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Hindi News ›   Ram Mandir ›   Ayodhya Ram Mandir Inauguration Ramlala Not only in India aura of Shri Ram is prevalent all over world

Ayodhya Ram Mandir: भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में व्याप्त है राम की आभा

Mon, 22 Jan 2024 10:45 PM IST
अमर शर्मा राजीव तुली
राजीव तुली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 22 Jan 2024 10:45 PM IST
सार

राम केवल भारत और भारतीयों के ही नहीं है, विश्व पटल भी उनकी आभा से आलोकित है। इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वहां भी रामायण और राम हैं। एक नहीं, कंबोडिया में हमारे देश की तरह कई रामायण हैं। लाओ में, मलेशिया में, थाइलैंड में, ईरान में और तो और चीन में भी रामायण के प्रसंग, राम की कथाएं सुनने को मिलती हैं। दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला अपना संबंध भी अयोध्या जी से बताती हैं।

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Ayodhya Ram Mandir Inauguration Ramlala Not only in India aura of Shri Ram is prevalent all over world
Ramlala - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

- राजीव तुली
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492 साल के संघर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बन चुका है। अयोध्या को सप्तपुरियों में पहली पुरी बताया गया है। पहला ऐसा शहर बताया गया है, जो प्रत्येक भारतीय के लिए पूजनीय है। अयोध्या जी से भगवान राम जुड़े हैं। अयोध्या जी से बुद्ध जुड़े हैं। तो सदियों से अयोध्या नगरी जैन धर्म की आस्था का भी केंद्र रही है। ऐतिहासिक रूप से यह सत्य भी है कि राम लला के मंदिर को तोड़ कर बलपूर्वक बाबरी मस्जिद बनाने के बाद श्री राम मंदिर को स्वतंत्र कराने की पहली एफआईआर निहंग सिखों पर हुई।

राम की सर्वव्यापकता आज की विविधता में एकता का सूत्र है। तमिल में कंब रामायण, तेलुगु में रघुनाथ और रंगनाथ रामायण, उड़िया में रुद्रपाद काटेढ़पड़ी, कन्नड़ में कुमुद बिंदु रामायण, कश्मीर में रामअवतार चरित, मलयालम में रामचरित, बांग्ला में कृत्तिवास रामायण, श्री गुरु गोविंद सिंह द्वारा रचित गोविंद रामायण। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग राम, सबके राम, सब में राम। अनेकता में एकता और इसके सूत्र हैं राम।
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निषाद के राम, भीलों के राम, ग्रामीणों के राम, शहरी के राम, भालू, वानर के राम, परित्यकता अहिल्या के राम, इस प्रकार राम का चरित्र व्यापक है। राम केवल भारत और भारतीयों के ही नहीं है, विश्व पटल भी उनकी आभा से आलोकित है। इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वहां भी रामायण और राम हैं। एक नहीं, कंबोडिया में हमारे देश की तरह कई रामायण हैं। लाओ में, मलेशिया में, थाइलैंड में, ईरान में और तो और चीन में भी रामायण के प्रसंग, राम की कथाएं सुनने को मिलती हैं। दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला अपना संबंध भी अयोध्या जी से बताती हैं।
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राम की यह महिमा तब थी, जब राम का अपना रहने का स्थान अभी तक नहीं था। राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर का निर्माण हो गया है। राम समरसता के प्रतीक हैं, तो वे राष्ट्र प्रेम का प्रतीक भी हैं। राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। राम से जीवन है और तो और राम से ही मोक्ष भी है। भव्य राम का मंदिर निर्माण स्वतंत्रता आंदोलन के ही समान है। स्वराज के आगमन का प्रतीक है। पीढ़ी दर पीढ़ी संघर्ष की गाथा में मील का पत्थर है। भारतीयता की भावना का जागरण है। सांस्कृतिक राष्ट्र, अखंड राष्ट्र, जिसकी कल्पना स्वामी रामतीर्थ, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद तथा अनेक ऋषियों ने की थी, राम मंदिर उसका आकार रूप है।

सोचिए कि श्री राम के टूटे हुए मंदिर से लाखों वर्षों से प्रेरणा लेकर विश्व में अरबों लोग आस्था के रंग में रंगे हुए थे, राम नाम जप रहे हैं, अयोध्या में जब श्री राम का भव्य मंदिर बन गया है, तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? भारत के फिर से विश्वगुरु बनने का मार्ग इसी राम मंदिर से प्रशस्त होगा। 

अयोध्या अर्थात् जिसे युद्ध में जीता न जा सके। तो इस इस अयोध्या की स्वतंत्रता की लड़ाई किससे थी? मुसलमानों से थी, राज सत्ता से थी या सांस्कृतिक स्वतंत्रता की थी? जब ढांचा टूटा, तो लौटते हुए कारसेवकों ने किसी मस्जिद को हाथ तक नहीं लगाया। बाबर के समय में मंदिर टूटने के बाद मुसलमानों के साथ व्यवहार बंद नहीं किया। यह लड़ाई भारत को उच्च सांस्कृतिक सिंहासन दिलाने की, राम के मूल्यों आदर्शों की और राम की संस्कृति के पुनर्स्थापन की थी।

हममें से बहुत से लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग नहीं लिया होगा, क्यों स्वतंत्रता के बाद हमारा जन्म हुआ। बहुतों ने शायद श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में भी भाग नहीं लिया होगा। ऐसे सभी लोगों को यह मान कर चलना चाहिए कि मंदिर का निर्माण भी आजादी की लड़ाई का ही हिस्सा है। मंदिर निर्माण के बाद एक नए भारत का उदय यह विश्व देखेगा। यही कारण है कि राम मंदिर और राष्ट्र के निर्माण में सभी सनातनी भागीदार बने। दिल खोल कर भगवान का दिया भगवान को अर्पित किया।

बाबा तुलसीदास ने श्री रामचरित मानस के एक प्रसंग में जामवंत के माध्यम से सेतु निर्माण के समय एक संदेश दिया है-
जामवंत बोले दोउ भाई। 
नल नीलहि सब कथा सुनाई।
राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। 
करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।
(अर्थात, जामवंत जी ने नल-नील दोनों भाइयों को बुला कर कहा कि मन में श्री राम जी के प्रताप का स्मरण कर सेतु तैय्यार करो। प्रभु के प्रताप से कुछ भी परिश्रम नहीं लगेगा।)


श्री राम मंदिर के निर्माण में भी इसी प्रकार उनके ही प्रताप से कोई परिश्रम नहीं लगा। यह तो अवसर था पुण्य कमाने का। तेरा तुझको अर्पण करने का। यह अवसर बहुत सौभाग्य से हमें मिला।
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