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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya Ram Mandir kar sevak Shalini Dabir became emotional when got invitation for life consecration ceremony

Ram Mandir: तब लाठियां सहीं... अब निमंत्रण मिला तो भावुक हुईं 96 साल की कारसेवक; बोलीं-आंदोलन की यादें ताजा

Mon, 08 Jan 2024 12:16 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 08 Jan 2024 12:16 PM IST
सार

Ram Mandir: 96 वर्षीय कारसेवक शालिनी दबीर को प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिला तो वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि मंदिर आंदोलन की यादें ताजा हो गईं। 

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Ayodhya Ram Mandir kar sevak Shalini Dabir became emotional when got invitation for life consecration ceremony
कारसेवक शालिनी दबीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने वालीं 96 वर्षीय कारसेवक शालिनी दबीर को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रण मिला तो बेहद भावुक हो गईं। कहा, राम अयोध्या वापस आ रहे हैं...मंदिर बन गया है। सब अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि दुख की बात यह है कि मेरे पैर काम नहीं कर रहे हैं और मैं चल नहीं पाऊंगी।
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मुंबई की शालिनी कार सेवा के समय 63 वर्ष की थीं। वह 60 किमी पैदल चलकर अयोध्या पहुंची थीं। शालिनी को न सिर्फ पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं, बल्कि आंसू गैस और गोलीबारी में भी वह बाल-बाल बची थीं। एजेंसी
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जब बंदर ने लगाया जोर 
शालिनी बताती हैं कि बहुत कोशिशों के बावजूद ढांचे की एक दीवार नहीं गिर रही थी। अचानक एक बंदर उस दीवार पर बैठा और धुल का गुबार फैला गया, क्योंकि उसी ने दीवार पर जोर लगाया था, जिससे वह ढह गई थी।
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देवरहा बाबा ने 34 साल पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी
उधर, सिद्ध संत देवरहा बाबा ने राम मंदिर आंदोलन के बीच ही 34 साल पहले अयोध्या में निर्विघ्न राम मंदिर बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी बाबा से मुलाकात करने वृंदावन के देव आश्रम पहुंचे थे। वह वहां दो घंटे तक रहे और मचान पर बैठे देवरहा बाबा से बातचीत कर आशीर्वाद लिया था। उसी वार्ता के बाद राजीव गांधी राम मंदिर के शिलान्यास पर सहमत हो गए थे, हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी इसके विरोध में थे।

अमर उजाला के पुराने पन्नों में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यह मुलाकात दर्ज है। 34 साल पहले 6 नवंबर 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सुबह 8:40 बजे ही विशेष विमान से वृंदावन में देवरहा बाबा से मिलने के लिए पहुंचे थे। उनके साथ तब विदेश राज्यमंत्री नटवर सिंह, तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह, मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी भी थे। देवरहा बाबा के आश्रम में सबसे पहले गृहमंत्री बूटा सिंह पहुंचे, उनके 10 मिनट बाद ही राजीव गांधी आए। देवरहा बाबा राम मंदिर निर्माण का सर्व सहमति से रास्ता निकालना चाहते थे और संतों की ओर से उन्होंने राजीव गांधी से कहा था कि राम मंदिर निर्विघ्न बनेगा।
 

गोसेवा, गोरक्षा का दिया था मंत्र
देवरहा बाबा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देश की समृद्धि के लिए गोसेवा और गोरक्षा का मंत्र दिया था। राम मंदिर के बारे में राजीव गांधी की सहमति पर बाबा इतने खुश हुए कि तत्कालीन प्रधानमंत्री के सिर पर पगड़ी पहनाई गई थी, जिसे पहनने के बाद राजीव गांधी बेहद खुशी के साथ आश्रम से बाहर निकले थे। इस मुलाकात के बाद 10 नवंबर को राम मंदिर शिलान्यास की कवायद की गई। तब भगवान राम की मूर्ति से 192 फुट दूर शिलान्यास पर सहमति दी गई थी।

 
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