन प्रिया दत्त राम रिसीवर नियुक्त हुए। रामलला की पूजा-पाठ शुरू हो गई। तब से इस परिसर में कभी नमाज नहीं हुई। 

 

पर, सियासी चौसर पर अयोध्या को लेकर दिलचस्प चालें शुरू हो गईं। जिस कांग्रेस ने 1948 में बाबा राघवदास के चुनाव में यह कहते हुए वोट मांगे थे कि राम नगरी अयोध्या के लोग भगवान को न मानने वाले आचार्य नरेंद्र देव को वोट देंगे, तो दुनिया क्या कहेगी। उसी कांग्रेस ने बाद में राम के नाम पर सियासत पर सियासत की।
 
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