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Ayodhya Ram Mandir: राम से बड़ा राम का नाम
Thu, 11 Jan 2024 05:49 PM IST
अमर शर्मा
पुरुषोत्तम अग्रवाल
पुरुषोत्तम अग्रवाल
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 11 Jan 2024 05:49 PM IST
सार
मेरे लिए राम का सब-कुछ महत्वपूर्ण है। इसमें खुद राम भी हैं, उनका नाम और काम भी। राम आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श पिता और आदर्श राजा हैं। वह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। निजी तौर पर मैंने हर अवस्था में, बालपन से अब तक मैंने राम से बहुत कुछ सीखा है।
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Ramlala Purushottam Agrawal
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
-पुरुषोत्तम अग्रवाल, कथाकार व आलोचक
मेरे लिए राम का सब-कुछ महत्वपूर्ण है। इसमें खुद राम भी हैं, उनका नाम और काम भी। राम आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श पिता और आदर्श राजा हैं। वह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। निजी तौर पर मैंने हर अवस्था में, बालपन से अब तक मैंने राम से बहुत कुछ सीखा है। यह बेहद व्यक्तिपरक अनुभव है, जिसको व्यक्त करना मेरे लिए संभव नहीं। करना चाहिए भी नहीं।
और हमीं क्या, हम जिस समाज में हैं, उसके ही चेतन में राम गहरे तक समाए हैं। वह कई रूपों में हमारे सामने आते हैं। ईश्वर, मर्यादा पुरुष, राजा राम...। राम उनके लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिनके वह देव नहीं हैं। राम निर्गुण परंपरा के भी हैं। पूरा भारतीय समाज राम को सुनते, समझते आगे बढ़ा और अभी भी बढ़ ही रहा है। राम केवल भारतीय या हिंदू चेतना के नहीं, बल्कि दुनिया भर की चेतना के महत्वपूर्ण अंग हैं।
अपने यहां आज भी कहा जाता है कि आपकी तो अलग ही राम कहानी है। यह किसी एक की नहीं, हमारी, आपकी और सबकी अपनी राम कहानी है। मानस में तुलसीदास जी ने भी कहा है और बिल्कुल ठीक कहा है कि कलयुग केवल नाम अधारा। भारतीय संस्कृति में आज राम से बड़ा राम नाम है। मैंने इसी तरह राम को जाना-समझा है। फिर भी, इसमें एक बात हमें और ध्यान रखनी होगी।
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भारतीय चित्त की विशेषता यह भी है कि यहां ईश्वर को एक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रखा गया है। बंगाल में राम से महत्वपूर्ण दुर्गा हैं। ब्रज में कृष्ण सबसे पहले पूजे जाते हैं, महाराष्ट्र में गणेश की महिमा सबसे निराली है।
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मेरे लिए राम का सब-कुछ महत्वपूर्ण है। इसमें खुद राम भी हैं, उनका नाम और काम भी। राम आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श पिता और आदर्श राजा हैं। वह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। निजी तौर पर मैंने हर अवस्था में, बालपन से अब तक मैंने राम से बहुत कुछ सीखा है। यह बेहद व्यक्तिपरक अनुभव है, जिसको व्यक्त करना मेरे लिए संभव नहीं। करना चाहिए भी नहीं।
और हमीं क्या, हम जिस समाज में हैं, उसके ही चेतन में राम गहरे तक समाए हैं। वह कई रूपों में हमारे सामने आते हैं। ईश्वर, मर्यादा पुरुष, राजा राम...। राम उनके लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिनके वह देव नहीं हैं। राम निर्गुण परंपरा के भी हैं। पूरा भारतीय समाज राम को सुनते, समझते आगे बढ़ा और अभी भी बढ़ ही रहा है। राम केवल भारतीय या हिंदू चेतना के नहीं, बल्कि दुनिया भर की चेतना के महत्वपूर्ण अंग हैं।
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अपने यहां आज भी कहा जाता है कि आपकी तो अलग ही राम कहानी है। यह किसी एक की नहीं, हमारी, आपकी और सबकी अपनी राम कहानी है। मानस में तुलसीदास जी ने भी कहा है और बिल्कुल ठीक कहा है कि कलयुग केवल नाम अधारा। भारतीय संस्कृति में आज राम से बड़ा राम नाम है। मैंने इसी तरह राम को जाना-समझा है। फिर भी, इसमें एक बात हमें और ध्यान रखनी होगी।
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भारतीय चित्त की विशेषता यह भी है कि यहां ईश्वर को एक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रखा गया है। बंगाल में राम से महत्वपूर्ण दुर्गा हैं। ब्रज में कृष्ण सबसे पहले पूजे जाते हैं, महाराष्ट्र में गणेश की महिमा सबसे निराली है।